भजन गायक लखबीर सिंह लक्खा
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ऐसे हुई भक्ति गीतों के सफर की शुरुआत
लखबीर सिंह लक्खा का जन्म 25 अगस्त 1950 को पंजाब में हुआ था, लेकिन उनकी परवरिश झारखंड के जमशेदपुर में हुई। उनके परिवार में शुरू से ही धार्मिक माहौल था और उनके माता-पिता की भक्ति भावना से उन्हें इस राह पर चलने के लिए प्रेरणा मिली। मात्र 14 साल की उम्र में लखबीर ने जमशेदपुर के टाटा नगर गुरुद्वारे में शबद कीर्तन शुरू किया। यहीं से उनके भक्ति संगीत की यात्रा की नींव पड़ी। पंजाबी लहजे में भजनों को गाने की उनकी अनूठी शैली ने उन्हें जल्द ही भक्तों के बीच लोकप्रिय बना दिया।
सभी देवी-देवताओं के भक्ति गीत गए चुके हैं लखबीर
लखबीर सिंह लक्खा की खासियत यह है कि वह एक ऑलराउंडर गायक हैं। जहां कई भक्ति गायक केवल एक देवी-देवता के भजनों तक सीमित रहते हैं, वहीं लखबीर ने माता दुर्गा, भगवान शिव, हनुमान, श्रीकृष्ण, और खाटू श्याम जैसे सभी देवी-देवताओं के भजनों को अपनी आवाज दी है। उनकी गायकी में एक ताजगी और भक्ति का ऐसा संगम है, जो सुनने वाले को मंत्रमुग्ध कर देता है।
आज कल क्या कर रहे हैं लखबीर?
74 साल की उम्र में भी लखबीर सिंह लक्खा भक्ति संगीत के प्रति उतने ही समर्पित हैं, जितने वह अपने करियर के शुरुआती दिनों में थे। 2022 में उन्नाव में एक कार्यक्रम के दौरान उन्होंने बताया कि वह भजन गायन में 50 साल पूरे कर चुके हैं और अब भी नए भजनों पर काम कर रहे हैं।
हाल ही में उन्होंने होली पर एक गीत पेश किया था और जल्दी ही श्रीराम पर एक गाना पेश करने जा रहे हैं। इसके साथ ही उनके इंस्टाग्राम की पोस्ट से पता चलता है कि आज भी वे भजन-कीर्तनों और धार्मिक कार्यक्रमों में भक्ति गीतों की प्रस्तुति देते हैं। कई जगह उन्हें सम्मान देने के लिए अतिथि के रूप में बुलाया जाता है। उम्र के इस पड़ाव पर भी लखबीर कई एल्बम लॉन्च कर चुके हैं।
लखबीर सिंह लक्खा की सोशल मीडिया उपस्थिति भी काफी मजबूत है। उनके आधिकारिक फेसबुक पेज को चार लाख से ज्यादा लोग फॉलो करते हैं, जहां वह अपने नए भजनों और कार्यक्रमों की जानकारी साझा करते रहते हैं। उनके इंस्टाग्राम पर ढाई लाख से ज्यादा फॉलोवर्स हैं, जहां वे अपने जागरण कार्यक्रमों की झलकियां साझा करते हैं।
लखबीर के भजनों के बिना अधूरी रहती है नवरात्रि
नवरात्रि के दौरान माता रानी के भजनों का विशेष महत्व होता है और लखबीर सिंह लक्खा के भजन इस पर्व को और भी भक्तिमय बना देते हैं। उनके गीत 'प्यारा सजा है तेरा द्वार भवानी', 'बिगड़ी बना दे देवी' और 'मैया का चोला' जैसे भजनों के बिना नवरात्रि का जगराता अधूरा सा लगता है। उनकी गायकी में माता रानी के प्रति जो भक्ति और समर्पण झलकता है, वह भक्तों को माता के चरणों तक ले जाता है।
लखबीर सिंह लक्खा ने एक इंटरव्यू में कहा था, 'मां दुर्गा की कृपा से मुझे देश-विदेश में भक्तों का अपार प्यार मिला। मैंने हमेशा भक्ति को अपनी गायकी का आधार बनाया और कोशिश की कि मेरे भजन सुनकर लोगों के मन में सकारात्मकता आए। वह युवा पीढ़ी को भी भक्ति संगीत से जोड़ने की कोशिश कर रहे हैं, ताकि यह परंपरा आगे बढ़ती रहे।'