फारुक का उत्तर प्रदेश से करीबी नाता रहा है। उनके नाना मुराद रामपुर के रहने वाले थे। वह बताते हैं, ‘रामपुर मेरा बहुत आना जाना रहा है। वहां की रजा लाइब्रेरी दुनिया की सबसे मशहूर लाइब्रेरीज में से एक है। ज्ञान का अथाह भंडार है ये। मुझे लगता है पढ़ने का शौक मुझे अपने ननिहाल से ही आया।’
पूरे देश की 27 हजार किमी की यात्रा कर चुके फारुक कबीर कहते हैं, ‘अखबार के अलावा जिस दूसरी चीज ने मुझे जिंदगी में बहुत कुछ सिखाया है, वह है मेरी यात्राएं। मैंने अपनी एक सीरीज के लिए पूरा देश घूमा है। गांवों में लोगों से मिला हूं। सड़कों के किनारे ढाबों पर खाना खाया है और खुले आसमान के नीचे सोया हूं। यहां भी अखबार ने मुझसे दोस्ती निभाई। देश का हर रंग उस इलाके के अखबार अपने में संजोए रहते हैं। किसी क्षेत्र को मुझे जानना होता है तो वहां जाने से पहले मैं वहां के अखबार पढ़ने शुरू कर देता हूं।’
फारुक कबीर की फिल्म ‘खुदा हाफिज’ सीधे ओटीटी पर रिलीज हो रही है, लेकिन इसका फारुक को कोई गिला नहीं है। वह कहते हैं, ‘जिस तरह का माहौल इन दिनों देश दुनिया में है, उसके चलते सिनेमाघरों तक लोगों के आने में अभी काफी समय लगेगा। तब तक हमें ये फिल्में घर पर बैठकर ही देखने की आदत डालनी होगी। ये सच है कि फिल्म के एक्शन सीन बड़े परदे के हिसाब से ही डिजाइन किए गए हैं, लेकिन इसका आनंद लोग घर में भी अच्छे से उठा सकेंगे, ऐसा मेरा और विद्युत जामवाल दोनों का वादा है।’
फोन पर हुई इस बातचीत के बाद फारुक कबीर ने अपनी फिल्म के हीरो विद्युत जामवाल और हीरोइन शिवालिका ओबेरॉय को साथ लेकर अमर उजाला के साथ एक खास वीडियो मुलाकात भी की। ये पूरी बातचीत आप यहां नीचे दिए गए लिंक पर क्लिक करके देख सकते हैं।