बायोपिक बॉलीवुड और बदलता ट्रेंड
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पिछले कुछ सालों से फिक्शन सहित अन्य जॉनर की फिल्मों के साथ- साथ अब मेकर्स और दर्शकों को बायोपिक्स भी पसंद आ रही हैं। ऐसे में हर कोई कोशिश कर रहा है कि कुछ न कुछ नया करें जिससे दर्शकों को मजा आए और फिल्में भी पैसा कमाए।
ऐसे में कई क्षेत्र के दिग्गजों और कई घटनाओं पर बायोपिक बनना शुरू हो गई हैं। कुछ बायोपिक्स जहां मिसाल कायम कर रही हैं तो कुछ का हाल ऐसा भी हो जाता है कि बड़े पर्दे पर कब आईं और कब गईं किसी को पता भी नहीं चल पाया। लेकिन क्या आप जानते हैं कि बॉलीवुड की पहली बायोपिक कौन सी थी ? या फिर बायोपिक्स का ट्रेंड सभी के सिर चढ़ कर क्यों बोल रहा है ? ऐसे ही बायोपिक से जुड़ीं कई बातें और कई सवालों का जवाब इस स्पेशल रिपोर्ट में आपको मिलेंगे।
क्या होती है बायोपिक, इनकी जरूरत क्यों?
बायोपिक
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बायोपिक के मुद्दे को आगे बढ़ाने से और इस पर बात करने से पहले जानते हैं कि आखिर बायोपिक का मतलब क्या होता है? दरअसल बायोपिक का मतलब होता है जीवनी। यानी किसी भी व्यक्ति या घटना के बारे में पूरी जानकारी। जब इस बारे में किताब लिखी जाती है तो उसे बायोग्राफी कहा जाता है जबकि जब उसके बारे में फिल्म बनती है तो उसे बायोपिक का नाम दे दिया जाता है। ये तो बात हो गई कि आखिर बायोपिक होती क्या है।
सवाल उठता है कि आखिर बायोपिक की जरूरत क्यों है? वैसे तो इस सवाल का कोई साइंटिफिक जवाब नहीं हैं क्योंकि यह कोई विज्ञान का सवाल नहीं है। ऐसे में हर किसी के मुताबिक इसका जवाब अलग हो सकता है। फिर भी उन सभी जवाबों में कुछ बातें जो एक सी होंगी वो हम आपको बताते हैं।
दरअसल बायोपिक की जरूरत इसलिए पड़ रही है क्योंकि आज की पीढ़ी को हम किसी घटना या शख्स के बारे में बता सकें। घटनाओं से जुड़ी कुछ बायोपिक जहां हमारी जानकारी बढ़ाती हैं तो वहीं शख्सियतों से जुड़ी बायोपिक हमें बताती हैं कि वो शख्स क्यों अहम है। इसके साथ ही कई बायोपिकों में यह भी बताया जाता है कि सफलता का सफर आसान नहीं होता और इसके लिए जमकर मेहनत करनी पड़ती है।
भारतीय सिनेमा की पहली बायोपिक
राजा हरीशचंद्र का एक सीन
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भारतीय सिनेमा की पहली बायोपिक
बायोपिक के बारे में जानने के बाद अगला सवाल उठता है कि पहली भारतीय बायोपिक कौन सी थी? तो बता दें कि भारतीय सिनेमा की शुरुआत की बायोपिक के साथ हुई थी। 1913 में पहली भारतीय फिल्म 'राजा हरीशचंद्र' बनी थी।
फिल्म का निर्देशन दादासाहेब फाल्के ने किया था। मूक फिल्म राजा हरीशचंद्र के जीवन पर आधारित थी। ऐसे में इसे भारतीय सिनेमा की पहली बायोपिक कहा जा सकता है। फिल्म में मुख्य किरदार दत्तात्रय दामोदर दबके और अन्ना सालुंके ने निभाया था। दत्तात्रय जहां हरीशचंद्र बने थे तो वहीं अन्ना उनकी पत्नी बनी थीं।
किन क्षेत्रों पर बनी हैं सबसे ज्यादा बायोपिक्स
बॉलीवुड की बायोपिक्स
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किन क्षेत्रों पर बनी हैं सबसे ज्यादा बायोपिक्स
1913 से शुरू हुआ बायोपिक का सिलसिला पिछले कुछ सालों में काफी बढ़ गया है। राजनीति हो, स्पोर्ट्स हो या फिर कोई बड़ी घटना करीब-करीब सभी पर बायोपिक बनी हैं और आगे भी तेजी से काम जारी है। ऐसे में एक नजर क्षेत्रों के मुताबिक बायोपिक्स पर एक नजर..
स्पोर्ट्स: वैसे तो स्पोर्ट्स के क्षेत्र में कई बायोपिक बन चुकी हैं। लेकिन हम आपको बताते हैं स्पोर्ट्स की दस बेहतरीन बायोपिक्स के बारे में और साथ ही उसमे लीड किरदार निभाने वाले एक्टर के बारे में-
पान सिंह तोमर (इरफान खान), भाग मिल्खा भाग (फरहान अख्तर), मैरी कॉम (प्रियंका चोपड़ा), अजहर (इमरान हाशमी), बुधिया सिंह: बॉर्न टू रन (मनोज वाजपेयी और मयूर पटोले), दंगल (आमिर खान), सचिन ए बिलियन ड्रीम्स (सचिन तेंदुलकर), एम एस धोनी: द अनटोल्ड स्टोरी (सुशांत सिंह राजपूत), सूरमा (दिलजीत दोसांझ) और गोल्ड (अक्षय कुमार)।
राजनीति: स्पोर्ट्स के अलावा राजनीति के क्षेत्र में कई बायोपिक बनी हैं। ऐसे में हम बताते हैं राजनीति से जुड़ी कुछ बेहतरीन बायोपिक्स के बारे में...
नेताजी सुभाष चंद्र बोस: द फॉर्गटन हीरो (2005), सरदार (1993), डॉ बाबासाहेब आम्बेडकर (2000), गांधी (1982), ठाकरे (2019), द एक्सीडेंटल प्राइम मिनिस्टर (2019), पीएम नरेन्द्र मोदी (2019), द ताशकंद फाइल्स ( 2019) और गांधी, माय फादर (2007)।
स्पोर्ट्स और राजनीति के अलावा भी कई ऐसी बायोपिक्स हैं जो काफी सुर्खियों में रहीं। इन बायोपिक की लिस्ट में - गुरु (2007), द लीजेंड ऑफ भगत सिंह (2002), शाहिद (2012), बैंडिट क्वीन (1994), नीरजा (2016), अलीगढ़ (2015), मांझी: द माउंटेन मैन (2015), संजू (2018), मणिकर्णिका द क्वीन ऑफ झांसी (2019), डैडी (2017), हसीना पारकर (2017), सरबजीत (2016), एयरलिफ्ट (2016), मैं और चार्ल्स (2015), मंगल पांडे (2005) और अब तक छप्पन (2004) जैसी फिल्में शामिल हैं। ये फिल्मे या तो किसी शख्स के बारे में हैं या फिर किसी घटना/ किस्से के बारे में।
बायोपिक्स और विवाद
बैंडिट क्वीन का एक सीन
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बायोपिक्स और विवाद: वैसे बायोपिक्स का विवादों से भी काफी करीबी रिश्ता है। हाल ही में रिलीज हुई पीएम नरेन्द्र मोदी की बायोपिक काफी विवादों में रही। इसके पहले भी कई बायोपिक्स पर विवाद हुए हैं। विवादों में रही बायोपिक्स की बात करें तो संजू, मणिकर्णिका.., दंगल, ठाकरे, हसीना पारकर, शाहिद, अलीगढ़, मंटो, सरबजीत और बैंडिट क्वीन सहित कई बायोपिक्स पर विवाद हो चुका है। कभी आरोप लगे हैं कि खास फायदे के लिए बायोपिक बनाई गई तो कभी आरोप लगे कि बायोपिक में सच्चाई नहीं दिखाई गई है।
अपकमिंग बायोपिक्स: बायोपिक का यह बढ़ता ट्रेंड आने वाले वक्त में और बढ़ता नजर आ रहा है। ऋतिक रोशन स्टारर फिल्म सुपर 30 जल्द ही रिलीज होने वाली है। इसके अलावा गुंजन सक्सेना, ओशो, छपाक, ये दिल मांगे मोर, अभिनव बिंद्रा, सायना, शकीला, पीवी सिंधू और मोगुल आदि जैसी कई बायोपिक भी कतार में हैं। कुछ पर काम शुरू हो चुका है तो वहीं कुछ पर काम शुरू करने की बात जारी है।
हॉलीवुड की बायोपिक्स
स्टीव जॉब्स
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हॉलीवुड की बायोपिक्स
बायोपिक का क्रेज सिर्फ बॉलीवुड ही नहीं बल्कि हॉलीवुड में भी देखने को मिलता है। हॉलीवुड में कई ऐसी बायोपिक फिल्में हैं जिन्हें काफी पसंद किया गया है।
हॉलीवुड की बेस्ट बायोपिक्स में- द रिवेनेंट, इरिन ब्रोकोविच, इनटू द वाइल्ड्स, द इमिटेशन गेम, द एविएटर, फ्रीडा, मिल्क, द परसूट ऑफ हैप्पीनेस, दल्लास बायर्स क्लब, द वॉल्फ ऑफ वॉल स्ट्रीट, द सोशल नेटवर्क, अली, लवलेस, ट्रुम्बो, द आयरन लेडी, द थ्योरी ऑफ एवरिथिंग, स्टीव जॉब्स, ए ब्यूटीफुल माइंड, गुडफिल्लास, गांधी और वॉक द लाइन आदि शामिल हैं।