बॉलीवुड इंडस्ट्री से दुखभरी खबर आ रही है। हिंदी सिनेमा के दिग्गजों में गिने जाने वाले निर्देशक मोहन महर्षि का निधन हो गया है। वह एक प्रसिद्ध रंगमंच निर्देशक, अभिनेता और नाटककार थे। मोहन महर्षि के निधन की पुष्टि अभिनेता पंकज झा कश्यप ने सोशल मीडिया पर की है।
पंकज झा कश्यप ने क्या लिखा
रंगमंच निर्देशक मोहन महर्षि के निधन की जानकारी लोगों को देते हुए अभिनेता पंकज झा कश्यप ने लिखा, 'मोहन महर्षि सर का जाना भारतीय रंगमंच के एक युग का अंत होना है!! मुझे सर के साथ मेरे दिल्ली के रंगमंच के दिनों में ओथेलो में काम करने का सौभाग्य मिला था!! आज भी याद है सर का सिगरेट सुलगा के बैठकर चुपचाप रिहर्सल देखना और बीच बीच में थोड़ा सा कुछ बोल देना!! मुझे ओथेलो का एक वाक्या याद आ रहा है!! नये नये जोश में मेरी कोशिश होती थी कि हर बड़े रंगमंच के गुरुओं डिरेक्टर्स के साथ ज्यादा से ज्यादा काम करुं तो एक नाटक के रिहर्सल से आते आते एसआरसी में पहुंचते पहुंचते देर हो गयी थी और मेरे वाले सीन का रिहर्सल बस होने ही वाला था!! सर थोड़े गुस्से में थे !!'
पंकज ने दी गुरुदेव को श्रद्धांजलि
अभिनेता ने आगे लिखा, 'जैसे ही मैं हॉल में घुसा सर ने कहा एंट्री करो !! रैम्प पर दौड़ते हुए मुझे जहाज़ के आने की सूचना देनी थी!! उस सीन को सर ने पनिशमैंट को तौर पर मुझसे 10 बार कराया। बहुत कुछ सीखा! मेरे इंटरव्यू के बाद सर ने तारीफ की थी और कहा कि एनएसडी और एसआरसी से सीट बचा तो हो जाएगा नहीं तो मुश्किल है !! विनम्र श्रद्धांजलि गुरुदेव!! ईश्वर आपको श्री चरणों में स्थान दें!! ऊं शांति!!'
इन नाटकों के लिए थे मशहूर
मोहन महर्षि को हिंदी में उनके क्रांतिकारी नाटकों के लिए जाना जाता है। उनके प्रसिद्ध नाटकों में आइंस्टीन, राजा की रसोई विद्योत्तमा और सांप सीढ़ी हैं। इसके साथ उन्होंने अनगिनत हिंदी नाटकों का निर्देशन भी किया, जिनमें अंधयुग, रानी जिंदन (पंजाबी), ओथेलो, हो रहेगा कुछ ना कुछ का नाम शामिल है।
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