रितिक रोशन से हुए निजी किस्म के विवादों ने कंगना का 29वां जन्मदिन फीका कर दिया है। पर उनके सिक्रेट को सबको जान लेना चाहिए। कंगना रनौत को एकांत पसंद है। आप उन्हें भीड़ में भी खाई-खोई सी पाएंगे। लेकिन ‘रिवॉल्वर रानी’ में वह जैसे शेरनी की तरह नजर आई हैं, उसने उनके चाहने वालों को चौंकाया है। ‘क्वीन’ के बाद यह फिल्म भी साबित करती है कि बतौर ऐक्टर उनका कोई मुकाबला नहीं। इस कामयाबी ने कंगना को नहीं बदला है।
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उन्होंने सफलता की कोई पार्टी अभी तक नहीं दी है। वह कहती हैं, ‘मैं अपने आप में रहना पसंद करती हूं। मेरे लिए लोगों से घुलना-मिलना बहुत मुश्किल है। कई बार तो स्थिति यह आती है कि कोई समस्या आने पर मैं बिल्कुल ही एकांत में चली जाती हूं। भविष्य में भी शायद यह न बदले।’
सफल होने में लगे 8 साल
क्या कंगना को सफलता उनकी किस्मत से मिली है? बिल्कुल नहीं। वह किस्मत को नहीं मानतीं। कंगना के अनुसार, ‘सफल होने के लिए मुझे पूरे आठ साल लग गए। अगर किस्मत साथ होती तो क्या मेरी हर फिल्म हिट नहीं होती। मैं पहली फिल्म से ही कामयाब कहलाती।’ तो सफलता कैसे मिली? वह कहती हैं, ‘मैं अपने किरदार में गहरे उतर जाती हूं।
‘क्वीन’ और ‘रिवॉल्वर रानी’ में भी मैंने यह किया। यह सिर्फ इसलिए संभव हो सका कि उम्र के साथ मेरे अनुभव बढ़े। मैं किरदारों को ज्यादा ढंग से समझने और जीने लगी।’ अनुभव से सीखने वाली कंगना मानती हैं कि अगर ऐसे किरदार उन्हें कैरियर के शुरू में मिले होते तो वह उन्हें निभाने में बुरी तरह से नाकाम होतीं। साफ है कि वक्त के साथ कंगना ज्यादा समझदार हुई हैं।
राजनीति से नहीं है कोई सीधा संबंध
‘रिवॉल्वर रानी’ का संबंध राजनीति से भी है। क्या कंगना का कोई सीधा कनेक्शन राजनीति से है? राजनेता का किरदार निभाने में उन्हें कोई मुश्किल आई? कंगना बताती हैं, ‘यूं तो फिल्म एक लव स्टोरी है और यहां हीरोइन दिमाग से बहुत खतरनाक और कातिल है। जहां तक राजनीति की बात है तो हम सब जानते हैं कि नेता आत्म मुग्ध होते हैं।
वे दर्जनों घोटालों और उल्टी-सीधी बातों में फंसे होते हैं। आजादी के बाद से आज तक न जाने कितनी बार इन राजनेताओं ने लोगों भरोसा तोड़ा है। वे सिर्फ सत्ता के भूखे हैं। ‘रिवॉल्वर रानी’ में यह बात खूब अच्छे से दिखाई गई है। वैसे चुनाव के इस दौर में मेरी इस फिल्म का रिलीज होना सिर्फ संयोग है।’
कोई दोस्त नहीं है कंगना का
कंगना को बॉलीवुड में एक दशक होने जा रहा है, लेकिन यह शायद उनका स्वभाव ही है कि उनका यहां कोई दोस्त नहीं है। वह कहती हैं, ‘यह सही है कि यहां ऐसा कोई नहीं है जिसके साथ मैं बाहर जा सकती हूं। लेकिन यह सच है कि अमिताभ बच्चन और आमिर खान ने ‘क्वीन’ देखने के बाद मुझे पत्र लिख कर बधाई संदेश भेजे थे।
यह ठीक वैसा है जैसे एक रचनात्मक व्यक्ति दूसरे रचनात्मक व्यक्ति के काम को देखता है और उसे पसंद करता है। मुझे बहुत खुशी हुई थी। इतने बड़े कलाकारों के द्वारा भेजे गए संदेश मेरे लिए बड़ा सम्मान हैं। लेकिन तब भी मैं यह नहीं कह सकती कि हम दोस्त हैं क्योंकि हम जब भी मिले हैं तो औपचारिक बातों के अलावा कोई बात नहीं हुई है।’
खान तिकड़ी से दूर हैं कंगना
बॉलीवुड की ज्यादातर कामयाब हीरोइनों के पीछे ‘खान’ ऐक्टरों का हाथ है। जबकि कंगना के साथ ऐसा बिल्कुल नहीं है। अतः यह बात भी अब चल पड़ी है कि क्या भविष्य में कंगना किसी खान (आमिर, सलमान या शाहरुख), कामयाब कुमार या रोशन के साथ काम करेंगी?
उनसे बार बार यह सवाल किया जा रहा है। कंगना कहती हैं, ‘देखिए, मुझे लीड रोल करना पसंद हैं। जिन फिल्मों में मुझे आगे रखा जाता है उनमें काम करना मुझे अच्छा लगता है। मैंने ‘कृष-3’ कर ली, अब और क्या करूंगी?
मैं अपने बनाए नियमों पर चलती हूं और हर प्रस्ताव पर विचार करती हूं। मुझे किसी बात से कोई इंकार नहीं है।’ इन दिनों कंगना के पास छोटे-बड़े हर तरह के बैनर फिल्मों के ढेर सारे प्रस्ताव ला रहे हैं, लेकिन वह आंख मूंद कर फिल्में चुनने के मूड में नहीं हैं। वह बताती हैं, ‘हाल ही मैंने 25 फिल्मों में काम करने से इंकार किया है।’
उनका इरादा साफ है। फिल्म में उनका लीड रोल हो और हीरोइन प्रधान विषय हो। वह मुस्करा कर कहती हैं, ‘अब सोचिए कि अगर जो मेरे पास इस तरह के प्रस्ताव आए होते तो मैंने उन्हें क्यों ना कहा होता।’ वाकई अब सोचने की बारी निर्माता-निर्देशकों की है।