एक तरफ प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी हरियाणा में बेटी बचाओ बेटी पढ़ाओ अभियान को जमीनी स्तर से शुरू करने का आह्वान कर रहे हैं, दूसरी तरफ इस प्रदेश का नाम अंतरराष्ट्रीय स्तर पर रोशन करने वाली अभिनेत्री मल्लिका शेरावत का अलग ही दर्द है।
वह कहती हैं कि चूंकि मैं परिवारवालों की मर्जी के विरुद्ध अभिनेत्री बनी, इसलिए पिताजी आज तक मुझसे बात नहीं करते। इन दिनों मल्लिका लंबे अर्से बाद देश में हैं और अपनी आने वाली फिल्म डर्टी पॉलिटिक्स के प्रचार में व्यस्त हैं।
अमर उजाला से बातचीत करते हुए मल्लिका से जब देश और समाज के बारे में महिलाओं की स्थिति के बारे में पूछा गया तो उन्होंने कहा, ‘मैं हरियाणा से हूं और मैंने अपनी जिंदगी में बहुत बार देखा है कि महिला होने के कारण मुझे दबाया गया। पिताजी आज तक मुझसे बात नहीं करते।
बोलीं, इस हालात के पीछे ताने मारने वाला समाज है
महिलाओं का उत्पीड़न एक कड़वी हकीकत है और मैंने ये जिंदगी जी है।’ भविष्य में मल्लिका पीड़ित महिलाओं के लिए एक एनजीओ बनाना चाहती हैं, जहां वे शिक्षा के साथ उन्हें अपने पैरों पर खड़ा होने योग्य बनाना चाहती हैं।
मल्लिका से जब कहा गया कि वह विश्व स्तर पर पहचान बना चुकी हैं और उनकी स्थिति पर आसानी से विश्वास नहीं होता। इस पर उन्होंने कहा, ‘यह हकीकत है। कुछ महीने पहले मेरे भाई की शादी हुई थी और मैं घर गई थी। सारा परिवार था, हम मिले।
लेकिन एक पिता जो अपनी बेटी को संबल देता है वह अब भी नहीं है। उनमें अभी तक नाराजगी है।’ परंतु मल्लिका ने यह भी कहा, ‘इस स्थिति के लिए मैं पिता का कसूरवार नहीं मानती क्योंकि वे जिस समाज में रहते हैं, वहां लोग उन्हें ताने मारते हैं कि तुम्हारी बेटी फिल्मों में ऐसे-वैसे कपड़े पहन रही है।
बोली विदेश में सच बोलने पर हुई थी आलोचना
एक पिता के लिए यह सुनना आसान नहीं है। मुझे लगता है कि हमें समाज में बदलाव लाने की जरूरत है।’ मल्लिका ने कहा कि हमारे देश में लड़कियों को शिक्षा देकर मजबूत बनाने की सबसे ज्यादा जरूरत है। भले ही देश में बहुत उन्नति हो रही है, मगर महिलाओं की स्थिति वाकई खराब है।
उन्होंने आश्चर्य व्यक्त किया कि जब अंतरराष्ट्रीय मंच पर उन्होंने यह बात कही कि हमारे यहां महिलाओं की शिक्षा ठीक से नहीं होती, भ्रूण हत्या की जाती है, उन्हें दबाकर रखा जाता है तो कई लोगों आलोचना की।
मल्लिका ने कहा, ‘कई हीरोइनों ने मेरे विरुद्ध बातें कही। यहां तक कि प्रियंका चोपड़ा ने भी मेरी आलोचना की कि आप ये बातें कैसे कह सकती हैं।’