आप कैसे कोशिश करती हैं कि त्योहार ट्रेडिशनल भी रहे और इको-फ्रेंडली भी?
मेरे लिए सबसे जरूरी है कि गणपति बप्पा की मूर्ति इको-फ्रेंडली हो। ऐसी मिट्टी की हो जो आसानी से घुल जाए और पर्यावरण को नुकसान न पहुंचे। ये मेरी पर्सनल जिम्मेदारी है। परंपरा की बात करें तो, जिस तरीके से आरती होनी चाहिए, जैसा खाना बनना चाहिए, वो सब हम उसी पारंपरिक तरीके से करते हैं। इस तरह परंपरा भी निभती है और नेचर की रक्षा भी होती है।
गणपति बप्पा का स्वागत करती हुईं ईशा कोप्पिकर और उनकी बेटी रियाना
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आपकी बेटी रियाना इस फेस्टिवल में क्या रोल निभाती है। क्या उसे सजावट और आरती में मजा आता है?
रियाना को सजावट करने और आरती गाने में बहुत मजा आता है। वो हमेशा इसमें शामिल रहती है। मुझे देखकर उसने भी गणपति बप्पा से गहरा जुड़ाव महसूस किया है। सिर्फ त्योहार के दौरान ही नहीं बल्कि उससे पहले और बाद में भी उसका रिश्ता बप्पा से बहुत गहरा है। गणपति बप्पा के आगमन से लेकर विसर्जन तक हर पल में में पूरी तरह से शामिल रहती है।
अगर बप्पा का एक आशीर्वाद, प्रार्थना या सलाह चुननी हो जो आपकी जिंदगी को गाइड करती है, तो वो कौन-सी होगी?
मैं हमेशा बप्पा से यही प्रार्थना करती हूं कि मेरी बुद्धि सही रहे। विनाश काल विपरीत बुद्धि ये लाइन मैं हमेशा याद रखती हूं। पैसे तो इंसान कभी भी कमा सकता है, अगर खत्म भी हो जाए तो दोबारा कमा सकता है। नाम और शोहरत भी आती-जाती रहती है। लेकिन अगर बुद्धि सही हो और मन में शांति हो, तो जीवन अच्छा चलता है। गणपति बप्पा का नाम, उनकी उपस्थिति और उनका आशीर्वाद हमेशा हमारे दिल, दिमाग और आत्मा में रहे, यही मेरी सदैव प्रार्थना है।