फिल्म अभिनेत्री कल्कि कोचलीन का कहना है कि उनके लिए खुद को चुनौती देना सबसे अहम है और यही वजह है कि वह सीधे-सादे रोल में नजर नहीं आतीं।
उनका कहना है कि वह हर रोल में कुछ वास्तविकता, विश्वसनीयता ढूंढती हैं। वह कहती हैं कि अगर किसी किरदार में उनका विश्वास नहीं तो दर्शक कहां से यकीन करेंगे। पेश है उनसे बातचीत के कुछ प्रमुख अंशः
सवालः ज्यादातर फिल्मों में आपका रोल एक उलझी हुई, पहचान तलाशती लड़की का होता है। क्या निर्देशक ऐसे ही रोल आपके लिए लाते हैं या ये आपका चुनाव होता है?
दोनों ही बातें हैं। मैं फिल्मों में वास्तविक किरदार निभाना चाहती हूं। सीधे-सादे रोल मैं नहीं चुनती हूं। लोग मेरे ऊपर डार्क रोल्स का ठप्पा भी लगाते हैं लेकिन मैं हर तरह का रोल करना चाहती हूं, जैसे मैंने 'ये जवानी है दीवानी' में किया था।
सवालः मसाला फिल्मों और हकीकत के नजदीक फिल्में करने में आपको किसमें ज्यादा अच्छा लगता है?
मेरे लिए सबसे अहम है खुद को चुनौती देना या अपने डर से उबरना। व्यावसायिक फिल्मों में काम करना भी मेरे लिए एक चुनौती है, जैसे कि मैं डांस नहीं कर सकती क्योंकि मैं एक बुरी डांसर हूं। इसी तरह कॉमेडी करना भी बहुत मुश्किल है।
सवालः किसी फिल्म के किरदार को निभाने के लिए आप क्या तैयारी करती हैं?
यह निर्भर करता है कि रोल कैसा है, जैसे मेरी आने वाली फ़िल्म 'मार्गरीटा विद अ स्ट्रॉ' में मैं पूरी शूटिंग के दौरान व्हील चेयर से उठी ही नहीं।
मनोवैज्ञानिक रूप से इसने मुझे किरदार निभाने में बहुत मदद की क्योंकि फिल्म में मैं सेरेब्रल पैल्सी से पीड़ित हूँ। मेरे दोस्तों ने बताया कि असल ज़िंदगी में मेरे हाव-भाव वैसे ही होने लगे थे जैसे व्हील चेयर पर बैठी उस लड़की के रहे होंगे। लेकिन ज्यादातर वक्त मैं इतना नहीं सोचती और उस किरदार से बाहर निकल आती हूं।