इसके बाद से ही जूही लगातार मोबाइल टावर से होने वाली रेडिएशन को लेकर लोगों का जागरुक कर रही हैं। इसके अलावा जूही सिटिजन फॉर टुमौरो नाम का संगठन भी चलाती हैं। साल 2013 में जूही चावला ने मोबाइल रेडिएशन से होने वाले नुकसान के बारे में एक इंटरव्यू के दौरान कहा था, “हम टेलीकॉम कंपनियों के खिलाफ नहीं हैं। हम बस यह कहना चाहते हैं कि यदि टेलीकॉम कंपनियां मार्केंटिंग पर इतने पैसे खर्च कर रही हैं तो उन्हें इसे सुरक्षित बनाने पर भी खर्च करना चाहिए।”
साल 2018 में जूही ने सुप्रीम कोर्ट में याचिका दायर की थी कि मोबाइल टावर/एंटीना से निकलने वाले EMF रेडिएशन से थकान, मेमोरी लॉस समेत कई तरह की स्वास्थ्य संबंधी परेशानियां हो सकती हैं। इससे बचने के लिए आवश्यक कदम उठाए जाने चाहिए। साथ ही जूही का कहना था कि लोगों पर इसके प्रतिकूल प्रभावों के शोध के बिना इसे लागू नहीं किया जाना चाहिए।
हाल ही में जूही द्वारा दायर की गई याचिका में भी उन्होंने यही मांग की है कि 5G वायरलेस नेटवर्क को देश में लागू किए जाने से पहले इससे जुड़ी तमाम रिसर्च पर ध्यान दिया जाए। उनका कहना है कि इससे नागरिकों, जानवरों और पेड़-पौधों पर विकिरण के बुरे प्रभाव देखने को मिलेंगे जो कि सही नहीं है। 5G टेस्टिंग पर रोक लगानी चाहिए।