कॉमिक थ्रिलर फिल्म की कोशिश
फिल्म ‘मिसेज अंडरकवर’ एक कॉमिक थ्रिलर फिल्म होने की कोशिश करती है। माने कि ऐसी फिल्म जिसमें रहस्य और रोमांच तो है लेकिन बीच बीच में दर्शकों को हंसाने और गुदगुदाने की कोशिशें भी हैं। हिंदी सिनेमा में निर्देशक बृज ने ‘विक्टोरिया नंबर 203’ और ‘चोर मेरा काम’ जैसी कमाल की कॉमिक थ्रिलर फिल्में बनाई हैं। मसला फिल्म ‘मिसेज अंडरकवर’ का भी कुछ कुछ वैसा ही है। प्राण जैसी मसखरी करने का मौका यहां राजेश शर्मा को मिला है। वह स्पेशल टास्क फोर्स के मुखिया हैं और अपनी एक भूली बिसरी अंडरकवर एजेंट को ऐसे मौके पर तलाशने निकले हैं जब कोई ‘कॉमन मैन’ शहर शहर युवतियों को सिर्फ इसलिए मार रहा है क्योंकि उसे महिला सशक्तिकरण की बात पसंद नहीं है। यानी अगर किसी लड़की ने उसके सामने समान अधिकारों की, पढ़ाई लिखाई की या फिर अपने बूते अपनी पहचान बनाने की बात कर दी, तो उसका मरना तय है। पुलिस कुछ करती नहीं दिखती तो एनआईए सरीखी ये स्पेशल टास्क फोर्स उसको पकड़ने निकली है। इस ‘कॉमन मैन’ ने फोर्स के सारे एजेंट्स भी मार दिए हैं। चीफ की तलाश जहां खत्म होती है, वहां पता चलता है कि 12 साल पहले टास्क फोर्स के एजेंट के रूप में प्रशिक्षित उनकी एक एजेंट कोलकाता में हंसी खुशी पारिवारिक जीवन बिता रही है।
टेकऑफ में ही लड़खड़ाई कहानी
राधिका आप्टे फिल्म ‘मिसेज अंडरकवर’ में इसी एजेंट की भूमिका में हैं। घर पर बूढ़े सास, ससुर की वह सेवा करती है। पति को समय पर दफ्तर भेजने की सारी तैयारियां करती हैं। बेटे को होमवर्क वगैरह भी निपटाती है। अब टास्क फोर्स को उसे इस मायाजाल से निकालकर असली काम पर लगाना है। फिल्म ‘मिसेज अंडरकवर’ की कहानी, पटकथा और संवाद सब इसकी निर्देशक अनुश्री मेहता ने ही लिखे हैं। और, यही इस फिल्म की सबसे कमजोर कड़ी है। कहानी को केंद्र बिंदु तक लाने के लिए वह इसे घटते हुए नहीं दिखातीं बल्कि इसके किरदार ये सब कहकर बताते हैं। टेकऑफ में गड़बड़ाई ये फिल्म अपनी उड़ान पाने के बाद संभलने की कोशिश करती है लेकिन फिल्म में रहस्य नाम की कोई चीज़ शुरू से नहीं है। कातिल कौन है? का मामला अनुश्री शुरू में ही खोल देती हैं। अब बस पूरी फिल्म इस बात पर है कि इसे अंडरकवर एजेंट दुर्गा दबोचेगी कैसे?
राधिका और सुमित ने नहीं लगाया जोर
फिल्म ‘मिसेज अंडरकवर’ अभिनेत्री राधिका आप्टे की लीड रोल वाली ऐसी फिल्म है जिसमें बतौर अभिनेत्री उनका कोई विकास होता नहीं दिखता। अपने सपने में जेम्स बॉन्ड सरीखे अपने ही एक्शन सीन देखने वाली अंडरकवर एजेंट दुर्गा के रोल में राधिका आप्टे कमाल कर सकती थीं, अगर फिल्म की पटकथा, निर्देशन और इसके कुछ साथी कलाकार ढंग के होते और इस किरदार में कुछ खास वह अपनी तरफ से दिखा पातीं। राजेश शर्मा की ही तरह सुमित व्यास भी फिल्म को बचाने की थोड़ी बहुत कोशिश ही करते दिखते हैं। लेकिन, विलेन के तौर पर उनका अभिनय औसत से कमजोर है। एक शांतचित्त कातिल का पूरा किरदार वहां आकर बिखर जाता है जहां वह अपने घर में ही कांड कर देता है।
सहायक कलाकारों ने लगाया दम
अभिनय के मामले में राधिका, सुमित और राजेश से बेहतर काम फिल्म ‘मिसेज अंडरकवर’ के सहायक कलाकारों साहब चटर्जी और रोशनी भट्टाचार्य ने कर दिखाया है, तीनों कम से कम अपने किरदार में तो हैं। राधिका, सुमित और राजेश को देखकर तो यूं लगता है कि जैसे तीनों ने बस एक और फिल्म निपटा दी है। तकनीकी टीम ने भी फिल्म ‘मिसेज अंडरकवर’ में ऐसा कोई खास हुनर नहीं दिखाया है जिसकी तारीफ करने के लिए अलग से कुछ कहना, सुनना जरूरी हो।