लोग नहीं स्वीकार कर पा रहे थे
मंदिरा बेदी नेकहा, 'अब, क्रिकेट या खेल प्रसारण में हर जगह महिलाओं के लिए जगह है, लेकिन जब आप ऐसा करने वाले पहले व्यक्ति होते हैं, तो लोग आपको अलग निगाह से देखते हैं। वे आप पर कमेंट करते हैं और आपको बताते हैं कि आप वहां के लायक नहीं हैं'। ऐसी जगहों पर महिला को देखकर यही कहा जाता है, 'वो यहां क्या कर रही है? क्रिकेट पर चर्चा क्यों कर रही है'? उन्होंने आगे कहा, 'मेरे ऊपर भले कमेंट किए गए, लेकिन चैनल ने मुझे सवाल पूछने के लिए शामिल किया। वे नए दर्शक पाना चाहते थे और इसलिए उन्होंने मुझे मौका दिया। शुरुआत में यह मुश्किल था, क्योंकि बहुत कम लोग स्वीकार कर रहे थे'।
सिर झुकाकर रोया करती थीं मंदिरा
मंदिरा बेदी ने बताया कि उन दिनों लाइव टेलीकास्ट के बाद वे हर दिन फूट-फूटकर रोती थीं। एक्ट्रेस ने कहा, 'पहले एक हफ्ते में मेरे दिमाग में बहुत ज्यादा बोझ रहा। मैं बेहद चिंतित थी। बुरी तरह घबराई हुई। कैमरे की रेड लाइट आते ही चुप हो जाया करती। मुझे ये यकीन ही नहीं होता कि ये मैं ही हूं। मैं बस यही चाहती थी कि मुझे स्वीकार किया जाए, सिर्फ फर्नीचर का हिस्सा बनना चाहती थी। मंदिरा ने आगे कहा, 'एक हफ्ता हिचकिचाहट और गलतियों से भरा रहा। शो के आखिर में सिर झुकाकर मैं खूब रोती। अपने दोनों तरफ बैठे दिग्गजों से सवाल पूछती और वे बस मुझे देखते रहते। वे कैमरे की तरफ मुड़कर कुछ भी जवाब दे दिया करते, उसमें मेरे सवाल से जुड़ा कोई जवाब नहीं होता। शायद मेरे सवाल उनके लिए महत्पूर्ण नहीं थे। इससे मुझे बेइज्जती महसूस होती'।
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मंदिरा बेदी-करीना कपूर
- फोटो : इंस्टाग्राम
चैनल ने की मदद और फिर पीछे मुड़कर नहीं देखा
अभिनेत्री ने कहा धीरे-धीरे चीजें बदलीं और उनका आत्मविश्वास वापस आया। मंदिरा ने कहा, 'चैनल ने मुझे बुलाया और कहा हमने आपको एक हजार महिलाओं में से चुना है, हमें लगता है कि आप इस लायक हैं। आप कोई विश्लेषक, विशेषज्ञ या कमेंटेटर नहीं हैं। आप प्रिजेंटर हैं। वहां जाओ, फन करो और अपनी पर्सनैलिटी दिखाओ। चैनल के इस हस्तक्षेफ ने बहुत मदद की और फिर उस दिन से मैंने पीछे मुड़कर नहीं देखा। मेरे सवाल पूछने पर जब सही जवाब नहीं मिला तो मैंने दिग्गजों को टोका। धीरे-धीरे लोग मुझे स्वीकार कर रहे थे और सम्मान भी मिल रहा था'।
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मंसूर अली खान पटौदी से जुड़ा किस्सा सुनाया
मंदिरा बेदी ने करीना कपूर के ससुर यानी सैफ अली खान के पिता मंसूर अली खान पटौदी से जुड़ा किस्सा भी साझा किया और कहा कि उनसे बहुत सम्मान मिला। मंदिरा ने कहा, 'जब लोग मुझसे पूछते हैं कि 2003 में विश्व कप जीतने पर आपको सबसे अच्छी तारीफ क्या मिली थी? तो वह आपके ससुर से मिली थी। वे सेमीफाइनल और फाइनल के लिए आए थे। वे बहुत प्यारे शख्स थे। जब वे पहली बार मुझसे मिले, तो उन्होंने हाथ मिलाया और कहा, 'तो आप वही मंदिरा बेदी हैं, जिसके बारे में सब बातें करते हैं। उनसे ये सुनकर मुझे बहुत अच्छा महसूस हुआ'।
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