बीते साल आप फिर तेजी से सक्रिय हुए। कौन-कौन सी फिल्में आ रही हैं?
इस महीने 'नानू की जानू' आ रही है। टाइम-ट्रैवल फिक्शन 'जेए-50' की शूटिंग के चार दिन बाकी हैं। इसी महीने काम हो जाएगा। अमेरिकन मल्टीस्टारर फिल्म है, 'द फील्ड'। पोस्ट प्रोडक्शन में है। मेरी तमिल फिल्म है, 'इधु वेदलम सोलुम कदही'। इस फैंटेसी में मैं राजा विक्रमादित्य बना हूं। इसे मैंने प्रोड्यूस भी किया है। एक छोटी अमेरिकन ऑफबीट फिल्म है, 'द ऑड्स'। यह अंग्रेजी-हिंदी मिक्स मुंबई में शूट हुई है। यह तो पिछले साल का काम हुआ। इस साल मैं सोलो एक्टर के रूप में तीन फिल्में कर रहा हूं। मैंने तय किया है कि तीन-चार साल सिर्फ काम करूंगा। पर्सनल लाइफ नहीं होगी।
आपने पिछले दिनों कहा कि ताऊ जी (धर्मेंद्र) के सामने एक्टिंग नहीं कर सकेंगे, जबकि आप प्रोफेशनल एक्टर हैं?
ऐसा शायद उनके प्रति मेरे सम्मान की वजह से है। कुछ ऐसी बातें होती हैं, जिनकी आप सफाई नहीं दे सकते परंतु अगर कभी वाकई यह स्थिति सामने आ जाए, तो देखा जाएगा।
आज सिनेमा बदल रहा है। इधर आपकी 'मनोरमाः सिक्स फीट अंडर' की बार-बार चर्चा होती है। फिल्म चली नहीं। क्या लगता है कि वह समय से पहले आई फिल्म थी?
समय से थोड़ी पहले तो थी, परंतु उसके दर्शक तब भी थे। फिल्म के प्रोड्यूसर उसे अच्छे से रिलीज नहीं कर पाए। उन्होंने साठ स्क्रीन लिए, उसमें भी शाम के एक या दो ही थे। जिस बजट में वह फिल्म बनी थी, वह आराम से रिकवर हो जाता। मुझे लगता है कि स्क्रिप्ट और डायरेक्टर के साथ प्रोड्यूसर भी अच्छा होना चाहिए।
13 साल में आपने इंडस्ट्री में क्या बदलते देखा है?
जब मेरी 'ओए लकी' और 'देव डी' फिल्म आई थीं, तब मल्टीप्लेक्स बन रहे थे, बढ़ रहे थे। उस छोटे से पीरियड के लिए ऐसी फिल्मों को जगह मिलने लगी थी। फिर दुर्भाग्य से मल्टीप्लेक्सों का विस्तार बंद हो गया। यूरोपीय देशों, कनाडा और चीन की तरह हमारे यहां सिनेमाघरों को सरकार का सहयोग नहीं मिलता। वे लोग फिल्मों में प्रयोग कर सकते हैं। अब डिजिटल प्लेटफॉर्म आ गया है, इससे बदलाव की गुंजाइश दिख रही है, क्योंकि इस पर दर्शकों की कोई सीमा नहीं है। आप पूरी दुनिया में देखे जा सकते हैं।