'जंगल जंगल बात चली है पता चला है, चढ्ढी पहन के फूल खिला है फूल खिला है'! आज के वक्त में शायद ही कोई ऐसा व्यक्ति हो जिसने अपने बचपन में या अपने बच्चों को सुनाने के लिए ये गाना न सुना हो।
जानवरों के बीच पले बढ़े एक बच्चे मोगली की कहानी सुनाता ये गाना जितना प्यारा है उतनी ही प्यारी इसके गायक की आवाज है। लेकिन क्या आप जानते हैं कि अब ये नन्हा गायक कितना बड़ा हो चुका है? इतना कि अब उसका खुद का एक बच्चा है और वो उसे भी ये गाना सुनाता है।
8 अप्रैल को 'द जंगल बुक' फिल्म हिंदी में दर्शकों के सामने होगी इसलिए ये गाना सबकी जुबान पर चढ़ गया है। 23 साल पहले इस गाने को आवाज देने वाले गायक अमोल सहदेव से अमर उजाला ने बातचीत की तो कई बातें पता चलीं।
दिल्ली में रह रहे अमोल 33 साल के हो चुके हैं और कॉर्पोरेट जगत में काम करते हैं। इतने सालों बाद फिर से लाइमलाइट में आने के सवाल पर अमोल बताते हैं कि उस वक्त उन्हें अंदाजा भी नहीं था कि हो क्या रहा है। वो कहते हैं कि आज टीवी, सोशल मीडिया, वेबसाइटों के जरिए जितनी लोकप्रियता मिलती है, उतनी उस जमाने में नहीं थी इसलिए आज वे बहुत खुश हैं।
अमोल ने बताया कि गुलजार का लिखा और विशाल भारद्वाज का बनाया हुआ ये गाना उन्हें कैसे मिला। चूंकि अमोल के पिता जी और विशाल भारद्वाज एक दूसरे से परिचित थे तो उनके पिता एक दिन उन्हें स्टूडियो ले गए और गाने की रिकॉर्डिंग हुई।
उस वक्त तो अमोल ये भी नहीं जानते थे कि आज वो जो गाना गा रहे हैं, वो इतने सालों तक जबरदस्त हिट रहेगा। तो क्या आज भी उन्हें हर जगह यही गाना गाना पड़ता है? जानिए अमोल ने क्या जवाब दिया।
अमोल बताते हैं कि वे वीकेंड पर दिल्ली में लाइव शो करते हैं, म्यूजिकल थिएटर के सदस्य हैं और कई रिकॉर्डिंग भी कर चुके हैं। फिर भी उन्हें इन सब से उतनी पहचान नहीं मिली जितनी 'जंगल जंगल पता चला है' से मिली है।
वो कहते हैं कि आज भी शो खत्म होने के बाद उन्हें ये गाना गाने की डिमांड आती है और वे शौक से गाते हैं। ये उनकी जिंदगी का अहम हिस्सा बन गया है। इतनी कम उम्र में इतनी चर्चा पा लेने के बाद भी अमोल कहते हैं कि आज तक उन्होंने आम आदमी की जिंदगी ही जी है।
ज्यादातर देखा जाता है कि कम उम्र में बच्चे कोई मुकाम हासिल कर लें तो आगे उसी में ही करियर बनाते हैं। लेकिन अमोल के साथ ऐसा नहीं हुआ। किसी भी आम भारतीय परिवार की तरह उनके घर में भी उनकी गायकी पढ़ाई के आगे कमतर रह गई।
अमोल से पूछा गया कि गायकी में इतने अव्वल होने के बावजूद उन्होंने आगे चल कर कॉर्पोरेट जिंदगी क्यों चुनी तो अमोल ने बताया कि घर में पढ़ाई को ही ज्यादा अहमियत दी गई। शौक के तौर पर उन्होंने इसे जारी रखा लेकिन करियर के लिए नहीं चुन सके।
अमोल ने माना कि अगर ये फिल्म फिर से रिलीज न हो रही होती और ये गाना फिर से सबके कानों में गूंजता तो आज वो इतने चर्चित न हो पाते। हो भी क्यों न, आखिरकार अब अमोल के फेसबुक पर फ्रेंड रिक्वेस्ट की बाढ़ आई रहती है। हजारों नए ईमेल पड़े रहते हैं, हर कोई उन्हें जानना चाहता है।
जिंदगी इस तरह बदल जाने के बाद आगे के क्या प्लान हैं, अमोल ने बताया।
अमोल कहते हैं कि अब वे किसी सिलेब्रिटी से कम महसूस नहीं करते। अमोल इसी रविावर खुद का यूट्यूब चैनल शुरू करने वाले 'अमोलसहदेव' के नाम से। जिस पर वे अपने गानों की रिकॉर्डिंग, लाइव शो के वीडियो डालते रहेंगे। अमोल को उम्मीद है कि जितने नए लोग फेसबुक पर जुड़ रहे हैं वो इस चैनल को भी सस्क्राइब करेंगे।
अमोल से पूछा गया कि अब वे फिल्मों में गाने की क्यों नहीं सोचते तो अमोल ने अपनी इच्छा जाहिर की। उन्होंने बताया कि इस यूट्यूब चैनल के जरिए वे ज्यादा से ज्यादा संगीत निर्माताओं तक पहुंचना चाहते हैं और फिल्मों में गाना चाहते हैं। उन्होंने बताया कि शायद कुछ वक्त बाद वे गायकी को ही पूरी तरह अपना करियर बना लें।