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‘जसवंत सिंह खालरा को फिर अगवा किया गया’, ‘सतलुज’ बैन पर कुणाल कामरा का तीखा पोस्ट; CBFC से पूछे कड़े सवाल

Mon, 06 Jul 2026 09:25 PM IST
संदेश मेहरा एंटरटेनमेंट डेस्क, अमर उजाला

सार

Kunal Kamra on Satluj Movie: स्टैंडअप कॉमेडियन कुणाल कामरा ने फिल्म ‘सतलुज’ को ओटीटी से हटाए जाने पर सेंसरशिप को लेकर बड़ा सवाल उठाया है। जानिए क्या है पूरा मामला। 

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सतलुज फिल्म पर बोले कुणाल कामरा - फोटो : सोशल मीडिया
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विस्तार
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दिलजीत दोसांझ की फिल्म ‘सतलुज’ इन दिनों सुर्खियों में है। अब इस फिल्म पर कुणाल कामरा ने भी अपना रिएक्शन दिया है। उन्होंने एक तीखा पोस्ट शेयर किया है, जो सोशल मीडिया पर चर्चा में आ गया है।

एक्स पर किया तीखा पोस्ट 

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दिलजीत दोसांझ की फिल्म ‘सतलुज’, जिसे पहले ‘पंजाब ’95’ के नाम से जाना जाता था, को रिलीज के 48 घंटे के अंदर ही जी5 से हटा दिया गया। यह फिल्म बिना किसी कट के प्लेटफॉर्म पर रिलीज हुई थी। इसी पर प्रतिक्रिया देते हुए कुणाल कामरा ने एक ओपन नोट लिखा।

उन्होंने पोस्ट शेयर कर सवाल पूछा, ‘क्या आप बता सकते हैं कि ‘पंजाब ’95’ के लिए 127 कट्स क्यों सुझाए गए थे? वही फिल्म, जो अब ‘सतलुज’ के नाम से आई, उसे दो दिन के अंदर ही ओटीटी से हटा दिया गया। जबकि सीबीएफसी का ओटीटी प्लेटफॉर्म्स या इंटरनेशनल रिलीज पर कोई अधिकार नहीं होता।’

सतलुज फिल्म रिव्यू - फोटो : इंस्टाग्राम-@Zee5

जनता को कारण जरूर पता होना चाहिए
कामरा ने आगे लिखा कि यह फिल्म जसवंत सिंह खालरा की कहानी बताती है, जिन्होंने मानवाधिकारों के उल्लंघन को उजागर किया था और इसकी कीमत अपनी जान देकर चुकाई। उन्होंने कहा कि अगर सच्ची घटनाओं पर बनी फिल्म को लोग देख ही नहीं सकते, तो जनता को इसका कारण जरूर पता होना चाहिए।

उन्होंने यह भी कहा कि इससे फिल्ममेकर्स को एक साफ संदेश जाता है कि अगर वे किसी खास समुदाय के महान व्यक्ति की कहानी दिखाएंगे, तो उन्हें काफी मुश्किलों का सामना करना पड़ेगा।

सतलुज फिल्म रिव्यू - फोटो : इंस्टाग्राम-@Zee5

सेंसर बोर्ड पर लगाए गंभीर आरोप
कुणाल कामरा ने सेंसर बोर्ड पर दोहरे मापदंड अपनाने का आरोप भी लगाया। उन्होंने पत्रकारों से अपील की कि वे इस मुद्दे पर सख्त सवाल पूछें कि कुछ फिल्मों को आसानी से मंजूरी मिल जाती है, जबकि कुछ फिल्मों को वर्षों तक इंतजार करना पड़ता है।

उन्होंने उदाहरण देते हुए कहा कि कुछ फिल्मों को रेड कार्पेट मिलता है, जबकि कुछ को मुश्किलों का सामना करना पड़ता है। उन्होंने यह भी सवाल उठाया कि किसी डायरेक्टर के कई वर्षों की मेहनत को इस तरह रोक देना कितना सही है।

अपने नोट के आखिर में कामरा ने लिखा, ‘नेहरू के समय में इस तरह के मामलों को कोर्ट में चुनौती दी जाती थी।’

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खालरा को फिर ‘अगवा’ कर लिया गया है
उन्होंने सवाल किया कि अगर सच्ची कहानियां दिखाने पर इतनी रुकावटें आएंगी, तो आखिर किस तरह का सिनेमा आगे बढ़ेगा। अंत में उन्होंने तीखी टिप्पणी करते हुए कहा कि जसवंत सिंह खालरा को एक बार फिर ‘अगवा’ कर लिया गया है- इस बार सीबीएफसी द्वारा।

ये भी पढ़ें- Satluj Movie Leaked: ऑनलाइन लीक हुई ‘सतलुज’, जी5 ने पाइरेसी पर जताई नाराजगी, पोस्ट कर लोगों से की ये अपील

बता दें कि ‘सतलुज’ फिल्म का निर्देशन हनी त्रेहान ने किया है और इसमें दिलजीत दोसांझ ने मानवाधिकार कार्यकर्ता जसवंत सिंह खालरा का किरदार निभाया है।

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