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13 साल से फिल्म इंडस्ट्री में हूं, जो पहले न देख पाया वो अब कैसे बदल पाएगा: अभय देओल

Sat, 07 Apr 2018 12:51 PM IST
रवि बुले
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अभय देओल की इस महीने 'नानू की जानू' फिल्म रिलीज हो रही है। जीवन और फिल्मी सफर पर अभय देओल से अमर उजाला की विशेष बातचीत....

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बीते तीन-चार साल में कभी आप यूएस में थे, कभी फिल्म निर्माण में। इससे एक्टिंग करियर धीमा हो गया। क्या कहेंगे?

मैं जैसी फिल्में बनाना/करना चाहता हूं, वे आसानी से नहीं हो पातीं। उन्हें लोगों का सपोर्ट कम मिलता है। कोई देखना नहीं चाहता। इन फिल्मों को रिलीज मुश्किल से मिलती है। बड़े लोग अलग फिल्में बनाते नहीं हैं। नए लोग बनाते हैं। उनका कोई पावर नहीं होता इंडस्ट्री में। डिस्ट्रीब्यूशन-मार्केटिंग में मुश्किल होती है। इन बातों में बहुत वक्त बीत जाता है।

आपकी डिफरेंट फिल्में करने की जिद से आम निर्माता-निर्देशक दूर रहते हैं। इसी रास्ते पर बढ़ेंगे या कुछ बदलेंगे?

मेरा विजन तो वही है। जिस सिनेमा से खुद को रिलेट कर पाऊं, जो हमारे समय की कहानी कहे। जिससे इंडस्ट्री आगे बढ़े। यह काम करते हुए 13 साल हो गए हैं, अब कुछ बदल भी नहीं पाएगा।

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कौन-कौन सी फिल्में आ रही हैं?

अभय देओल
बीते साल आप फिर तेजी से सक्रिय हुए। कौन-कौन सी फिल्में आ रही हैं?

इस महीने 'नानू की जानू' आ रही है। टाइम-ट्रैवल फिक्शन 'जेए-50' की शूटिंग के चार दिन बाकी हैं। इसी महीने काम हो जाएगा। अमेरिकन मल्टीस्टारर फिल्म है, 'द फील्ड'। पोस्ट प्रोडक्शन में है। मेरी तमिल फिल्म है, 'इधु वेदलम सोलुम कदही'। इस फैंटेसी में मैं राजा विक्रमादित्य बना हूं। इसे मैंने प्रोड्यूस भी किया है। एक छोटी अमेरिकन ऑफबीट फिल्म है, 'द ऑड्स'। यह अंग्रेजी-हिंदी मिक्स मुंबई में शूट हुई है। यह तो पिछले साल का काम हुआ। इस साल मैं सोलो एक्टर के रूप में तीन फिल्में कर रहा हूं। मैंने तय किया है कि तीन-चार साल सिर्फ काम करूंगा। पर्सनल लाइफ नहीं होगी।

आपने पिछले दिनों कहा कि ताऊ जी (धर्मेंद्र) के सामने एक्टिंग नहीं कर सकेंगे, जबकि आप प्रोफेशनल एक्टर हैं?

ऐसा शायद उनके प्रति मेरे सम्मान की वजह से है। कुछ ऐसी बातें होती हैं, जिनकी आप सफाई नहीं दे सकते परंतु अगर कभी वाकई यह स्थिति सामने आ जाए, तो देखा जाएगा। 
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13 साल में आपने इंडस्ट्री में क्या बदलते देखा है?

अभय देओल
आज सिनेमा बदल रहा है। इधर आपकी 'मनोरमाः सिक्स फीट अंडर' की बार-बार चर्चा होती है। फिल्म चली नहीं। क्या लगता है कि वह समय से पहले आई फिल्म थी?

समय से थोड़ी पहले तो थी, परंतु उसके दर्शक तब भी थे। फिल्म के प्रोड्यूसर उसे अच्छे से रिलीज नहीं कर पाए। उन्होंने साठ स्क्रीन लिए, उसमें भी शाम के एक या दो ही थे। जिस बजट में वह फिल्म बनी थी, वह आराम से रिकवर हो जाता। मुझे लगता है कि स्क्रिप्ट और डायरेक्टर के साथ प्रोड्यूसर भी अच्छा होना चाहिए।

13 साल में आपने इंडस्ट्री में क्या बदलते देखा है?

जब मेरी 'ओए लकी' और 'देव डी' फिल्म आई थीं, तब मल्टीप्लेक्स बन रहे थे, बढ़ रहे थे। उस छोटे से पीरियड के लिए ऐसी फिल्मों को जगह मिलने लगी थी। फिर दुर्भाग्य से मल्टीप्लेक्सों का विस्तार बंद हो गया। यूरोपीय देशों, कनाडा और चीन की तरह हमारे यहां सिनेमाघरों को सरकार का सहयोग नहीं मिलता। वे लोग फिल्मों में प्रयोग कर सकते हैं। अब डिजिटल प्लेटफॉर्म आ गया है, इससे बदलाव की गुंजाइश दिख रही है, क्योंकि इस पर दर्शकों की कोई सीमा नहीं है। आप पूरी दुनिया में देखे जा सकते हैं।
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