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शाम से आँख में नमी सी है, आज फिर आपकी कमी सी है...

Fri, 08 Feb 2013 03:43 PM IST
चंदन जायसवाल
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शाम से आँख में नमी सी है, आज फिर आपकी कमी सी है...जिन्होंने जगजीत सिंह को दीवानों की तरह प्यार किया है उन्होंने यह गजल जरूर सुनी होगी। जिस खूबसूरती से इस गजल का आगाज अपनी मखमली आवाज और अंदाज में जगजीत ने किया था, वो आज भी जेहन में गूंजता रहता है।
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होठों से छू लो तुम..., तुम को देखा..., जैसे यादगार गजलों को गाकर प्रशंसकों के दिलों पर राज करने वाले जगजीत सिंह का आज 72वां जन्म दिन है। अपने विशिष्ठ गजल गायकी के अंदाज से असंख्य प्रशंसकों के दिलों पर राज करने वाले जगजीत सिंह आज भले दुनिया में न हो पर उनके गाए यादगार नगमें आज भी उनकी मौजूदगी का एहसास कराती हैं।

उनकी गजलों में इंसान की भावनाओं का जो ताना-बाना मिलता है उसे सुनकर आज भी सुकून सा महसूस होता है। शायद यही कारण है कि आज न केवल आमलोग बल्कि गूगल भी उनका जन्मदिन मना रहा है। दुनिया के सबसे बड़े सर्च इंजन 'गूगल' ने अपनी तरफ से आदरांजलि देते हुए उनकी तस्वीर लगाई है। गूगल के सर्च पेज पर किसी शख्सियत की तस्वीर आना ही अपने आप में एक बड़ा सम्मान है और वाकई अपनी मखमली आवाज के जादू से हर उम्र के लोगों के दिलों तक पहुंच गए जगजीत सिंह इसके हकदार हैं।
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वहीं प्रशंसकों के चहेते जगजीत इंटरनेट पर खोजे गये गजल गायकों की सूची में शीर्ष पर हैं। ‘गूगल सर्च ट्रेंड्र्स’ के अनुसार जगजीत सिंह इस श्रेणी के लोकप्रिय गायकों की सूची में शीर्ष पर रहे हैं। भारत में लुधियाना, भोपाल और इंदौर में जगजीत को लेकर सवालों को सबसे ज्यादा खोजा गया।

गजल सम्राट जगजीत सिंह का जन्म 8 फरवरी 1941 को राजस्थान के श्रीगंगानगर में हुआ था। उनके पिता का नाम अमर सिंह धिमान और मां का नाम बचन कौर था जो पंजाब के ढल्ला गांव के निवासी थे। जगजीत सिंह की पत्नी चित्रा सिंह की विख्यात गजल गायिका हैं। जगजीत जी ने कुरुक्षेत्र युनिवर्सिटी से इतिहास में एमए की पढ़ाई पूरी की।

साइनिया घराने से ताल्लुक रखने वाले जगजीत सिंह ने उस्ताद जमाल खान से खयाल, ठुमरी, ध्रुपद जैसी गायन विधाओं में महारत हासिल की। पंजाबी, हिन्दी, उर्दू, बंगाली, गुजराती, सिंधी और नेपाली भाषाओं में गजल गाने वाले जगजीत सिंह को 2003 में भारत के तीसरे सर्वोच्च नागरिक सम्मान पद्म भूषण से अलंकृत किया गया।

भारत के मौजूदा प्रधानमंत्री मनमोहन सिंह व उनकी पत्नी गुरशरण कौर जगजीत सिंह के बहुत बड़े प्रशंसक हैं। जगजीत सिंह ने पूर्व प्रधानमंत्री अटल बिहारी वाजपेयी के लिखे गीतों को आवाज दी। अटल बिहारी वाजपेयी के गीतों की दो अलबम 'नई दिशा' 1999 में और 'संवेदना' 2002 में निकाली जिसमें जगजीत सिंह ने अपनी आवाज के साथ-साथ संगीत भी दिया था।

'प्रेम गीत', 'अर्थ' जैसी फिल्मों और 'मिर्जा गालिब' व 'कहकशां' जैसे टीवी धारावाहिकों से उनकी आवाज जन-जन तक पहुंची। स्वतंत्रता की पहली लड़ाई की 150वीं जयंती पर 10 मई 2007 को उन्होंने संसद के सेंट्रल हॉल में दोनों सदनों की संयुक्त बैठक में अंतिम मुगल शासक बहादुर शाह जफर की गजल 'लगता नहीं है दिल मेरा' गायी।

1987 में बियोंड टाइम अलबम के साथ भारतीय संगीत के इतिहास में डिजिटल मल्टी ट्रैक रिकॉर्डिंग करने वाले वे पहले कंपोजर बने।

10 अक्टूबर, 2011 की वह मनहूस तारीख ही थी जिसने हम सबसे जगजीत को छीन लिया। ब्रेन हेमरेज के कारण उन्हें अस्पताल में भर्ती कराया गया था लेकिन लाख कोशिशों के बावजूद उन्हें बचाया नहीं जा सका। जगजीत सिंह भले ही सशरीर हमारे बीच नहीं हैं लेकिन उनकी आवाज का जादू आज भी हमारे कानों ही नहीं दिमाग में बसा हुआ है।

लोकप्रिय गीत
होंठों से छू लो तुम…(प्रेमगीत), झुकी झुकी सी नजर..(फिल्म अर्थ) तुमको देखा तो…(साथ-साथ), तुम इतना जो मुस्करा रहे हो…(अर्थ), फिर आज मुझे तुमको…(आज), हमसफर बनके हम…(आशियां), चिट्ठी न कोई संदेश…(दुश्मन), होशवालों को खबर क्या…(सरफरोश)।

यादगार गजलें
सरकती जाए है रुख से नकाब.., ये दौलत भी ले लो.., किया है प्यार जिसे.., मेरी जिंदगी किसी और की.., कोई चौदहवीं रात का चांद बनकर.., चराग आफताब गुम.., झूम के जब रिंदों ने पिला दी.., पहले तो अपने दिल की रजा जान जाइए.., मैं नशे में हूं.., अपने होंठों पर सजाना चाहता हूं.., जब किसी से कोई गिला रखना.., सच्ची बात कही थी मैंने.., कोई पास आया सवेरे-सवेरे…।

लोकप्रिय एलबम
इकोज, द अनफॉरगेटबल्स, माइलस्टोन, कम अलाइव, द लेटेस्ट, बियॉन्ड टाइम, साउंड अफेयर, कहकशां, मिर्जा गालिब (सभी चित्रा सिंह के साथ) फेस टू फेस, लाइव विद जगजीत सिंह, मरासिम, मिराज, इनसाइट, क्राई फॉर क्राई, मां, सांवरा, हे राम।
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