फ्री ई-पेपर
पर्सनलाइज़्ड फ़ीड
पर्सनलाइज़्ड नोटिफ़िकेशन
चलते-फिरते ख़बरें
लॉयल्टी रिवॉर्ड्स
विज्ञापन

मर्दानी-2 के डायरेक्टर गोपी पुथरन बोले, 'हाथरस व बलरामपुर की घटनाओं से मेरे दिल को गहरी चोट पहुंची है'

Sun, 04 Oct 2020 08:27 AM IST
anand anand अमर उजाला ब्यूरो, मुंबई

सार

  • 'मर्दानी-2' के राइटर और डायरेक्टर गोपी पुथरन महिलाओं के खिलाफ हिंसा की लगातार बढ़ती घटनाओं को देखकर काफी दुखी हैं।
  • महिलाओं पर लगने वाले इस कलंक को जड़ से उखाड़ फेंकने के बाद ही समाज में बदलाव हो सकता है।
  • सौ मामलों में सिर्फ एक केस की रिपोर्ट की जाती है।
विज्ञापन
गोपी पुथरन - फोटो : अमर उजाला, मुंबई
विज्ञापन

विस्तार
वॉट्सऐप चैनल फॉलो करें

एक के बाद एक, लगातार दो मासूम लड़कियों के साथ गैंगरेप, बर्बरता और उनकी हत्या की घटनाओं के बारे में जानने के बाद फिल्ममेकर गोपी पुथरन ने अपनी नाराजगी जाहिर की है। हाथरस और बलरामपुर में हुई इन दिल दहला देने वाली घटनाओं ने पूरे देश को झकझोर दिया है, और इसी तरह के अपराध पर आधारित फिल्म 'मर्दानी-2' के राइटर और डायरेक्टर गोपी पुथरन महिलाओं के खिलाफ हिंसा की लगातार बढ़ती घटनाओं को देखकर काफी दुखी हैं।

विज्ञापन


गोपी कहते हैं, "हां, इस घटना से मेरे दिल को गहरी चोट पहुंची है। हां, मैं चाहता हूं कि उन सभी राक्षसों के खिलाफ तुरंत और कड़ी कार्रवाई की जाए, जो इस तरह की बर्बर घटनाओं को अंजाम देते हैं। इन दरिंदों के मन में भी सज़ा का डर होना चाहिए, क्योंकि अब तक उन्हें इसका कोई डर ही नहीं है! और हमारे लिए भी अपने-अपने घरों में बैठकर हत्याओं पर गुस्सा जाहिर करना और सजा की मांग करना बड़ा आसान है।"

विज्ञापन

गोपी पुथरन - फोटो : अमर उजाला, मुंबई
गोपी आगे कहते हैं, “रोजमर्रा की जिंदगी में महिलाओं और समाज के पिछड़े तबके के लोगों के प्रति अपने दिलों में हमदर्दी और संवेदनशीलता जगाना बड़ा ही मुश्किल काम है। जब तक हम मंदिरों में देवियों की मां के रूप में पूजा करते रहेंगे, लेकिन अपने घरों में और आस-पड़ोस में महिलाओं का अपमान करते रहेंगे, शायद तब तक हम तरक्की नहीं कर पाएंगे और इस तरह की घटनाएं बंद नहीं होंगी।”

गोपी मानते हैं कि पीड़ित महिलाओं पर लगने वाले इस कलंक को जड़ से उखाड़ फेंकने के बाद ही समाज में बदलाव हो सकता है। वह कहते हैं, "इस तरह के सौ मामलों में सिर्फ एक केस की रिपोर्ट की जाती है। बलात्कार सिर्फ जबरन सेक्स करना नहीं है, बल्कि यह खुले तौर पर अपनी ताकत का प्रदर्शन है। अगर हम वाकई इस तरह के भयंकर अपराधों को रोकना चाहते हैं, तो हमें मर्दानगी की ऐसी घिनौनी परिभाषा पर फिर से सोच-विचार करने के साथ-साथ इस तरह के अत्याचार की घटनाओं से जुड़े शर्म और कलंक को पूरी तरह मिटाने की जरूरत है।"

पढ़ें: देशभक्ति से प्रेरित फिल्में बनाने के लिए जाने जाते हैं जेपी दत्ता, जानें उनसे जुड़ी खास बातें
और पढ़ें...
विज्ञापन
Next
AU ऐप में पढ़ें