भारतीय सिनेमा जगत में मन्ना डे को एक ऐसे पार्श्वगायक के तौर पर याद किया जाता है जिन्होंने अपने पार्श्वगायन के जरिये शास्त्रीय संगीत को विशिष्ट पहचान दिलायी। लेकिन आप शायद ही जानते होंगे की वे फुटबाल के भी बड़े दीवाने थे।
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बंगाल की माटी में जन्मे मन्ना डे भला वहां के गीत-संगीत के साथ-साथ फुटबॉल प्रेम से अछूते कैसे रहते। वह भी फुटबॉल के खासे दीवाने थे।
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मन्ना फुटबॉल के मैच देखने के लिए स्टेडियम भी पहुंच जाते थे। यही नहीं मन्ना डे ने फुटबॉलपर एक गीत भी गाया था। हालांकि 'फुटबॉल खेला फुटबॉल' बांग्ला गीत फुटबॉल आयोजन की एक दुखद पृष्ठभूमि के पीछे तैयार हुआ था।
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1980 में मोहन बगान और ईस्ट बंगाल के बीच मैच के दौरान स्टेडियम में समर्थकों के बीच जम कर हिंसा हुई थी। यूरोपीय लीग की तर्ज पर यहां पर भी फुटबॉल क्लबों के प्रेमी एक-दूसरे को मारने पर उतारू हो गए।
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यूरोपीय लीग की तरह स्टेडियम में अलग-अलग लीग के सदस्यों को अलग जगह बिठाने का प्रबंध नहीं था। स्टेडियम में हिंसा को काबू करने में वक्त लगा। तब तक काफी कुछ बर्बाद हो गया था। इसके बाद उस स्टेडियम में कोई मैच नहीं खेला गया।
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मन्ना डे ने फुटबॉल पर जो गीत गाया, उसका संदेश यही था कि खेलों को प्यार से खेलो। उसमें नफरत की कोई गुंजाइश नहीं रहनी चाहिए। 'खेला फुटबॉल खेला' की धुन रवानगी लिए हुए है।