संवाद लेखन और गीत लेखन के लिए अभिलाष को सुर आराधना अवॉर्ड, मातो श्री अवॉर्ड, सिने गोवर्स अवॉर्ड, फिल्म गोवर्स अवॉर्ड, अभिनव शब्द शिल्पी अवॉर्ड, विक्रम उत्सव सम्मान, हिंदी सेवा सम्मान आदि से सम्मानित किया गया है। अदालत, धूप छांव, दुनिया रंग रंगीली, अनुभव, संसार, चित्रहार, रंगोली और ॐ नमो शिवाय जैसे अनेक लोकप्रिय धारावाहिकों में अभिलाष ने अपनी कलम की छाप छोड़ी है।
गीतकार अभिलाष ने स्क्रीन राइटर्स एसोसिएशन के ज्वॉइंट सेक्रेटरी और आईपीआरएस के डायरेक्टर का पद भी संभाला। साथ ही अपने प्रोडक्शन हाउस मंगलाया क्रिएशन के तहत टीवी के लिए कई धारावाहिकों का निर्माण भी उन्होंने किया। हिंदी सिने जगत में रचनात्मक योगदान के लिए गीतकार अभिलाष को गीत गौरव सम्मान से विभूषित किया गया।
गीतकार अभिलाष का जन्म 13 मार्च 1946 को दिल्ली में हुआ। दिल्ली में उनके पिता का व्यवसाय था। वह चाहते थे कि अभिलाष व्यवसाय में उनका हाथ बटाएं। लेकिन ऐसा संभव नहीं हुआ। छात्र जीवन में बारह साल की उम्र में अभिलाष ने कविताएं लिखनी शुरू कर दी थीं। मैट्रिक की पढ़ाई के बाद वे मंच पर भी सक्रिय हो गए। उनका वास्तविक नाम ओम प्रकाश है। उन्होंने अपना तखल्लुस 'अजीज' रख लिया। ओमप्रकाश 'अजीज' के नाम से उनकी गजलें, नज्में और कहानियां कई पत्र-पत्रिकाओं में प्रकाशित हुईं।
'अजीज' देहलवी नाम से अभिलाष ने मुशायरों में शिरकत की। मन ही मन साहिर लुधियानवी को अपना उस्ताद मान लिया। दिल्ली के एक मुशायरे में साहिर लुधियानवी पधारे। नौजवान शायर 'अजीज' देहलवी ने उनसे मिलकर उनका आशीर्वाद लिया। साहिर साहब को कुछ नज्में सुनाईं। साहिर ने कहा, ‘मुझे ऐसा लग रहा है जैसे मैं तुम्हारे मुंह से अपनी नज्में सुन रहा हूं। तुम अपना रास्ता अलग करो। ऐसी गजलें और नज्में लिखो जिसमें तुम्हारा अपना रंग दिखाई पड़े। साहिर का मशविरा मानकर वे अपने रंग में ढल गए।‘ ओमप्रकाश 'अजीज' सिने जगत में बतौर गीतकार दाखिल हुए तो उन्होंने अपना नाम अभिलाष रख लिया।
अभिलाष का कहना था कि अब सिने गीतों की भाषा बदल गई। सिने गीत फास्ट फूड बन गए हैं। इन्हें सुनकर दिल को सुकून नहीं मिलता। पहले गीतों में महबूब को 'आप' कहा जाता था। फिर 'तुम' पर आए और अब 'तू' लिखा जा रहा है। गीतों से शायरी गायब हो गई है। जिंदगी की जरूरतों को पूरा करने के लिए अब गीत बेचना पड़ता है। मोबाइल की एक कॉलर ट्यून के लिए उपभोक्ता को 30 रुपये महीना भुगतान करना पड़ता है। ‘इतनी शक्ति हमें देना दाता’ गीत को दो करोड़ से अधिक लोगों ने अपनी कॉलर ट्यून बनाया। लेकिन, कॉपीराइट अमेंडमेंट बिल 2012 पास होने के बावजूद इससे जबरदस्त कमाई करने वाली टी सीरीज म्यूजिक कम्पनी ने इसके गीतकार अभिलाष को कोई भुगतान नहीं किया।