11 जनवरी को विशाल भारद्वाज द्वारा निर्देशित फिल्म 'मटरु की बिजली का मनडोला' को बच्चे भी देख सकेंगे। फिल्म के प्रोमो को देखकर लग रहा था कि सेंसर बोर्ड इसे ए सर्टिफिकेट के साथ रिलीज करेगा। फिल्म के जो प्रोमो दिखाए जा रहे थे उसमें फिल्म के कुछ संवाद द्विअर्थी लग भी रहे थे। पिछले दिनों सेंसर बोर्ड ने इस फिल्म को देखा।
सूत्रों की माने तो सर्टिफिकेट देने के मामले में सेंसर बोर्ड के सदस्यों में एक राय नहीं थीं। कुछ सदस्यों की राय थी कि इसे ए सर्टिफिकेट्स के साथ रिलीज किया जाए। जबकि कुछ सदस्यों का मानना था कि फिल्म में ऐसा कुछ भी आपत्तीजनक नहीं है जिसके लिए इसे ए प्रमाणपत्र दिया जाए। फिल्म के निर्देशक भी चाहते थे कि फिल्म यूए प्रमाणपत्र के साथ रिलीज हो। बाद में इसे यूए प्रमाण ही मिला। यूए प्रमाण मिलने के बाद इस फिल्म को 18 साल से कम उम्र वाले बच्चे भी देख सकेंगे।
सेंसर बोर्ड किसी भी फिल्म को तीन तरह के प्रमाण पत्र के साथ रिलीज करता है। यू, यूए और ए। यूए श्रेणी की फिल्मों को बच्चे किसी भी वयस्क के साथ बैठकर देख सकते हैं। जबकि ए प्रमाणपत्र वाली फिल्में सिर्फ वयस्क देख सकते हैं। यू प्रमाणपत्र वाली फिल्में बच्चें अकेले भी देख सकते हैं। इधर बन रहीं फिल्मों को यू प्रमाणपत्र बहुत कम मिल रहा है। ज्यादातर फिल्मों को यूए और ए प्रमाणपत्र मिल रहा है।