फ्री ई-पेपर
पर्सनलाइज़्ड फ़ीड
पर्सनलाइज़्ड नोटिफ़िकेशन
चलते-फिरते ख़बरें
लॉयल्टी रिवॉर्ड्स
विज्ञापन

'चश्मेबद्दूर' की टीम से सुनें पर्दे के पीछे के किस्से

Thu, 04 Apr 2013 05:26 PM IST
रोहित मिश्र
विज्ञापन
विज्ञापन
डेविड धवन की नई फिल्म 'चश्मेबद्दूर' की टीम प्रमोशन के लिए दिल्ली आई तो उसके पास हंसा-हंसाकर लोटपोट कर देने वाले किस्से थे।
विज्ञापन


इन कलाकारो ने खुलकर फिल्म के बारे में बात की। गंभीर बातें सभी ने हंसकर टाल दी और फिल्म से जुड़ी हल्की से हल्की बात पर देर तक बतियाते रहे।

बातचीत में उन्होंने इस फिल्म के बनने की स्टाईल के साथ कैमरे के पीछे की कहानी भी शेयर की, जो फिल्म से भी ज्यादा दिलचस्प थी। आइए सुनें कुछ दिलचस्प किस्से टीम मेंबर्स की जुबानी।

अच्छे सीन तो दिखेंगे ही नहीं

"फिल्म में अच्छे सीन तो आपको दिखेंगे ही नहीं। फिल्म के डायरेक्टर डेविड धवन हर अच्छे दृश्य पर कैमरे के सामने आ जाते हैं।" दिव्युंदु शर्मा कहते हैं, "जैसे ही हम किसी कॉमेडी सीन को शूट करना शुरू करते, डेविड सर की हंसी शुरू हो जाती।"
विज्ञापन


"जब यह सीन क्लाइमेक्स पर आता तब तक डेविड धवन ठहाका लगाते हुए कैमरे के सामने हंसी से दोहरे हुए नजर आते। वह कट कहना भूल जाते और हम कलाकार डेविड सर को कैमरे के सामने देखकर यह समझ नहीं पाते कि हम सीन चालू रखें या बंद कर दें।"

फिल्म में जय का किरदार निभाने वाले सिद्धार्थ कहते हैं, "फिल्म में कई अच्छे सीन इसलिए आप नहीं देख पाएंगे क्योंकि उन दृश्यों में डेविड सर आ गए होते हैं और चाहकर भी हम वैसे दृश्य फिर नहीं दे पाए।"

सब के सब कमीने हैं

डेविड धवन कहते हैं, "मैं कॉलेज की कमीनीगीरी पर फिल्म बनाना चाहते था। मेरे पास कुछ स्क्रिप्ट आयीं लेकिन उनमें वही बांसीपन देखने को मिला। 'चश्मेबद्दूर' की इस स्क्रिप्ट में मुझे कॉलेज गोइंग लड़कों कमीना और हरामीपन दिखा। मुझे लगा इसे आज के परिवेश में ढालकर एक अच्छी कॉमेडी फिल्म बनायी जा सकती है।"

डेविड धवन कहते हैं, "यह फिल्म पुरानी चश्मेबदूर से बिल्कुल अलग होगी। उस फिल्म में अस्सी के दशक की दिल्ली थी। इस फिल्म में 2012 का गोवा है। सभी दोस्त वैसे हैं नेकदिल लेकिन वह एक-दूसरे की तफरी लेने से नहीं चूकते।"

फ्रेंड जरूरी भी होता है, कमीना भी

फिल्म के एक गाने "हर एक फ्रेंड कमीना होता है" को बताने और गाने के लिए सभी उत्साहित दिखे। तापसी ने कहा कि यह मेरा फेवरेट गाना है। दिव्युदु शर्मा कहते हैं कि यह गाना पूरी फिल्म की थीम की झलक पेश करता है।

इस गाने के बारे में बताते हुए डेविड धवन कहते हैं कि एक मोबाइल कंपनी के जिंगल "हर एक फ्रेंड जरूरी होता है" से ही मैं इस गाने के लिए प्रेरित हुआ। फिल्म में यह गाना वहां-वहां बजता है जहां-जहां इन दोस्तों ने एक-दूसरे के लिए कमीनापन किया।

हर किसी की जरूरत थी यह फिल्म

फिल्म के सभी कलाकारों ने इस बात को जस्टीफाई किया कि उन्होंने यह फिल्म की क्यों। 'रंग दे बसंती' जैसी गंभीर फिल्म कर चुके सिद्वार्थ कहते हैं कि मेरे लिए यह जरूरी हो गया था कि मैं एक हल्की कॉमेडी फिल्म करूं। मैं लंबे समय से एक जैसी फिल्में कर रहा हूं।

अली जाफर ने कहा कि मेरे लिए यह फिल्म 'तेरे बिन लादेन' से बिल्कुल उलट है। वह डॉर्क कॉमेडी थी तो यह मेन स्ट्रीम कॉमेडी है। दिव्युंदु शर्मा ने कहा कि 'प्यार का पंचनामा' के बाद मुझे ऐसी फिल्म चाहिए थी जो मेरी पिछली इमेज को पूरी तरह से धो दे।

फिल्म की एकमात्र नायिका तापसी इस बात से खुश दिखीं कि तीन हीरो के बीच में वह अकेली लड़की हैं। डेविड धवन ने कहा कि मेरे लिए इस रोल के लिए कई लड़कियां आयी थीं लेकिन मुझे तापसी में ऐसा चेहरा दिखा जिसकी जरूरत फिल्म को थी।

सेट पर अमिताभ और गोविंदा के किस्से

अली जाफर और सिद्वार्थ कहते हैं, "बचपन में हमने चंदा मामा की जितनी कहानियां बचपन में नहीं सुनीं उससे ज्यादा किस्से डेविड धवन ने इस फिल्म की शूटिंग के दौरान सुना दिए। रोज शाम को डेविड सर, अनुपम खेर के साथ महफिल लगाकर बैठ जाते। फिर शुरू होते उनकी फिल्मों के ठहाके भरे किस्से।"

"डेविड और अनुपम सर जिस तरह से करिश्मा, गोविंदा या अमिताभ बच्चन के फिल्मी किस्से सुनाते हमें लगता कि हम किसी नयी दुनिया में हैं। डेविड सर के पास किस्सों का भंडार है। उनकी किस्से को सुनाने की स्टाईल माशा अल्ला है।"
विज्ञापन


बेटे को नहीं संभाल सकते डेविड धवन

डेविड धवन से पूछा गया कि उन्होंने इस फिल्म में अपने बेटे वरूण को क्यों नहीं लिया। इस पर डेविड धवन ने बड़ा चौंकाने वाला जवाब दिया। डेविड धवन ने कहा, "बात यह है कि भाई कि मेरा बेटा मुझसे संभलता नहीं।"

उन्होंने कहा, "मैं उसे फिल्म में लेता तो या फिर उसे संभलता या फिर फिल्म को। दोनों में से किसी एक का डूबना तय था।"
और पढ़ें...
विज्ञापन
Next
AU ऐप में पढ़ें