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Karmma Calling Review: दर्शकों से डरिए, सितारों से नहीं, सितारे माफ कर देते हैं, दर्शक नहीं...

सार

वेब सीरीज ‘कर्मा कॉलिंग’ अगर आपको देखनी है तो इसे सिर्फ रवीना टंडन को निहारने के लिए देख सकते हैं। उनके कॉस्ट्यूम के लिए देख सकते और देख सकते हैं उनकी रूप सज्जा के लिए।
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कर्मा कॉलिंग रिव्यू - फोटो : अमर उजाला ब्यूरो, मुंबई
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Movie Review
कर्मा कॉलिंग
कलाकार
रवीना टंडन , नम्रता शेठ , विराफ पटेल , वरुण सूद , रचित सिंह , देवांग्शी सेन और गौरव शर्मा
लेखक
माइक केली , जोए फैजियो , रुचि नारायण और पूर्वा नरेश
निर्देशक
रुचि नारायण
निर्माता
आशुतोष शाह , ताहिर शब्बीर और रुचि नारायण
रिलीज:
26 जनवरी 2024
रेटिंग
2/5

विस्तार
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सोनी एंटरटेनमेंट और जी समूह का सौदा रद्द होने और जी समूह के डिज्नी से लिए गए क्रिकेट अधिकारों का करार भी रद्द होने की खबरों के बीच डिज्नी+ हॉटस्टार ओटीटी पर रिलीज हुई है वेब सीरीज ‘कर्मा कॉलिंग’ यानी कर्म की आवाज! गीता के श्लोक ‘कर्मण्येवाधिकारस्ते मा फलेषु कदाचन’ जैसा कर्म यहां नहीं है। यहां अंग्रेजियत में डूबा ‘कर्मा’ है और तो और सीरीज की अनूदित कहानी का एक देसी किरदार पुकारा भी इसी नाम से जाता है। हॉटस्टार की भारतीय शाखा चलाने वालों के पास देसी कहानियों का जिस तरह का अकाल है और जिस तरह से इसके कर्ताधर्ता अपने आसपास मंडराने वाली तितलियों को कंपनी का पराग चूस ले जाने के लिए हरदम तैयार से दिखते हैं, उसमें इसके भारतीय दर्शकों के हाथ कुछ नहीं आता। वेब सीरीज ‘कर्मा कॉलिंग’ एक पुरानी अमेरिकन सीरीज का हिंदी अनुकूलन है। इसे हिंदी में लिखने वालों को देसी मुहावरों का क, ख, ग भी नहीं पता है और ये ‘ऐन आई फॉर ऐन आई’ का देसी मुहावरा ‘जैसे को तैसा’ इस्तेमाल नहीं करते, वे इसका शब्दश: हिंदी रूपांतरण पेश करते हैं। बस, बाकी सब आप समझ ही सकते हैं। 

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कर्मा कॉलिंग रिव्यू - फोटो : अमर उजाला ब्यूरो, मुंबई
रवीना के रूप लावण्य पर टिकी सीरीज
वेब सीरीज ‘कर्मा कॉलिंग’ देखने का जो सबसे बड़ा आकर्षण हैं, वह हैं रवीना टंडन। अपने बसंतकाल में रैविशिंग रवीना के तौर पर मशहूर रहीं रवीना टंडन ने पिछली बार नेटफ्लिक्स की सीरीज ‘अरण्यक’ में अपना दमखम दिखाने की कोशिश की थी, वह कोशिश इस बार और बेहतर हुई है इस सीरीज में। आने वाली 26 अक्तूबर को वह 50 की हो जाएंगी लेकिन जिस तरह से वेब सीरीज ‘कर्मा कॉलिंग’ की निर्देशक रुचि नारायण ने उन्हें इस सीरीज में कैमरे के सामने पेश किया है, उनकी दो-तीन दशक पहले की सारी अदाएं फिर से यादों में ताजा हो जाती हैं। रवीना टंडन ने कमाल की फिल्में कीं, धमाल गानों पर डांस किया, लोग उनकी और गोविंदा की जोड़ी को अब तक भूले नहीं हैं। ‘शूल’ और ‘दमन’ जैसी फिल्मों में रवीना ने ये भी दिखाया कि निर्देशक सही मिले तो कलाकारी उनमें कूट कूटकर भरी है। वेब सीरीज ‘कर्मा कॉलिंग’ उनकी इस अदाकारी को दो कदम और आगे ले जाती है। रवीना का ये दुर्भाग्य ही रहा है कि उन्हें अपनी शख्सियत, काबिलियत और रूप लावण्य के अनुसार किरदार न तब मिले और न अब मिल रहे हैं।

कर्मा कॉलिंग रिव्यू - फोटो : अमर उजाला ब्यूरो, मुंबई
कर्मों से डरिए, ईश्वर से नहीं..
वेब सीरीज ‘कर्मा कॉलिंग’ अगर आपको देखनी है तो इसे सिर्फ रवीना टंडन को निहारने के लिए देख सकते हैं। उनके कॉस्ट्यूम के लिए देख सकते और देख सकते हैं उनकी रूप सज्जा के लिए। रवीना के लिए इस सीरीज में जितनी बेहतरीन कॉस्ट्यूम्स का चुनाव किया गया है, वह अपने आप में इस सीजन का फैशन ट्रेंड बन सकता है। उनकी अपनी और वेब सीरीज ‘कर्मा कॉलिंग’ की मुख्य किरदार इंद्राणी की कहानी का एक सिरा आपस में तीन दशक पीछे जाकर जुड़ता है क्योंकि दोनों उस दौर की मशहूर सिने कलाकार हैं। ये साम्यता स्थापित करने के बाद सीरीज को बनाने वालों ने रवीना की बीते जमाने की इमेज के सहारे अपनी ये अमेरिकन सीरीज की नकल हिंदी में खड़ी करने की कोशिश की है। कहानी अपनी मूल सीरीज ‘रिवेंज’ के नाम के हिसाब से बदले की है। मुंबई फिल्म जगत पर लंबे समय तक राज करने वाली इंद्राणी अब मुंबई के पास ही बसे अलीबाग के रईसों की दुनिया पर राज कर रही है। उसकी सहेली मिस्टर इंद्राणी के साथ गुल खिला रही है और तभी लौटते हैं इन सबके कर्म। सीरीज शुरू ही होती है इस वाक्य से, ‘कर्मों से डरिए, ईश्वर से नहीं। ईश्वर माफ कर देता है, कर्म नहीं...

कर्मा कॉलिंग रिव्यू - फोटो : अमर उजाला ब्यूरो, मुंबई
आरंभ में ही अंत का अंदाजा..
जैसे जैसे सीरीज की कहानी आगे बढ़ती है, इसके पूरे पन्ने खुल पाएं, उससे पहले ही दर्शक को कहानी के आरंभ, मध्य और अंत का अंदाजा हो जाता है। इंद्राणी को जिससे प्यार था, उसी पर एक बड़े कांड का इल्जाम थोपा गया। ये करने में जो परिवार तबाह हुआ, उसकी वारिस अब अलीबाग लौट आई है। इंद्राणी उसकी असलियत जानना चाहती है और उसका बेटा उसकी मोहब्बत। कहानी में कई सारे प्रेम त्रिकोण हैं। तकरीबन हर किरदार कहीं न कहीं से टूटा हुआ है। किसी दूसरे की हरकतों से घायल हुआ है। सबके मन में कोई न कोई ‘रिवेंज’ पल रहा है और सब आकर जिस मुहाने पर एक दूसरे से टकराते हैं, उस कहानी का नाम है, वेब सीरीज ‘कर्मा कॉलिंग’। कहानी के लिहाज से कुछ खास न पेश कर पाने के अलावा ये सीरीज अपने निर्देशन में भी मात खाती है। रुचि नारायण ने ‘गिल्टी’ में खूब वाहवाही पाने के बाद लारा दत्ता को वेब सीरीज ‘हंड्रेड’ में पेश किया और अब, रवीना टंडन! रुचि का निर्देशन बस ओरीजनल सीरीज की नकल करता दिखता है, उनका अपना इसमें कुछ नजर नहीं आता।   

Namrata Sheth Interview: रवीना टंडन से भिड़ने आ रही ये कातिल हसीना, नम्रता शेठ का वरुण सूद से ‘ईलू’ कनेक्शन

कर्मा कॉलिंग रिव्यू - फोटो : अमर उजाला ब्यूरो, मुंबई
दर्शकों से रिश्ता जोड़ने में विफल
हिंदी सिनेमा के डेविड धवन काल की हीरोइनों में दमखम खूब था, इसमें कोई दो राय नहीं। उस दौर में उन्हें अपनी क्षमताएं दिखाने का मौका नहीं मिला क्योंकि तब सब कुछ गोविंदा ही कर रहे थे। अब मौका है इन अभिनेत्रियों के पास। लेकिन, दिक्कत वही है कि कहानियां चुनने में मदद करने के लिए उनके पास अब भी सही सलाहकार नहीं हैं। वेब सीरीज ‘कर्मा कॉलिंग’ में रवीना टंडन के नाम पर ही सारा खेल सजाया गया है लेकिन उनके किरदार को ढंग से नहीं बनाया गया। इस सीरीज की सबसे बड़ी खामी है इसका प्लेग्राउंड। जिन रईसों की निजी जिंदगी में तांकझांक के हिसाब से ये सीरीज बनी है, उस वर्ग के लोग हिंदी वेब सीरीज देखते नहीं हैं। और, सास-बहू सीरीज सरीखा ऐसा ड्रामा देख देखकर हिंदी के दर्शक बोर हो चुके हैं। वे पुरातन भारत में आधुनिक इंडिया के संवेग वाली कहानियां तलाश रहे हैं। प्रशांत वर्मा की फिल्म ‘हनुमान’ की कामयाबी इन सबके लिए एक सबक है।
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कर्मा कॉलिंग रिव्यू - फोटो : अमर उजाला ब्यूरो, मुंबई
नम्रता शेठ से सबसे ज्यादा निराशा..
कथा, पटकथा, संवाद और निर्देशन में मात खाई सीरीज वेब सीरीज ‘कर्मा कॉलिंग’ की कास्टिंग भी बहुत कमाल नहीं है। वैम्प जैसे किरदार में नजर आने वाली नम्रता शेठ के पास अपने हुनर और अपने बदन को दिखाने का यहां पूरा मौका मिला, लेकिन उनके हुनर में चमक नहीं है और उनकी सुंदरता में ऐसी दमक भी नहीं कि देखने वाला उनको देखता ही चला जाए। क और ख में फर्क न समझ पाने वाली कोई कलाकार हिंदी मनोरंजन जगत में लंबी रेस तक टिके रहने के ख्वाब नहीं देख सकती। वरुण सूद का भी यही हाल है। विदेश से आते ही सीधे स्वीमिंग पूल में जाकर अपना शरीर सौष्ठव दिखाने को बेताब बेटे के किरदार में उनका आकर्षण बहुत कमजोर है। सीरीज में वरुण शर्मा, वलूशा डिसूजा, रचित सिंह जैसे सहायक कलाकारों ने जरूर अपनी तरफ से बढ़िया कोशिशें की हैं लेकिन जब ढांचा ही कमजोर है तो सजावट कितनी भी की जाए, आधार दरक ही जाता है। सीरीज तकनीकी तौर पर जरूर अच्छी है। सिनेमैटोग्राफी देखने लायक है। बैकग्राउंड म्यूजिक भी कहीं कहीं असर दिखाता है।
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