फ्री ई-पेपर
पर्सनलाइज़्ड फ़ीड
पर्सनलाइज़्ड नोटिफ़िकेशन
चलते-फिरते ख़बरें
लॉयल्टी रिवॉर्ड्स
विज्ञापन

सरकारों से समस्याओं का समाधान मांगना छोड़ कर खुद हल निकालें युवा: तापसी पन्नू

Wed, 15 Aug 2018 06:13 PM IST
तापसी पन्नू, फिल्म अभिनेत्री
विज्ञापन
तापसी पन्नू
विज्ञापन
देश के सारे युवा समाज को बेहतर बनाने वाले बदलाव चाहते हैं। वे गलत चीजों पर सवाल उठाने की इच्छा और शक्ति रखते हैं। वे पुरानी-कमजोर धारणाओं को बदलने को तत्पर हैं। मुझे नहीं पता कि इन युवाओं के सवालों के जवाब समाज या सरकार के पास हैं या नहीं ? यह भी नहीं जानती कि पिछले 71 वर्षों में जितनी सरकारें बनीं, उनके पास इन युवाओं की समस्याओं के हल या सवालों के जवाब थे या नहीं। अगर थे भी, तो वे जवाब देना चाहती थी या नहीं, यह भी अपने आप में सवाल है। ऐसा नहीं है कि पिछली सरकारों में सब कुछ ठीक रहा हो और अभी ही तमाम बातें हो रही हों। मुझे लगता है कि आज हमें सरकारों से समस्याओं का समाधान मांगना छोड़ कर खुद आपस में बात करके निकालना चाहिए। हम ही सरकार चुनते हैं। बेहतर हो कि मुश्किलों को लेकर हम एक - दूसरे के साथ बैठकर सवाल - जवाब करें। सरकारें हर समास्या का समाधान नहीं दे सकतीं।
विज्ञापन


 

सोशल मीडिया पर खूब बातें

Taapsee Pannu
सोशल मीडिया पर खूब बातें हो रही हैं। परंतु अब इसका हद से ज्यादा इस्तेमाल होने लगा है। फेक आईडी बनाकर कुछ लोग नफरत फैलाने का काम करते हैं। इन्हें अपनी लिखी बातों के पीछे तर्क भी नहीं पता होते, क्योंकि उनके पास शिक्षा नहीं है। शिक्षा का मतलब डिग्री नहीं है। शिक्षा वह है, जो समाज की बेहतरी के काम आए। अशिक्षित लोगों के पास सोशल मीडिया होगा, तो आप क्या उम्मीद कर सकते हैं? लेकिन यह जरूरी नहीं कि आप इनसे इनकी ही भाषा में बात करें, क्योंकि तब तो आपके शिक्षित होने पर भी सवाल उठेंगे।

 

हर समस्या की जड़ें यहीं

आज सबसे ज्यादा जरूरत शिक्षा व्यवस्था को सुधारने की है। हर समस्या की जड़ें यहीं मिलेंगी। अशिक्षित या कम पढ़े-लिखे लोग ही अपना वक्त आपसी लड़ाई - झगड़ों में जाया करते हैं।  जिम्मेदार लोगों से सवाल पूछा जाना चाहिए, कि सबके लिए समान रूप से अच्छी शिक्षा व्यवस्था क्यों नहीं है? लेकिन बदकिस्मती से हम अपने हिंदू या मुसलमान होने से जन्म वाले  सवालों पर ही बहस करते रहते हैं। । गौर से देखें, तो महिलाओं की स्थिति और उनके विरुद्ध होने वाले अपराधों का सवाल भी शिक्षा से ही जुड़ा है। लोगों के पास शिक्षा ही नहीं कि घर और बाहर महिलाओं के साथ कैसा बर्ताव किया जाना चाहिए। शिक्षा के साथ ही ये समस्याएं भी हल हो सकती हैं।
 

यह दौड़ अभी लंबी है

मेरे मन में बहुत गहरा विश्वास है कि हमारे देश की बहुसंख्यक आबादी समझदार और संस्कारवान है। वह सही - गलत में फर्क जानती है। वे लोग बहुत ही कम तादाद में हैं, जिनमें अक्ल या सोच नहीं है कि क्या सही और क्या गलत है। इन बातों के बीच परेशानी सिर्फ यह है कि अच्छी और सही सोच वाले लोग बोलते नहीं हैं।

वे सोचते हैं कि कौन इस पंगे में पड़े। वे गलत चीजों को नजर अंदाज कर देते हैं। समस्या यहां से शुरू होती है। वैसे यह समय बदलेगा। अच्छे लोगों को भी लगने लगा है कि देश - समाज को बदलना है, तो खड़े होना पड़ेगा। अच्छे लोग भी अब राजनीति का हिस्सा बनने लगे हैं, मगर यह दौड़ अभी लंबी है।
 
विज्ञापन

उसके बाद रेप बंद नहीं हुए

समय लगेगा, लेकिन यह सच है कि शिक्षित लोगों के बढ़ने और इंटरनेट की सुलभता से लोगों की जागरूकता बढ़ी है।जहां तक सिनेमा की बात है, तो भले ही वह आपको किसी समस्या का समधान न दे, परंतु उसमें इतनी ताकत जरूर होती है कि किसी की सोच बदल दे। पिंक (2016) के वक्त देखिए क्या हुआ। यह सही है कि उसके बाद रेप बंद नहीं हुए या लड़कियों पर हमले होने बंद हो गए, लेकिन लोगों ने सवाल उठाने शुरू कर दिए। लड़कियां आगे आकर प्रश्न करने लगीं कि मेरी न को न क्यों नहीं माना जाता? सिनेमा लोगों में सवाल उठाने का आत्मविश्वास पैदा करता है।   
विज्ञापन
Next
AU ऐप में पढ़ें