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ब्लॉग में अमिताभ बच्चन ने दिए कई सवालों के जवाब, बोले-मैं क्या बदला लूंगा?

Mon, 06 Nov 2017 08:01 AM IST
BBC हिंदी
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अमिताभ बच्चन
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बॉलीवुड के महानायक अमिताभ बच्चन 75 साल की उम्र में भी लगातार काम कर रहे हैं। वे फिल्मी पर्दे के अलावा छोटे पर्दे पर भी लगातार जगह बनाए हुए हैं साथ ही वे कई उत्पादों के विज्ञापनों में भी नजर आते हैं। 
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लेकिन आखिर ऐसा क्या हुआ कि अमिताभ को कहना पड़ा कि वे अब शांति से रहना चाहते हैं, उन्हें सुर्खियों में आने की कोई लालसा नहीं है। दरअसल रविवार को बिग बी ने अपने ब्लॉग बच्चन बोल में कई सवालों के जवाब लिखे, उन्होंने मीडिया पर भी कुछ सवाल उठाए और कहा कि उन्हें कई दफा बेवजह परेशान किया गया।

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अमिताभ बच्चन को कुछ दिन पहले बीएमसी की तरफ़ से गैरकानूनी निर्माण संबंधी एक नोटिस जारी किया गया था। अमिताभ ने लिखा कि मीडिया मुझे तुरंत जवाब देने के लिए कहता है। मैं ऐसा करता भी हूं, लेकिन कई बार मुझसे देरी हो जाती है। 
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बीएमसी के नोटिस के संबंध में अमिताभ ने अपने वकील अमित नाइक का बयान लिखा है कि मेरे क्लाइंट ने 29 अक्टूबर 2012 को ओबरॉय रिएलिटी लिमिटेट से ओबरॉय सेवेन में एक प्रॉपर्टी ख़रीदी थी जिसकी रजिस्ट्री 2 नवंबर 2012 को की गई।

Amitabh Chalisa
यह पहले से बनी-बनाई प्रॉपर्टी थी जिसमें मेरे क्लाइंट की तरफ से न तो एक ईंट जोड़ी गई न ही कोई हटाई गई। इसलिए उन पर किसी तरह के गैरकानूनी निर्माण करवाने का सवाल ही नहीं उठता। 

अमिताभ ने अपने ब्लॉग के जरिए इतिहास के पन्नों को भी पलटा। उन्होंने बोफोर्स कांड को याद करते हुए लिखा कि उनके परिवार को कई सालों तक सवालों के कटघरे में खड़ा किया गया। 

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अमिताभ ने लिखा, हमें कई सालों तक परेशान किया गया, गद्दार साबित किया गया, और जब यह सब असहनीय हो गया तो हम जल्दी न्याय पाने के लिए यूनाइटेड किंगडम (यूके) की अदालत में गए, हमने यूके के एक अखबार के खिलाफ केस किया और हम वो केस जीते भी।

वे लिखते हैं, हमें बदनाम करने वाले कभी कोर्ट के सामने पेश नहीं हुए, वे अपने आरोप साबित करने कभी नहीं आए, कोर्ट तो सभी के लिए खुला होता है...लेकिन कोई अपने आरोप साबित करने नहीं आया।

अमिताभ बच्चन
लगभग 25 साल बाद देश के एक प्रमुख वकील ने सभी को बताया कि इस कांड में हमारे परिवार का नाम जानबूझ कर जोड़ा गया था। जब यह बात सामने आई तो मीडिया ने मुझसे पूछा कि क्या मैं इसका बदला लूंगा। 

अमिताभ आगे लिखते हैं, मैं क्या बदला लूंगा? क्या इससे हमारे वो दुख भरे साल खत्म हो जाएंगे जिनसे हम गुजरे। क्या इससे हमें कुछ सुकून मिलेगा, नहीं इससे कुछ नहीं होगा। 

दुनिया भर में तहलका मचाने वाले पनामा पेपर्स लीक मामले में भी बच्चन परिवार का नाम शामिल हुआ। अमिताभ बच्चन ने इसका जिक्र भी अपने ब्लॉग में किया है।
उन्होंने लिखा, कुछ महीनों पहले मैंने पनामा पेपर्स लीक में दोबारा अपना नाम देखा, यह रिपोर्ट इंडियन एक्सप्रेस ने जारी की थी। 

इस अखबार ने मेरी प्रतिक्रिया जाननी चाही, वे तमाम सवालों पर मेरी टिप्पणी चाहते थे। हमारी तरफ से उसी समय उन्हें दो जवाब दिए गए, उन्हें प्रकाशित भी किया गया। एक्सप्रेस में इस खबर के बाद से अभी तक हमारे नाम पर 6 समन जारी हो चुके हैं। हमने निष्ठापूर्ण और विधिवत तरीके से सभी का जवाब दिया। 

अमिताभ बच्चन
जहां कहीं भी हमें व्यक्तिगत रूप से पेश होने के लिए कहा गया हम वहां हाजिर भी हुए, फिर चाहे वह दिल्ली हो या मुंबई। वे हमसे जितनी जानकारी चाहते थे हमने दी, कुछ सवालों के लिए हमने वक्त मांगा क्योंकि वे 25 साल से भी ज्यादा पुराने मामलों से जुड़े सवाल थे, इतनी पुरानी बातें और उनसे जुड़े सही जवाब निकालने में वक्त तो लगता है।

अमिताभ ने अपने ब्लॉग के जरिए मीडिया की कार्यशैली पर भी सवाल उठाए हैं। वे लिखते हैं कि मीडिया के पास हमेशा सबसे पहले सूचना होने का विशेषाधिकार रहता है। ऐसा होना भी चाहिए क्योंकि मीडिया ही इस लोकतंत्र का चौथा स्तंभ है।

मीडिया के भी कुछ सिद्धांत हैं, वे किसी भी खबर को प्रकाशित करने से पहले उसे जांचते परखते हैं, और इसी सिलसिले में वे अलग-अलग श्रोतों के जरिए मुझ तक अपने सवाल भेजते हैं। कई बार उन्हें जवाब नहीं मिलते, कई बार जवाब देना बहुत जरूरी हो जाता है क्योंकि झूठे आरोपों पर चुप रहने से वे सच मान लिए जाते हैं।

अमिताभ लिखते हैं, आज का मीडिया पहले जैसा नहीं रह गया है, सुबह तक जो समाचार पत्र हम तक पहुंचता है उसकी तमाम खबरें रात में ही इंटरनेट के जरिए पढ़ी जा चुकी होती हैं। सोशल मीडिया इनपुट के आधार पर खबरों की सुर्खियां बनती हैं। 
 
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Amitabh Bachchan
इलैक्ट्रॉनिक मीडिया प्रिंट से ज्यादा तेज है, यहां तुरंत खबरें आती हैं, अगले दिन वे खबरें अखबारों में होंगी या नहीं ये तो उनके विवेक पर निर्भर करता है। 
अमिताभ आगे लिखते हैं, कुछ मीडिया हाउस मेरे तुरंत जवाब देने के तरीके की तारीफ करते हैं तो कुछ नहीं करते, मैं किसी के भी प्रति कोई पूर्वाग्रह नहीं बनाता। 

अगर मेरे खिलाफ आरोप हैं तो मैं उन्हें ठीक तरीके से सभी के सामने लाने की कोशिश करता हूं, कई बार मैं चुप भी रहता हूं, लेकिन क्या मीडिया के सवालों के जवाब देने से मामला सुलझ जाएगा, मुझे अंत में तो तमाम एजेंसियों के सामने भी जवाब देने ही होते हैं। 

ब्लॉग के अंत में अमिताभ ने लिखा है कि उम्र के इस पड़ाव में आकर मैं शांति की तलाश कर रहा हूं। वे लिखते हैं, अपने जीवन के बचे हुए कुछ अंतिम सालों को मैं अपने हिसाब से जीना चाहता हूं, मुझे किसी तरह के विशेषणों की जरूरत नहीं है। 

मुझे इनसे घृणा होने लगी है, मुझे सुर्खियों में रहने की लालसा नहीं, मैं इसके लायक नहीं हूं, ना ही मैं कहीं कोई पहचान बनाना चाहता हूं, मैं इसके योग्य भी नहीं हूं। अमिताभ ने अपना ब्लॉग ट्विटर पर भी साझा किया है, जिसमें उन्होंने लिखा है- ' I write because I write .. जी हां हुजूर मैं लिखता हूं। 
 
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