जब भी भारतीय फिल्मों, संगीत का इतिहास लिखा जाएगा तो उसमें लता मंगेशकर का नाम शामिल किया जाएगा। इस महान गायिका की आवाज के कारण ही हिंदी फिल्मों के गाने खास बने, ये गाने आज भी गुनगुनाए जाते हैं। लता मंगेशकर की पुण्यतिथि (6 फरवरी 2022) पर जानिए, उनकी जिंदगी से जुड़े अनसुने किस्से।
बॉलीवुड को, भारतीय फिल्मों को आगे बढ़ाने में, इसे समृद्ध करने में कई लोगों ने योगदान दिया है, इन्हीं में से एक गायिका लता मंगेशकर भी रहीं। अपने पूरे संगीत करियर में उन्होंने कई भाषाओं में लगभग 50 हजार से ज्यादा गाने गाए हैं। उनके गाए कई गाने सुपरहिट हुए, ये गाने सदाबहार भी बन गए। लता मंगेशकर की पुण्यतिथि पर उनके जीवन से जुड़ी कुछ खास बातें, कुछ अनसुने किस्सों के बारे में, जानिए।
सिंगर बनने से पहले एक्टिंग की
लता मंगेशकर ने बहुत कम उम्र में ही फिल्मी गाने गाना शुरू कर दिया था लेकिन इससे पहले उन्होंने एक्टिंग भी की। लता जी के पिता दीनानाथ मंगेशकर रंगमंच के कलाकार थे। अपने पिता के नाटकों में सबसे पहले लता मंगेशकर ने अभिनय किया। यहां तक कि बचपन में उनका नाम हेमा था लेकिन पिता के नाटक के एक किरदार पर उनका नाम लता रख दिया गया। सबकुछ अच्छा चल रहा था कि लता मंगेशकर के पिता का निधन हो गया, उस समय वह महज 13 साल की थीं। इतनी छोटी उम्र में ही लता पर घर-परिवार की जिम्मेदारी आई। तब उन्होंने फिल्मों में एक्टिंग करनी शुरू की। साल 1942 में रिलीज हुई फिल्म ‘पहिली मंगलागौर’ में उन्होंने एक्टिंग की। इसके अलावा भी कुछ 8 फिल्मों में लता मंगेशकर ने एक्टिंग की लेकिन उन्हें एक्टिंग करना अच्छा नहीं लगता था। ऐसे में संगीत की राह चुनी और परिवार संग इंदौर से मुंबई आ गईं।
मोहम्मद रफी से क्यों हुईं नाराज
लता मंगेशकर और सिंगर मोहम्मद रफी ने कई बेहतरीन गाने साथ में गाए हैं। लेकिन एक समय ऐसा भी आया, जब लता मंगेशकर मोहम्मद रफी से नाराज हो गई थीं। दरअसल, किस्सा कुछ यूं है कि लता मंगेशकर और कुछ बड़े सिंगर चाहते थे कि अगर संगीतकारों को गाना बनाने की रॉयल्टी मिलती है तो सिंगर को भी रॉयल्टी मिलनी चाहिए। इस बात पर रफी साहब राजी ना थे। इसी कारण से लता और रफी के बीच बहस हुई। इसी दौरान रफी ने कहा है कि वह लता मंगेशकर के साथ गाना नहीं गाएंगे। लता भी नाराज हो गईं, उन्होंने भी सभी संगीतकारों को कह दिया कि वह रफी साहब के साथ गाना नहीं गाएंगी। बातचीत ना करने और गाना ना गाने का यह सिलसिला लगभग तीन साल चला। बाद में दोनों सिंगर्स के बीच रिश्ते बेहतर हुए और इन्होंने दोबारा साथ में गाना शुरू किया।
लता मंगेशकर ने शादी क्यों नहीं की
पिता के गुजर जाने के बाद लता मंगेशकर पर पूरे परिवार की जिम्मेदारी थी। एक यह कारण था उनका शादी ना करने का। वहीं कुछ मीडिया रिपोर्ट्स में ऐसा भी कहा जाता है कि एक समय के बाद लता जी के जीवन में प्रेम ने दस्तक दी थी। वह राज सिंह डूंगरपुर से शादी करना चाहती थीं, वह एक राज परिवार से संबंध रखते थे। राज सिंह के परिवार वाले लता के साथ उनके विवाह के लिए नहीं माने। इसके बाद लता मंगेशकर ने कभी विवाह के बारे में नहीं सोचा।
जब भावुक हुए जवाहर लाल नेहरू
लता मंगेशकर का गाया एक गाना ‘ऐ मेरे वतन के लोगों…’ एक सदाबहार, यादगार गीत है। इसी गीत को सुनकर देश के पहले प्रधानमंत्री जवाहर लाल नेहरू भावुक हो गए थे, उनकी आंखें भींग गई थीं। इस गाने को लता मंगेशकर ने दिल्ली में 1962 में एक कार्यक्रम में गाया था। इस गाने में सैनिकों के बलिदान को बयां किया गया। इस गाने को सुनने के बाद जवाहर लाल नेहरू लता मंगेशकर से मिले और उनसे कहा कि ‘ऐ मेरे वतन के लोगों…’को सुनकर उनकी आंखों में आंसू आ गए। आगे चलकर यह गाना लता जी के म्यूजिक करियर का सबसे मशहूर गीत बना, इस गाने को कवि प्रदीप ने लिखा था।