मेटा की तरफ से दी गई ये दलील
मामले में मेटा प्लेटफॉर्म्स (फेसबुक, इंस्टाग्राम और व्हाट्सएप के मालिक) की तरफ से अधिवक्ता वरुण पाठक पेश हुए। मेटा की तरफ से अदालत को बताया गया कि करण जौहर के मुकदमे में दिए गए कई कमेंट्स मानहानिकारक नहीं हैं। अधिवक्ता वरुण पाठक ने जोर देते हुए कहा कि एक व्यापक निषेधाज्ञा पारित करने से मुकदमेबाजी के द्वार खुल जाएंगे। कथित आपत्तिजनक कमेंट्स को लेकर मेटा की तरफ से अधिवक्ता ने दलील दी, 'ये सामान्य लोग हैं, जो टिप्पणियां और चर्चा कर रहे हैं। अब एक सामान्य मजाक के लिए उन्हें अदालत में घसीटा जा रहा है'।
हर फैन पेज ब्लॉक नहीं हो सकता: हाईकोर्ट
मामले की सुनवाई कर रहीं न्यायमूर्ति मनमीत प्रीतम सिंह अरोड़ा ने मेटा की दलील पर सहमति जताते हुए कहा कि हर फैन पेज को ब्लॉक करने या हटाने का आदेश नहीं दिया जा सकता। न्यायमूर्ति अरोड़ा ने कहा, 'मिस्टर राव आपको दो बातों पर ध्यान देना होगा, एक है अपमानजनक, जो मीम्स से अलग है। मीम्स जरूरी नहीं कि अपमानजनक ही हों। फिर कोई व्यक्ति सामान बेच रहा है। तीसरा है आपका डोमेन नाम। कृपया उसे स्पष्ट रूप से बताएं। न्यायालय इस पर विचार करेगा। मुझे लगता है कि मिस्टर पाठक सही हैं, यह हर फैन पेज नहीं हो सकता। हम कोई खुला निषेधाज्ञा नहीं दे सकते'।
करण जौहर के वकील ने दिया यह तर्क
वहीं, करण जौर के एडवोकेट राव ने तर्क दिया कि करण जौहर को यह निर्णय लेने का अधिकार है कि उनका केवल एक ही फैन पेज हो सकता है या नहीं। उन्होंने कहा, 'मजाक उड़ाने और वीडियो बनाने के बीच एक सीमा रेखा होती है। प्लेटफॉर्म जिम्मेदार हो जाता है। जितने ज्यादा मीम्स होंगे, वे उतने ही ज्यादा वायरल होंगे, आप उतना ही ज्यादा पैसा कमाएंगे। मुझे यह सुनिश्चित करने का अधिकार है कि कोई भी मेरी सहमति के बिना मेरे व्यक्तित्व, मेरे चेहरे या व्यक्तित्व संबंधी अन्य विशेषताओं का इस्तेमाल न करे। मैंने दूसरी तरफ देखने का फैसला किया है, इसका मतलब यह नहीं कि दूसरों को कोई छूट मिल गई है'।
बुधवार को पारित होगा आदेश
कुछ देर तक मामले की सुनवाई के बाद अदालत ने संकेत दिया कि वह कुछ खास पेजों को हटाने के आदेश दे सकती है और अगर बाद में ऐसे ही पेज दिखाई देते हैं, तो करण जौहर उन्हें सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म के ध्यान में ला सकते हैं, जो उस पर कार्रवाई कर सकता है। न्यायमूर्ति अरोड़ा ने कहा, 'अगर वे ऐसा नहीं करते हैं, तो आप अदालत आएं'। इसके बाद न्यायमूर्ति अरोड़ा ने कहा कि वह 17 सितंबर को अंतरिम राहत आवेदन पर आदेश पारित करेंगी।