खजुराहो फिल्म फेस्टिवल
- फोटो : amar ujala mumbai
इन लोगों ने आरोप ये भी लगाया कि खजुराहो इंटरनेशनल फिल्म फेस्टिवल के आयोजक जानबूझकर मुख्यधारा के पत्रकारों को इससे दूर रखते हैं ताकि उनकी गड़बड़ियां सामने न आ सकें। लेकिन, इस बार छतरपुर के कलेक्टर ने पूरे मामले की छानबीन करने का फैसला किया है और इस बारे में अपनी रिपोर्ट शासन को भी भेजी है। इसी का नतीजा रहा कि जब राज्य के पर्यटन और राजस्व मंत्री गोविंद सिंह राजपूत इस फेस्टिवल में आए तो उन्होंने स्थानीय कलाकारों का असंतोष दूर करने की पूरी कोशिश की। मौके पर मौजूद लोगों के मुताबिक राजपूत ने ही राज्य में प्रस्तावित नई फिल्म नीति की जानकारी दी और ये भी बताया कि अब से सिर्फ उन्हीं फिल्मों को मध्य प्रदेश सरकार आर्थिक सहायता देगी जिनमें कम से कम 70 फीसदी कलाकार राज्य के होंगे।
खजुराहो फिल्म फेस्टिवल
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मध्य प्रदेश में हाल के दिनों में हिंदी की फिल्में और वेब सीरीज खूब शूट होती रही हैं। स्थानीय कलाकारों व संगठनों का आरोप है कि इस तरह के फिल्म निर्माण में प्राकृतिक संपदाओं का बेतरतीब दोहन होता है और इस दौरान स्थानीय संस्कृति व परंपराओं का भी ध्यान नहीं रखा जाता। निर्माता निर्देशक प्रकाश झा को भी इसी के चलते अपनी वेब सीरीज ‘आश्रम’ के अगले सीजन की शूटिंग के दौरान विरोध का सामना करना पड़ा था। बाद में प्रशासनिक हस्तक्षेप के बाद ही वह अपनी शूटिंग प्रदेश की राजधानी भोपाल में पूरी कर पाए थे।
मध्य प्रदेश पर्यटन विभाग के सूत्र बताते हैं कि राज्य सरकार ने पर्यटन विभाग, गृह विभाग और राजस्व विभागों को प्रदेश की नई फिल्म नीति बनाने की जिम्मेदारी सौंपी है और इसका नोडल विभाग पर्यटन विभाग को ही बनाया है। इस नई नीति का मसौदा बनकर तैयार हो चुका है और इसे शासन को भेजा भी जा चुका है। इसके नए साल से लागू होने की उम्मीद स्थानीय कलाकार जता रहे हैं। नई नीति में स्थानीय कलाकारों की सहभागिता सुनिश्चित करने के अलावा ये भी शर्त लगाई गई है कि प्रदेश में शूटिंग के लिए अब फिल्मकारों को स्थानीय प्रशासन से पूर्व अनुमति लेनी जरूरी होगी। खजुराहो इंटरनेशनल फिल्म फेस्टिवल के उद्घाटन के दिन भी स्थानीय कलाकारों ने इसका जमकर विरोध किया और इसकी सूचना मिलने के बाद से ही राज्य सरकार इस दिशा में सक्रिय हो गई थी।