जावेद अख्तर ने ट्विटर पर लिखा, 'गुजरात हाई कोर्ट के एक न्यायाधीश ने 17 साल से कम उम्र की बलात्कार पीड़िता को ज्ञान दिया है कि मनुस्मृति के अनुसार यह सही है कि एक लड़की 17 साल की उम्र में मां बन जाए। मुझे आश्चर्य है कि क्या राष्ट्रीय महिला आयोग को इसके बारे में कुछ कहना नहीं है।'
जावेद अख्तर के ट्वीट पर आम लोग भी अपना पक्ष रख रहे हैं। काफी लोग उनके इस ट्वीट पर प्रतिक्रिया दे चुके हैं। इस मामले में जज ने राजकोट के सिविल अस्पताल से डॉक्टर्स की भी राय मांगी है कि क्या नाबालिग और बच्चे के स्वास्थ्य को ध्यान में रखते हुए पीड़िता के सात महीने के बच्चे के साथ गर्भपात करना उचित है। कोर्ट ने अगली सुनवाई 15 जून मुकर्रर की है।
यह है मामला
मीडिया रिपोर्ट्स के अनुसार, नाबालिग लड़की की उम्र महज 16 साल 11 महीने हैं। उसके साथ दुष्कर्म हुआ था। जिस वजह से वह गर्भवती हो गई। फिलहाल वह सात महीने की गर्भवती है। उसके पिता का कहना है कि उसे ये बात सात महीने बात पता चली है। इसके बाद उन्होंने गुजरात हाईकोर्ट में गर्भ को गिराने की मांग की है। साथ ही इस पर जल्दी सुनवाई के लिए भी कहा क्योंकि नाबालिग की डिलीवरी संभावित तारीख 18 अगस्त है।
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