कमल हासन ने ट्वीट करते हुए लिखा, 'सिनेमा, मीडिया और साहित्य से जुड़े लोग भारत के तीन आइकॉनिक बंदर की तरह व्यवहार नहीं कर सकते हैं। बुराई को देखना, सुनना और बोलना लोकतंत्र को चोट पहुंचाने और कमजोर करने का प्रयास है।'
एक दूसरे ट्वीट कमल हासन लिखते हैं,'कृपया अपनी आजादी के बारे में सोचें और कुछ करें।' केंद्र सरकार ने पिछले हफ्ते एक मसौदा विधेयक जारी किया था और जनता की राय मांगी थी। इस मसौदे में यह भी कहा गया है कि आने वाले 2 जुलाई, 2021 तक यह फैसला स्वीकार कर लिया जाएगा। फिल्म निर्माताओं, शिक्षकों और छात्रों के एक समूह ने इस एक्ट में संशोधन का विरोध किया है। आलोचकों का कहना है कि प्रस्तावित बदलावों से सिनेमा को रद्द या निरस्त करने की ताकत मिल जाएगी और यह भारत की अभिव्यक्ति की आजादी के खिलाफ है।