Nawazuddin Siddiqui: नवाजुद्दीन सिद्दीकी ने अपनी मेहनत और संघर्ष के बल पर बॉलीवुड में अपनी पहचान बनाई है। एक वक्त ऐसा आया जब उन्हें बहुत लोक्प्रियता मिली। नवाजुद्दीन ने उस माहौल को कैसे संभाला, उन्होंने इस पर बात की है।
नवाजुद्दीन सिद्दीकी आज बॉलीवुड के सबसे बड़े कलाकारों में गिने जाते हैं। पहले फिल्मों में छोटे-मोटे रोल निभाने वाले अभिनेता ने कई फिल्मों में लीड रोल किया है। उन्होंने वर्षों तक छोटे-मोटे रोल किए और ऐसे रोल का इंतजार किया जो उनके करियर की दिशा बदल सके। यह टर्निंग पॉइंट 2012 में फिल्म 'गैंग्स ऑफ वासेपुर 2' से आया। इसमें फैजल खान के उनके किरदार ने उन्हें इंडस्ट्री में एक खास पहचान दिलाई। अब पीछे मुड़कर देखते हुए, एक्टर ने फिल्म के रिलीज होने के बाद आए बड़े बदलाव और अचानक मिले ढेर सारे ऑफर को कैसे संभाला, इस बारे में बात की है।
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नवाजुद्दीन के पास क्यों आई थी स्क्रिप्ट की बाढ़?
नवाजुद्दीन से पूछा गया कि किस फिल्म ने उन्हें पहली बार स्टार जैसा महसूस कराया। उन्होंने तुरंत 'गैंग्स ऑफ वासेपुर 2' का नाम लिया और एनडीटी के साथ बातचीत में कहा 'बेशक, यह 'गैंग्स ऑफ वासेपुर 2' ही है।' उन्होंने याद किया कि फिल्म को मिले जबरदस्त रिस्पॉन्स की वजह से उनके पास स्क्रिप्ट्स की बाढ़ आ गई थी।
गैंग्स ऑफ वासेपुर 2
- फोटो : यूट्यूब
नवाजुद्दीन ने फैसलों को हावी नहीं होने दिया
नवाजुद्दीन सिद्दीकी ने कहा, ''गैंग्स ऑफ वासेपुर 2' के रिलीज होने के बाद, मुझे कम से कम 200 स्क्रिप्ट्स मिलीं। मेरी टेबल पर ब्लैंक चेक रखे होते थे। लोग कहते थे, 'ये रही स्क्रिप्ट और ये रहा ब्लैंक चेक। आप जो चाहें वो रकम लिख दें और जो भी तारीखें आपके पास हों, हमें दे दें।'' एक ऐसे अभिनेता के लिए जिसने वर्षों तक काम की तलाश में बिताए हों, यह स्थिति एक के बाद एक प्रोजेक्ट साइन करने का मौका हो सकती थी। हालांकि, नवाज़ुद्दीन ने अचानक मिली इस लोकप्रियता को अपने फैसलों पर हावी नहीं होने दिया।
नवाजुद्दीन ने क्यों ठुकराए ऑफिर?
सैकड़ों स्क्रिप्ट्स पर विचार करने और अपनी फीस खुद तय करने की आजादी मिलने के बावजूद, उन्होंने उन सभी को ठुकरा दिया क्योंकि उन्हें कहानी या कंटेंट पसंद नहीं आया। अभिनेता ने कहा, 'मैंने उनमें से एक भी स्क्रिप्ट नहीं चुनी क्योंकि मुझे कोई भी पसंद नहीं आई। मैंने तय किया कि मैं सही स्क्रिप्ट का इंतजार करूंगा।'
नवाजुद्दीन को नहीं करना पड़ा इंतजार
उन्होंने याद करते हुए कहा, 'मुझे काम के लिए वर्षों तक इंतजार करने की आदत हो गई थी, इसलिए मैंने सोचा कि जल्दबाजी में कुछ साइन करने के बजाय मैं दो-तीन साल और इंतजार कर सकता हूं।' उन्होंने आगे कहा, 'भगवान की कृपा से, मुझे ज्यादा इंतजार नहीं करना पड़ा, क्योंकि जल्द ही मुझे कुछ बहुत अच्छी फिल्में मिलने लगीं।'