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आप बताइए कि क्या यही हैं इस दशक की सबसे खराब 10 फिल्में

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कुछ फिल्में ऐसी होती हैं जिनकी याद हम मल्टीप्लेक्स की कुर्सियों में ही छोड़ देना चाहते हैं। फिल्म को देखकर लगता है कि आखिर ये फिल्में बनाई क्यों गई हैं। हम आपको पिछले एक दशक में आई सबसे खराब दस फिल्में बता रहे हैं।
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हो सकता है कि आप की लिस्ट में कुछ और फिल्में इससे भी ज्यादा खराब हों। चूंकि फिल्में इतनी ज्यादा खराब बनी हैं कि हम इस लिस्ट को सबसे खराब 100 फिल्मों में भी तब्दील कर सकते हैं।

ऊफ इस फिल्म में अमिताभ क्यों थे

2003 में रिलीज हुई बूम फिल्म को इस दशक की सबसे खराब फिल्म में शामिल किया जा सकता है। आज की सुपर एक्ट्रेस कैटरीना कैफ ने इस फिल्म से डेब्‍ूय किया था। हैरानी की बात यह थी इस घटिया फिल्म का हिस्सा अमिताभ बच्चन भी बने थे।

मार डाला सुभाष घई ने

2005 में सुभाष घई ने कृष्‍णा फिल्म बनाई। इस ‌पीरियड फिल्म में विवेक ओबरॉय हीरो थे। यह शायद सुभाष घई की सबसे खराब फिल्मों में से एक थी। इस फिल्म के बारे में कहा गया कि यह फिल्‍म छोटे शहरों के सिंगल स्क्रीन सिनेमाघरों में दो दिन के बाद उतर गई।

2006 में रिलीज हुई उमराव जान

रेखा की हिट फिल्‍म उमराव जान की रीमेक जब जेपी दत्‍ता ने बनाया तो दर्शकों को लगा कि उनके साथ अत्याचार कर डाला गया। युद्घ से जुड़ी हुई शानदार फिल्में बनाने वाले जेपी दत्ता ने इस फिल्म में ऐश्‍वर्या को लीड रोल में लिया। फिल्म इतनी घटिया थी कि दर्शकों को बीच में फिल्‍म छोड़नी पड़ी।

फिर रामू टूटे कहर बनकर

2007 में राम गोपाल वर्मा ने भी दर्शकों को कम कष्ट नहीं दिया। उन्होंने हिट फिल्म शोले का रीमेक आग के नाम से बनाई। इस फिल्म को नाम दिया गया रामगोपाल वर्मा की आग। फिल्‍म में अमिताभ बच्चन और अजय देवगन की मुख्य भूमिका थी। फिल्म के घटियापन पर चुटकुले तक बन गए।

इस बार भंसाली ने रुलाया

2007 में ही संजय लीला भंसाली ने सांवरिया नाम की फिल्‍म बनाई। इस फिल्म से रणबीर कपूर और सोनम कपूर की एंट्री हुई। फिल्‍म इतनी धीमी गति की थी कि यदि दर्शक दस मिनट के लिए फिल्‍म को छोड़ भी देते तो भी वह खुद को वही पाते। यह संजय लीला की अब तक की सबसे खराब फिल्‍म मानी गई।

लाल बालों वाली प्रियंका चोपड़ा

2008 में रिलीज हुई लव स्टोरी 2050 में प्रियंका चोपड़ा की जोड़ी हरमन बवेजा के साथ बनी। इस फिल्‍म में 2050 में क्‍या हो सकता है इस बात को दिखाया गया। फिल्‍म की कहानी बेहद बकवास होने के साथ अभिनय भी बहुत खराब माना गया। यह इस दशक सबसे बुरी फिल्‍मों में से एक रही।

फिर गायक बन गए हीरो

इमरान हाशमी जब गायक से हीरो बने तब भी उन्होंने दर्शकों पर कम कहर नहीं ढाया। बतौर हीरो उनकी फिल्‍म कर्ज इतनी बुरी थी कि दर्शकों को ‌फिल्‍म बीच में ही छोड़कर उठना पड़ा। यह फिल्म पुरानी कर्ज की रीमेक थी जिसमें ऋषि कपूर और सिम्मी ग्रेवाल ने मुख्य भूमिका निभाई थी।

अक्षय ने यह फिल्म क्यों की

अक्षय कुमार के चाहने वाले आज तक नहीं जान पाए कि उन्होंनें चांदनी चौक टू चाइना फिल्‍म क्यों की। इस फिल्‍म में अक्षय कुमार का घटिया गेटअप और बेकार की कॉमेडी दर्शकों को इतनी बुरी लगी फिल्‍म को दो से तीन दिन में ही सिनेमाघरों से हटा लिया गया।

और रामू फिर आए

2012 में राम गोपाल वर्मा दर्शकों को एक बार कष्ट देने के लिए फिर आए। इस बार उनकी फिल्‍म थी डिपार्टमेंट। इस फिल्‍म में अमिताभ और संजय दत्‍त जैसे कलाकार थे जरूर लेकिन फिल्‍म बहुत ही घटिया थी। इतनी कि संजय दत्त और रामू में अनबन तक हो गई।
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एक खिलाड़ी बना हीरो

2013 की जनवरी में एक फिल्‍म आई थी। फिल्‍म का नाम राजधानी एक्सप्रेस था। फिल्म के हीरो थे लिएंडर पेस। इस फिल्‍म में लिएंडर पेस ने ऐसी ऐक्टिंग की थी कि लगता था कि उन्हें पेट दर्द की शिकायत है। करोडो की लागत से बनी इस फिल्‍म की कमाई हजारों में हुई।

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