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‘कांतारा’ मिमिक्री विवाद में रणवीर सिंह ने कोर्ट से बिना शर्त मांगी माफी, चार सप्ताह में मंदिर जाएंगे एक्टर

Sat, 25 Apr 2026 04:31 PM IST
Aradhya Tripathi एंटरटेनमेंट डेस्क, अमर उजाला

सार

Ranveer Singh Kantara Mimicry Row: ‘कांतारा चैप्टर 1’ मिमिक्री विवाद में अब रणवीर सिंह ने बिना शर्त माफी मांगी है। जानिए मामले में अदालत ने क्या कुछ कहा…
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कांतारा मिमिक्री विवाद में रणवीर सिंह ने मांगी माफी - फोटो : सोशल मीडिया
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विस्तार
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‘कांतारा: चैप्टर 1’ मिमिक्री विवाद से जुड़े मामले में अभिनेता रणवीर सिंह ने आज कोर्ट में माफी मांगी। रणवीर ने कर्नाटक हाईकोर्ट में संशोधित हलफनामा दाखिल कर बिना शर्त माफी मांगी। अदालत ने इस हलफनामे को रिकॉर्ड पर लेते हुए संकेत दिया कि मामले का निपटारा किया जाएगा।

जस्टिस एम. नागप्रसन्ना की बेंच ने की सुनवाई

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जस्टिस एम. नागप्रसन्ना की अदालत ने रणवीर सिंह की उस याचिका पर सुनवाई की, जिसमें उनके खिलाफ दर्ज एफआईआर रद्द करने की मांग की गई। यह एफआईआर पिछले साल आयोजित कार्यक्रम में रणवीर द्वारा फिल्म के एक पात्र की मिमिक्री करने और एक मंदिर की देवी के संबंध में कथित आपत्तिजनक टिप्पणी के बाद दर्ज हुई थी। रणवीर सिंह की ओर से एडवोकेट सज्जन पूवैय्या ने अदालत को बताया कि अभिनेता ने बिना शर्त माफी वाला नया हलफनामा दाखिल किया। उन्होंने यह भी कहा कि अभिनेता ने मंदिर जाकर श्रद्धा प्रकट करने का भी आश्वासन दिया।

रणवीर सिंह - फोटो : सोशल मीडिया

मामला कानूनी नहीं आस्था से जुड़ा है
शिकायतकर्ता की ओर से अदालत को बताया गया कि यह मामला केवल कानूनी विवाद नहीं, बल्कि धार्मिक आस्था से जुड़ा है। इस पर अदालत ने कहा कि इसी कारण अब तक एफआईआर पर रोक नहीं लगाई गई।

अदालत ने मौखिक रूप से कहा कि आदेश में यह दर्ज किया जाएगा कि अभिनेता चार सप्ताह के भीतर मंदिर जाएंगे। साथ ही अदालत ने यह भी संकेत दिया कि वह इस मामले में एक्टर को चेतावनी भी देगी। अदालत ने कहा कि हम फटकार अवश्य लगाएंगे।

 

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रणवीर सिंह - फोटो : इंस्टाग्राम
हम धार्मिक भावनाओं का सम्मान करते हैं
वहीं रणवीर सिंह की ओर से कहा गया कि वह धार्मिक भावनाओं का सम्मान करते हैं। इसी कारण मामले के गुण-दोष पर बहस नहीं की जा रही है। मामले के अंत में अदालत ने कहा कि वह हलफनामे को रिकॉर्ड पर लेते हुए याचिका का निपटारा करेगी।

इससे पहले भी हाईकोर्ट ने टिप्पणी की थी कि केवल प्रसिद्ध व्यक्ति होने के कारण कोई किसी समुदाय की धार्मिक भावनाओं को ठेस नहीं पहुंचा सकता और सार्वजनिक मंचों पर बोलते समय सावधानी बरतनी चाहिए।

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