फ्री ई-पेपर
पर्सनलाइज़्ड फ़ीड
पर्सनलाइज़्ड नोटिफ़िकेशन
चलते-फिरते ख़बरें
लॉयल्टी रिवॉर्ड्स
विज्ञापन

इंटरव्यू: हॉलीवुड की इस चीज के मुरीद हुए विद्युत, स्ट्रगल से लेकर फिल्मी सफर पर की बात; इस मूवी में आएंगे नजर

सार

Vidyut Jammwal Exclusive Interview: अभिनेता विद्युत जामवाल अब हॉलीवुड में कदम रखने जा रहे हैं। फिल्म ‘स्ट्रीट फाइटर’ में वह मशहूर किरदार धालसिम की भूमिका में नजर आएंगे। इससे पहले एक्टर ने हॉलीवुड, अपने करियर समेत कई मुद्दों पर खुलकर बात की। जानिए उन्होंने क्या कहा। 
विज्ञापन
विद्युत जामवाल - फोटो : अमर उजाला
विज्ञापन

विस्तार
वॉट्सऐप चैनल फॉलो करें

हाल ही में अमर उजाला से खास बातचीत में अभिनेता विद्युत जामवाल ने आने वाली फिल्म के किरदार, हॉलीवुड में काम करने के अनुभव, अनुशासन, एआई और अपने अब तक के सफर पर खुलकर बात की। 
विज्ञापन


सवाल: ‘स्ट्रीट फाइटर’ में धालसिम का किरदार ऑफर हुआ तो पहला विचार क्या था?
जवाब:
मैं धालसिम के कैरेक्टर के बारे में जानता तो था ही। जब मुझे पता लगा कि ‘स्ट्रीट फाइटर’ की कास्टिंग हो रही है और इस सिलसिले में मुझे फोन किया गया, तो मुझे लग तो रहा था कि यही किरदार होगा। मैं काफी एक्साइटेड था।

यह जापानी वीडियो गेम पर आधारित है। धालसिम योगा मास्टर हैं और अपनी योगा की शक्तियों का इस्तेमाल लड़ने के लिए करते हैं। डायरेक्टर ने बताया कि मुझे अपने बाल शेव करने पड़ेंगे। वैसे कैरेक्टर के लिए इसकी जरूरत नहीं पड़ी थी, उन्होंने मास्क भी पहनाया था। 
विज्ञापन


सवाल: हमारे यहां योगी की एक अलग छवि है। धालसिम उससे बिल्कुल अलग है। इसे निभाते समय कोई कॉन्फ्लिक्ट था?
जवाब:
कोई कॉन्फ्लिक्ट नहीं था। जिनके बारे में आप बात कर रहे हैं, वो सिर्फ फिलॉसफी की बातें करते हैं। अगर मैं आपको उदाहरण दूं, तो यह कैरेक्टर बोधिधर्मा की तरह है, जो हिंदुस्तान से चीन गए थे और जिन्होंने चीन में जेन फिलॉसफी शुरू की थी। बोधिधर्मा एक वारियर थे। उन्होंने लड़ना सिखाया है।

ऐसा नहीं है कि योगियों के बारे में हम सिर्फ यही सोचें कि वो बर्फ में घुसते हैं या आग के अंदर तपस्या करते हैं। इस तरह के वारियर भी होते हैं। मैं इसलिए एक्साइटेड था, क्योंकि यही मैंने अपनी जिंदगी में किया है। मैंने कलरीपयट्टू की ट्रेनिंग ली है और मैं लोगों को सिखाता हूं। ये कैरेक्टर प्ले करना मेरे लिए खुशकिस्मती की बात थी।

सवाल: हॉलीवुड में काम करने के अनुभव में सबसे अलग क्या लगा?
जवाब:
अधिकतर चीजें अलग ही हैं। वहां डिसिप्लिन के जो मायने हैं, वो बिल्कुल अलग हैं। वहां टाइम पर आना कोई बड़ी बात नहीं है। वहां टाइम पर ही आना होता है।
 
Trending Videos

विद्युत जामवाल - फोटो : सोशल मीडिया
सवाल: अलग-अलग देशों और क्षेत्रों से आए बड़े कलाकारों के साथ काम करने का अनुभव कैसा रहा?
जवाब:
ये वो लोग हैं, जिन्हें हिंदुस्तान में लोग इतनी अच्छी तरह से जानते हैं। कोई WWE में है, कोई K-pop म्यूजिक में है, कोई स्टैंडअप कॉमेडी में है। इन लोगों के साथ रहना, रोज शूट करना और फिर रातों को बातें करना बिल्कुल अलग अनुभव था। इनमें से कई लोग इंडिया आ चुके हैं, उनके इंडियन दोस्त भी हैं। लेकिन एक हिंदुस्तानी के साथ समय बिताना उनके लिए भी खास था। जिस तरह से मैंने अपने आप को रिप्रेजेंट किया, वो अनुभव भी खास था।

सवाल: किरदार के लिए फिजिकल ट्रांसफॉर्मेशन कितना करना पड़ा?
जवाब:
जब प्रोड्यूसर और डायरेक्टर कास्टिंग कर रहे थे और उन्होंने हिंदुस्तान को देखा तो उन्होंने पूरी हिस्ट्री देखी कि किस आदमी ने अपनी लाइफ में इतना समय इस चीज में बिताया है। हर कैरेक्टर उन्होंने ऑथेंटिक लिया है, जो उनकी रियल लाइफ जैसी है। चाहे वो फिफ्टी सेंट हों, जेसन मोमोआ हों या कोडी रोड्स। सबको उन्होंने उनकी पर्सनालिटी के आधार पर लिया। मैं जैसा हूं, वैसा ही हूं। मुझे कोई अलग से ट्रांसफॉर्म नहीं करना पड़ा। बस मेरे किरदार के लिए बाल उड़ा दिए। (हंसते हुए)

सवाल: प्रोस्थेटिक लुक तैयार करने में कितना वक्त लगता था?
जवाब:
वैसे, ये जितने भी एक्टर्स हैं हमारी फिल्म में, हर आदमी एक कैरेक्टर में है। उसका जो रूप है, वो वीडियो गेम के आधार पर है। हर आदमी को समय लगता था।

हां, मुझे बाकियों से दो घंटे ज्यादा लगते थे। हर दिन तीन-चार घंटे प्रोस्थेटिक मेकअप के लिए लगते थे। मान लीजिए अगर सबका सुबह शूट का कॉल टाइम छह बजे होता था तो मैं चार बजे पहुंच जाता था। लेकिन मुझे कभी इस बात का दुख नहीं हुआ, बल्कि एक्साइटमेंट होती थी।

विद्युत जामवाल - फोटो : इंस्टाग्राम-@mevidyutjammwal
सवाल: इंडिया को लेकर उनके नजरिए में ऐसी कौन-सी बात थी जो आपको खास लगी?
जवाब:
वो हिंदुस्तान के बारे में जितना जानते हैं और जो जानते हैं, वो हकीकत ही है। वो हिंदुस्तान को वैसे ही देखते हैं जैसा हम लोग देखते हैं। उनको पता है कि टेक्नोलॉजी डेवलपमेंट इंडिया में किस लेवल पर है। एक समय ऐसा था जब अमेरिका को लगता था कि यहां अभी भी हाथी घूम रहे हैं, लेकिन वो बिल्कुल खत्म हो चुका है। हिंदी सिनेमा के बारे में वो लोग काफी जानते हैं। अधिकतर एक्टर्स के बारे में शायद नहीं जानते होंगे, लेकिन सिनेमा के बारे में उन्हें काफी जानकारी है।

सवाल: करीब 15 साल के करियर की इस जर्नी को कैसे डिफाइन करेंगे?
जवाब:
बहुत अच्छी किस्मत। ये जर्नी सिर्फ किस्मत पर आधारित रही है। बाकी सब डिसिप्लिन और हार्डवर्क है। मुझे लगता है किस्मत ने भी साथ दिया।

सवाल: आपको एक्शन के लिए जाना जाता है। कभी लगा कि आप स्टिरियोटाइप हो गए हैं?
जवाब:
मैं जो पहले करता था, अगली फिल्मों में उससे बेहतर करने की हमेशा कोशिश करता हूं। उसके लिए आप तपस्या करते रहते हैं। ‘स्ट्रीट फाइटर’ के साथ एक और लेवल ऊपर चले जाते हैं, क्योंकि आप एक ऐसी फ्रेंचाइजी का हिस्सा हैं, जिसका अधिकतर लोग सपना देखते हैं। मैं इसके बारे में पहले नहीं जानता था। जब मुझे पता लगा तो मुझे यकीन हो गया कि ऊपर वाला मेरी बात सुन रहा है।

विद्युत जामवाल - फोटो : इंस्टाग्राम
सवाल: प्रोड्यूसर बनने के बाद ऐसी कौन-सी सीख मिली जो शायद एक एक्टर नहीं सीख पाता?
जवाब:
बहुत सारी चीजें सीखते हैं। आप सिनेमा को अलग एंगल से देखने लग जाते हैं। आपको हर चीज के बारे में जानना जरूरी हो जाता है। एक्टर अगर फिल्म इंडस्ट्री से नहीं है, तो अधिकतर एक्टिंग या उसी दायरे में रहता है। लेकिन प्रोड्यूसर के तौर पर ऐसा कोई डिपार्टमेंट नहीं है, जिसके बारे में आपको जानकारी नहीं होनी चाहिए। प्रोड्यूस करना बिल्कुल अलग खेल है।

सवाल: अगर प्रोड्यूसर के तौर पर इंडस्ट्री में कोई बदलाव ला सकते तो क्या बदलते?
जवाब:
हिंदुस्तान में सब कुछ परफेक्ट है। जिस तरह से काम हो रहा है, ऐसा ही होता है। अगर कुछ बेहतर हो पाता तो शायद लोग कर ही रहे होते। तो जैसा है, वैसा ठीक है।

सवाल: हॉलीवुड में आपने डिसिप्लिन का जिक्र किया। क्या भारतीय फिल्म इंडस्ट्री में भी इस बदलाव की जरूरत है?
जवाब:
देखिए, डिसिप्लिन जिस तरह से लोग सोचते हैं, डिसिप्लिन सिर्फ टाइम पर आना नहीं है। कचड़े को कचरे के डिब्बे में डालना भी डिसिप्लिन है। क्या वो हिंदुस्तान में चेंज किया जा सकता है? अब देखिए न, चाट की दुकान पर जितना कचरा डिब्बे के अंदर होता है, उससे ज्यादा बाहर होता है। अब वो तब्दीली कहां से लाई जाए, मैं नहीं बता पाऊंगा। हां, लाई जा सकती है। कोशिश की जा सकती है। लेकिन क्या बदलाव आ रहा है? अभी तो नहीं दिख रहा मुझे।

विद्युत जामवाल - फोटो : इंस्टाग्राम@mevidyutjammval
सवाल: AI के आने से एक्शन और स्टंट इंडस्ट्री में क्या बदलाव देख रहे हैं?
जवाब:
AI से बहुत बदलाव आएगा। टेक्नोलॉजी इसलिए मैच्योर हो रही है ताकि बदलाव आए। फोन अपग्रेड हुआ, iPhone 3 से 18 पर आए, आज हम बहुत आगे जा रहे हैं। बदलाव तो आए हैं और अच्छे के लिए ही आए हैं। अगर AI आ रहा है तो बहुत अच्छे के लिए आ रहा होगा। इसका इस्तेमाल तो हमारी इंडस्ट्री में हो ही रहा है।

सवाल: AI से स्टंट परफॉर्मर्स और एक्शन डायरेक्टर्स को कैसे फायदा होगा?
जवाब:
इससे उन्हें चोटें कम लगेंगी। क्योंकि टेक्नोलॉजी से आपको पता लग जाएगा कि कहां रिस्क ज्यादा है और कहां कम है। टेक्नोलॉजी से फायदा ही होगा। अगर आप टैलेंटेड हैं, तो टेक्नोलॉजी की मदद कर सकते हैं। टेक्नोलॉजी की मदद लेना और उसकी मदद करने के लिए आपको टैलेंटेड होना पड़ेगा।

सवाल: आपने खुद आउटसाइडर के तौर पर शुरुआत की। आज जो लोग इंडस्ट्री में आने का सपना देखते हैं, उन्हें क्या सलाह देंगे?
जवाब:
ये थोड़ा कॉम्प्लिकेटेड है, क्योंकि इस सवाल में आउटसाइडर भी आ गया है और सपने का जिक्र भी। देखिए, अगर आप में टैलेंट है और आपको यकीन है कि ये टैलेंट आपका थोड़ा अलग है और आप मेहनत करके इसे और बेहतर कर सकते हैं, तो आपको कोई नहीं रोक सकता। लेकिन आपको अपना टैलेंट जानना जरूरी है। आपके अंदर किस चीज का पैशन है, आपको क्या करने में मजा आता है? अगर आप वो कर रहे हैं तो आप कभी फेल नहीं हो सकते।

अधिकतर लोग तभी फेल होते हैं जब या तो विषय का उन्हें ज्यादा ज्ञान नहीं होता या उसके बारे में पूरी समझ नहीं होती। अगर आप किसी चीज को समझ जाएं तो चांसेस कम हैं कि आप उस चीज में सफल न हों। 
विज्ञापन

स्ट्रीट फाइटर - फोटो : सोशल मीडिया
सवाल: आपने शुरुआत में कब महसूस किया कि आपको अपनी पहचान बनाने के लिए अलग रास्ता चुनना है?
जवाब:
मैं 9वीं क्लास में था। मुझे यकीन हो गया था कि मैं पढ़ाई में नालायक हूं। मुझे बहुत मेहनत करनी है। वहीं से सिलसिला शुरू हुआ था। तभी समझ गया था कि अगर आप किसी चीज में सफलता चाहते हैं, तो आपको उसके बारे में हर चीज जाननी पड़ेगी।

सवाल: OTT में नए एक्टर्स को काफी मौके मिल रहे हैं। क्या आपको लगता है कि वहां भी अब स्टार सिस्टम आने लगा है?
जवाब:
मुझे मुंबई आए जितना समय हुआ है, मैं जितने नेशनल स्कूल और ड्रामा के एक्टर्स को जानता था, जो बेरोजगारी के आलम से गुजर रहे थे, आज वो काफी जाने-पहचाने एक्टर्स हो गए हैं। OTT ने उन्हें बहुत मौके दिए। हर एक्टर जिसने एक्टिंग में महारत हासिल की है या एजुकेशन ली है, उसे काम जरूर मिलना चाहिए।

सवाल: आपके मुताबिक असली स्ट्रगल क्या है? क्या नए कलाकार जिन चीजों को स्ट्रगल कहते हैं, वे सिर्फ इस सफर का हिस्सा हैं?
जवाब:
अगर लोगों को लगता है कि सीधा मिल जाता है, तो सीधा कुछ भी नहीं मिलता। इसका मतलब ये है कि अगर आपको स्विमिंग सीखनी है तो गीला होना पड़ेगा।

जब मैं लोगों को सुनता हूं कि मैंने खाना नहीं खाया था, एक्टिंग में ये किया, तीन दिन भूखा रहा, ऑडिशन दिए, तो मुझे लगता है कि ये तो प्रोसेस है। अगर आप बाहर से आए हैं, तो थोड़ी परेशानियां तो आएंगी। लेकिन जब आप स्टार बन जाएंगे तो, क्या आप उन लोगों की मदद करेंगे जो नए आए हैं? सबसे अहम सवाल यही है। क्या आप उनकी जर्नी आसान करेंगे?

मैं इंटरव्यू में सुनता हूं कि मैं तीन दिन यहां रहा, मैंने ये किया, लोकल ट्रेन से ट्रैवल किया। यह नॉर्मल है। ये तो बहुत नॉर्मल चीज है, जिसे लोग स्ट्रगल कहते हैं। मेरी नजर में ये रियल स्ट्रगल नहीं है।

ये भी पढ़ें- दृश्यम 3: विग की मांग पर क्यों अड़े थे अक्षय खन्ना? जयदीप अहलावत की ऐसे हुई एंट्री; गायतोंडे ने किए खुलासे
विज्ञापन
Next
AU ऐप में पढ़ें