कैटरीना कैफ पर्सनल लाइफ के सवालों से बचती हैं मगर उनकी आने वाली फिल्म बार बार देखो आज के समय में रिश्तों की मुश्किलों को सामने लाती हैं। वो जटिलताएं जिनसे कैटरीना का भी आमना-सामना हुआ। फिल्मों और नए जमाने में रिश्तों के ताने-बाने को लेकर कैटरीना कैफ से बातचीत।
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मैं बहुत रियलिस्टिक हूं। चीजें जैसी सामने आती हैं, उन्हें वैसी ही लेती हूं। मैं खुद को भाग्यशाली मानती हूं कि मेरी ज्यादातर फिल्मों को दर्शकों ने प्यार दिया। शायद तीन फिल्में हैं करिअर में जिनका नतीजा बिल्कुल संतोषजनक नहीं रहा। युवराज, फैंटम और फितूर। वैसे फैंटम ठीक-ठाक थी। युवराज और फितूर को दर्शकों ने बिल्कुल नहीं स्वीकारा। मुझे लगता है कि इन फिल्मों में गड़बड़ियां थीं। ऑडियंस कभी गलत नहीं होती।
कभी आपको लगा कि मीडिया ईमानदार नहीं है क्योंकि पिछले दिनों ढेर सारी गॉसिप्स और नेगेटिवि विश्लेषण आते रहे?
ऐसा कभी नहीं लगा। मैं मानती हूं कि मीडिया मेरे साथ बहुत फेयर है। अगर फिल्म अच्छी नहीं बनी तो वो लिखते हैं। अच्छी बनी तो बहुत तारीफ भी करते हैं। पर्सनल लाइफ भी मीडिया लिखता है, वह उसका काम है।
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मैं मीडिया के लोगों को रोज फोन नहीं कर सकती
- फोटो : getty images
बातें कभी सही होती हैं, कभी गलत भी होती हैं!
इसमें कुछ नहीं हो सकता। उन्हें जो भी बातें सुन कर या कहीं से पता चलती हैं तो वह लिखते हैं। मेरा हॉटलाइन कनेक्शन सबके पास तो है नहीं! हां, अगर ऐसी बातें आती हैं जो वाकई मुझे नुकसान पहुंचा सकती हैं तो मैं मीडिया में स्पष्ट भी करती हूं। पिछले साल तीन-चार बार ऐसा किया और मीडिया ने मेरी बात भी लिखी। अब सोशल मीडिया भी है तो आर्टिस्ट खुद भी अपने प्लेटफॉर्म पर बात कर सकता है। परंतु मैं ऐसा नहीं करती।
फिर भी लंबे समय तक दूर रहने के बाद आप सोशल मीडिया में आईं। क्या जरूरत महसूस हुई?
खुद की लाइफ के लिए। अपनी आवाज के लिए। अपनी सोच के लिए। आप इसे इग्नोर नहीं कर सकते। मैं मीडिया के लोगों को रोज फोन नहीं कर सकती कि यह सोच रही हूं, मेरी यह फोटो आप अपने पब्लिकेशन में लगा दीजिए। फिर आज सब सोशल मीडिया में हैं। अगर मैं नहीं हूं तो इसका मतलब कि मामला थोड़ा असंतुलित है। अब मैं फेसबुक पर हूं तो मुझे पता चलता है कि लोग किस तरह की पिक्चर लाइक करते हैं और किस तरह की नहीं।
रिलेशनशिप के बारे में सोचने का वक्त नहीं
बार बार देखो सिंपल लव स्टोरी लग रही है, जिसमें टाइम ट्रेवलिंग दिख रहा है। आप किस तरह हैं इसमें?
यह सिंपल लव स्टोरी नहीं है। हाई कॉन्सेप्ट फिल्म है जिसमें इंपॉर्टेंट मैसेज है। टाइम ट्रेवलिंग इसमें साइंस फिक्शन जैसा जटिल नहीं है। जय (सिद्धार्थ मल्होत्रा) टाइम ट्रेवलिंग में आगे जाते हैं क्योंकि जिंदगी में कुछ सीखना है। जिंदगी, फैमेली, प्यार और काम के बारे में वह जो सोच रहे हैं, उसे बदलने के लिए सबक जरूरी है। यह जो सबक है मुझे लगता है, वह आज के युवाओं और नई पीढ़ी के लिए बहुत जरूरी है। आजकल हम सिर्फ काम या मस्ती के बारे में सोचते हैं। जिंदगी में या रिलेशनशिप में कोई प्रॉब्लम आ जाती है तो लोग भाग जाते हैं। हर चीज अब बहुत हल्की हो गई है। लोगों ने जिंदगी में रिश्तों की अहमियत खो दी है।
रिलेशनशिप में कमिटमेंट का फोबिया कई फिल्मों में हम पहले देख चुके हैं!
बिल्कुल। जय बहुत कमिटमेंट फोबिक है। वह अपनी गर्लफ्रेंड दीया को बेहद हल्के ढंग से लेता है। इतने सालों के बाद कई बार होता है कि आप सामने वाले को टेकन फॉर ग्रांटेड लेने लगते हैं।
नई पीढ़ी की फिल्मों में यह काफी दिखाया गया है। क्या आपको लगता है कि इस पीढ़ी में यह फोबिया है?
कमिटमेंट फोबिक तो नहीं लेकिन बहुत सारे लोगों को रिलेशनशिप में बंधने से शायद डर लगता है। बहुत सारे लोग सोचते हैं कि क्यों अभी कमिटमेंट करूं। आगे कुछ बेहतर मिलेगा! लोग संतुष्ट नहीं हैं। वे ज्यादा अच्छा पाने के लिए इंतजार करते रहते हैं। मुझे लगता है ये गलत है।
क्या इस पीढ़ी पर काम का दबाव ज्यादा है?
यह प्रेशर है लेकिन आजकल हर चीज इतनी तेज होती है कि बस। पूरी दुनिया भाग रही है। ऐसा सिर्फ रिलेशनशिप्स के बारे में नहीं है। हर चीज में हो रहा है। किसी के पास बैठने का, सोचने का टाइम नहीं है कि कर क्या रहे हैं जिंदगी में? प्यार में? रिलेशनशिप में?
अपनी जिंदगी में आप यह रफ्तार महसूस करती हैं?
बिल्कुल। कभी कभी मुझे ऐसा लगता है कि मैं इतनी फास्ट स्पीड में भाग रही हूं कि दिल में जो महसूस करती हूं उसके लिए मेरे पास समय नहीं है। ऐसा नहीं है कि मैं कुछ फील नहीं कर रही, परंतु उस फीलिंग को निभाने के लिए मेरे पास टाइम नहीं है। लेकिन कई बार यह रफ्तार अच्छी है क्योंकि कोई ऐसी बात जो अच्छी नहीं, उसकी तरफ से आपका ध्यान बंटा रहता है। ऐसा मगर थोड़े से ही समय के लिए होता है। इस सच्चाई से इंकार नहीं किया जा सकता कि एक समय जरूर ऐसा आएगा जब आप और आपकी फीलिंग्स आमने-सामने आएंगी। तब आपको उन्हें निभाना पड़ेगा।
हमारे पास किसी के लिए समय नहीं है, अपने इमोशंस के लिए भी नहीं, तो इससे क्या पता चलता है?
यही कि हमारी संवेदनाएं धीरे-धीरे कम हो रही हैं और यह अच्छी बात नहीं है। एक पर्सनल इक्वेशन, एक पर्सनल टच और एक-दूसरे को सुनना... इसके लिए वक्त होना चाहिए हमारे पास। एक-दूसरे से बात करना, एक-दूसरे के इमोशंस को समझना बहुत जरूरी है। मुझे लगता है कि आज किसी के पास टाइम नहीं है। मेरे पास भी तो टाइम नहीं है!
टाइम नहीं हैं तो हम जा कहां रहे हैं?
ये बहुत ही इंपॉर्टेंट सवाल है। मेरे पास इसका जवाब नहीं है। किसी के पास नहीं है। हम कहां जा रहे हैं इतनी जल्दी? सब लोग कहां भाग रहे हैं? इसका थोड़ा-सा जवाब हमारी मूवी में है। इसे थोड़ा-सा हम टच करते हैं। हम किस चीज के लिए दौड़ रहे हैं? जिंदगी का एक दिन तो अंत आ जाएगा और आप साथ क्या ले जाएंगे? एक बहुत अच्छी अंग्रेजी फिल्म आई थी, यू कांट टेक इट विद यू। जो भी आप करते हैं जिंदगी में, पैसा कमाएंगे या जो करेंगे मगर जब आप इस दुनिया से जाएंगे तब आपके साथ ये कुछ नहीं जाएगा। आप अकेले आए हैं। आप अकेले जाएंगे। आपने जिंदगी में दिल में जो कुछ महसूस किया, सिर्फ वही आपके साथ जाएगा।
क्या ये भाग-दौड़ नेम-फेम के लिए है?
यह हमेशा से है कि करिअर और सक्सेस के लिए लोग काम करते हैं। लेकिन यह डिजिटल युग कुछ अलग है। सब पल भर का है। पल भर के लिए है। अब देखिए कि लोग पार्टी में जाते हैं और वहां पहला काम क्या है, सेल्फी खींचते हैं!
आपने कहा था कि प्रियंका-दीपिका हॉलीवुड जा रही हैं तो अच्छा है। इससे मुझे ज्यादा काम मिलेगा। यह बात कितनी मजाक है और कितनी सीरियस?
फिफ्टी-फिफ्टी। मैं सीरियस हूं कि वे लोग वहां जाकर हमारी इंडस्ट्री का नाम आगे बढ़ा रही हैं और इस दौरान मुझे ज्यादा फिल्में मिलेंगी तो यह अच्छी बात है। हम सब खुश हैं।
जग्गा जासूस को लेकर कई चर्चाएं-अफवाहें हैं। फिल्म का वास्तविक स्टेटस क्या है?
यह अभी बन रही है। सितंबर-अक्तूबर में हम पूरी करेंगे। कुछ फिल्में ऐसे ही बनती हैं और हमारे पास उन्हें लेकर कोई जवाब नहीं होता। अनुराग बसु का काम करने का एक ढंग है और उसे लेकर आप सवाल नहीं उठा सकते।