अदालत ने जून में, जूही चावला और दो अन्य लोगों द्वारा 5जी लाने के खिलाफ दायर मुकदमे को 'दोषपूर्ण' कानून की प्रक्रिया का दुरुपयोग बताया था और कहा था कि इसे 'प्रचार हासिल करने' के लिए दायर किया गया था। कोर्ट ने उनके इस मामले को खारिज कर दिया था तथा जुर्माना लगाया था। न्यायमूर्ति मिढ़ा ने कहा था कि जिस वाद में 5जी प्रौद्योगिकी के कारण स्वास्थ्य संबंधी खतरों के बारे में सवाल उठाए गए हैं, वह सुनवाई योग्य नहीं है और यह अनावश्यक चौंका देने वाले तुच्छ और परेशान करने वाले बयानों से भरा हुआ है जो खारिज किए जाने के योग्य हैं।
बता दें कि जूही चावला का कहना था कि यदि दूरसंचार उद्योग की योजनाएं पूरी होती हैं तो इस धरती पर कोई भी व्यक्ति, कीट, पौधा और पक्षी इसके प्रभाव से बच नहीं सकेगा। जूही चावला ने कहा था कि इन 5G योजनाओं से मनुष्यों पर गंभीर, अपरिवर्तनीय प्रभाव और पृथ्वी के सभी पारिस्थितिक तंत्रों को स्थायी नुकसान पहुंचने का खतरा है।