फ्री ई-पेपर
पर्सनलाइज़्ड फ़ीड
पर्सनलाइज़्ड नोटिफ़िकेशन
चलते-फिरते ख़बरें
लॉयल्टी रिवॉर्ड्स
विज्ञापन

सिनेमेटोग्राफ एक्ट 2021: 'हम तीन बंदरों की तरह नहीं', नए कानून के खिलाफ कमल हासन ने उठाई आवाज

Tue, 29 Jun 2021 05:05 PM IST
शुभांगी गुप्ता एंटरटेनमेंट डेस्क, अमर उजाला

सार

  • एक्टर और पॉलिटीशियन कमल हासन (Kamal Haasan) ने केंद्र सरकार द्वारा प्रस्तावित सिनेमेटोग्राफ एक्ट 2021 के खिलाफ आवाज उठाई है।
  • कमल हासन ने ट्वीट करते हुए लिखा,'हम तीन आइकॉनिक बंदरों की तरह नहीं बने रह सकते।' हमें इसके बारे में सोचना चाहिए।
विज्ञापन
कमल हासन - फोटो : सोशल मीडिया
विज्ञापन

विस्तार
वॉट्सऐप चैनल फॉलो करें

केंद्र सरकार के प्रस्तावित सिनेमेटोग्राफ एक्ट 2021 के खिलाफ अभिनेता से राजनेता बने कमल हासन ने प्रतिक्रिया दी है। उन्होंने ट्वीट के जरिए लोगों से अपनी आजादी को लेकर चिंता जाहिर की है। कमल हासन के अलावा कई लोगों ने इस एक्ट की आलोचना की है।

विज्ञापन


क्या है पूरा मामला?
सरकार ने नए प्रावधान को शामिल करने को लेकर एक आदेश जारी किया था। जिसके अंतर्गत केंद्र सरकार को यह शक्ति दी गई है कि वह 'केंद्रीय फिल्म प्रमाणन बोर्ड' (CBFC) के फैसले को बदल सकती है। सिनेमेटोग्राफ एक्ट 1952 में प्रस्तावित संशोधन में केंद्र को यह अधिकार दिया गया है कि वह केंद्रीय फिल्म प्रमाणन बोर्ड (CBFC) की तरफ से मंजूरी दिए जाने के बाद भी 'दोबारा जांच' कर सकती है। इस अधिनियम के अंतर्गत केंद्र फिल्म प्रमाणन बोर्ड के फैसले में बदलाव कर सकता है और उन फिल्मों की फिर से जांच करने की आदेश देता है जिन्हें रिलीज के लिए मंजूरी दे दी गई है। इस फैसले ने फिल्म निर्माताओं को परेशान कर दिया है। जिसकी वजह से फिल्म इंडस्ट्री के लोग इस कानून के खिलाफ आवाज उठा रहे हैं।

देखें कमल हासन के ट्वीट्स - 

कमल हासन - फोटो : सोशल मीडिया
कमल हासन ने ट्वीट करते हुए लिखा, 'सिनेमा, मीडिया और साहित्य से जुड़े लोग भारत के तीन आइकॉनिक बंदर की तरह व्यवहार नहीं कर सकते हैं। बुराई को देखना, सुनना और बोलना लोकतंत्र को चोट पहुंचाने और कमजोर करने का प्रयास है।' 
 
विज्ञापन

कमल हासन - फोटो : सोशल मीडिया
एक दूसरे ट्वीट कमल हासन लिखते हैं,'कृपया अपनी आजादी के बारे में सोचें और कुछ करें।' केंद्र सरकार ने पिछले हफ्ते एक मसौदा विधेयक जारी किया था और जनता की राय मांगी थी। इस मसौदे में यह भी कहा गया है कि आने वाले 2 जुलाई, 2021 तक यह फैसला स्वीकार कर लिया जाएगा। फिल्म निर्माताओं, शिक्षकों और छात्रों के एक समूह ने इस एक्ट में संशोधन का विरोध किया है। आलोचकों का कहना है कि प्रस्तावित बदलावों से सिनेमा को रद्द या निरस्त करने की ताकत मिल जाएगी और यह भारत की अभिव्यक्ति की आजादी के खिलाफ है।
 
और पढ़ें...
विज्ञापन
Next
AU ऐप में पढ़ें