मिसेज चटर्जी वर्सेज नॉर्वे
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नॉर्वे के एम्बेसडर ने जताई आपत्ति
भारत में नॉर्वे के एम्बेसडर हंस जैकोब फ्रैडुलंद हैं। इस फिल्म के बारे में उन्होंने कुछ फिक्शनल बातों पर आपत्ति जताई है। एक इंटरव्यू के दौरान उन्होंने कहा, 'मिसेज चटर्जी वर्सेज नॉर्वे फिल्म फैमिली लाइफ में नॉर्वे के विश्वास और विभिन्न संस्कृतियों के प्रति हमारे सम्मान को गलत तरीके से दर्शाता है'। उन्होंने कहा, 'बच्चों, माता-पिता और चाइल्स वेलफेयर सर्विस के लिए यह आसान नहीं होता है। वैकल्पिक देखभाल एक बड़ी जिम्मेदारी है और यह कभी भी भुगतान या लाभ से प्रेरित नहीं होता है। यह फिल्म कल्चर में अंतर को प्राइमरी फैक्टर के तौर पर दिखाती है, जो कि पूरी तरह से गलत है'।
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मिसेज चटर्जी वर्सेज नॉर्वे
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देश के सिस्टम पर है गर्व
हंस जैकोब फ्रैडुलंद ने आगे कहा, 'किसी विशेष मामले में जाने बिना मैं इस बात से पूरी तरह इंकार करता हूं कि बच्चों को एक ही बिस्तर पर सुलाना या एक हाथ से खाना खिलाना वैकल्पिक देखभाल में रखने का कारण होगा'। उन्होंने कहा, 'मुझे अपने देश के सिस्टम पर गर्व है और हम लगातार अपने अनुभव से कुछ न कुछ सीखते रहते हैं और आलोचनाओं का शिकार भी होते हैं। नार्वे के अधिकारियों के पास सभी चाइल्ड प्रोटेक्शन के मामलों में गोपनीयता और गोपनीयता की सुरक्षा का वैधानिक कर्तव्य है'।
'मिसेज चटर्जी वर्सेज नॉर्वे
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क्या है फिल्म की कहानी
रानी मुखर्जी 'मिसेज चटर्जी वर्सेज नॉर्वे' के साथ स्क्रीन पर राज करने के लिए पूरी तरह तैयार हैं। एक सच्ची कहानी पर आधारित फिल्म में अभिनेत्री एक बंगाली मां की भूमिका में हैं, जो नॉर्वे में अपने बच्चों की कस्टडी जीतने के लिए पूरे देश के खिलाफ लड़ाई लड़ती है। यह फिल्म आज सिनेमाघरों में रिलीज हो चुकी है।