फ्री ई-पेपर
पर्सनलाइज़्ड फ़ीड
पर्सनलाइज़्ड नोटिफ़िकेशन
चलते-फिरते ख़बरें
लॉयल्टी रिवॉर्ड्स
विज्ञापन

क्रिएटिविटी और परफॉरमेंस के मामले में किसी की सलाह नहीं लेता : हर्षवर्द्धन

Sun, 11 Sep 2016 06:37 PM IST
रवि बुले/ अमर उजाला, मुंबई ब्यूरो
विज्ञापन
हर्षवर्द्धन कपूर
विज्ञापन
हर्षवर्द्धन का परिचय यह है कि वह अनिल कपूर के बेटे हैं। उनकी हंसी में पिता की झलक दिखती है लेकिन उनका अंदाज और इरादे जुदा हैं। निर्देशक राकेश ओमप्रकाश मेहरा की महत्वाकांक्षी फिल्म मिर्जिया से हर्षवर्द्धन बॉलीवुड में अभिनय की पारी शुरू कर रहे हैं। पेश है ऐक्टिंग की तैयारियों और सपनों को लेकर हर्षवर्द्धन से बातचीत -
विज्ञापन


प्रश्न- क्या ये मान लिया जाए कि फिल्मों में एक स्टार पुत्र की एंट्री हो रही है?

उत्तर- अगर आप सिर्फ इसलिए ऐसा कह रहे हैं कि मेरे पिता और परिवार के अन्य लोग सिने-इंडस्ट्री में हैं तो मैं कहूंगा कि जब से मुझे याद है, मैं मजबूत इरादों का व्यक्ति रहा हूं। मेरे अपने क्रियेटिव आइडियाज हैं। हर मुद्दे पर निजी राय होती है। मैं सिर्फ इसलिए ऐक्टर नहीं बना कि मेरे पिता एक्टर हैं। मेरा एक लक्ष्य है जीवन में। 8-10 साल बाद अगर कोई देखे कि किस एक्टर ने सिर्फ अपने मन की, अच्छी कहानियों वाली अलग तरह की फिल्में बेहतरीन डायरेक्टरों के साथ की है तो मैं चाहूंगा कि उसे मेरी फिल्मोग्राफी में ये बातें मिले।

प्रश्न- संभव है कि ऐसा हो। आपके सामने आर्थिक समस्याएं नहीं हैं। घर का प्रोडक्शन हाउस है। मगर बॉलीवुड का सिनेमा का स्टार पावर केंद्रित है।

उत्तर- यह बात किसने तय की? मैं उससे मिलना चाहूंगा। सिनेमा क्रियेटिव फील्ड है। अगर आप ईमानदारी से कोई किरदार निभाएं तो दर्शकों से सीधे जुड़ सकते हैं। किसी को नहीं लगा था कि 'बर्फी' 110 करोड़ का बिजनेस करेगी और रणबीर कपूर को स्टार बनाएगी। फरहान ने भी दो साल मेहनत की थी तब किसी को नहीं लगा था कि 'भाग मिल्खा भाग' उस साल की और उनके करियर की सबसे बड़ी हिट होगी। 'नीरजा' ने सोनम कपूर को स्टार बनाया। फिल्म ने 80 करोड़ का बिजनेस किया। ये लोग किरदार निभा रहे थे। मुझे लगता है कि ऐक्टर का लक्ष्य स्टार बनना नहीं होना चाहिए।
विज्ञापन


प्रश्न- आपने जिन फिल्मों के नाम लिए वो बॉक्स ऑफिस पर सफल रहीं यानी सफलता का पैमाना टिकट खिड़की ही है।

उत्तर- बॉक्स ऑफिस नतीजे बताते हैं कि बड़ा दर्शक वर्ग आपको स्वीकार रहा है या नकार रहा है। फिल्म फिक्स्ड डिपॉजिट नहीं है कि जहां साल के अंत में आपको कुछ मिलना है। इसमें कुछ भी हो सकता है। आप सिर्फ ईमानदारी से काम कर सकते हैं।
Trending Videos

हर्षवर्द्धन कपूर
प्रश्न- आपके लिए बॉक्स ऑफिस कितना महत्वपूर्ण है?

उत्तर- बहुत ज्यादा क्योंकि जिस तरह की फिल्में मैं कर रहा हूं वह आर्टिस्टिक और क्रियेटिव हैं। ऐसे में मेरा फोकस बॉक्स ऑफिस पर ज्यादा रहेगा। हालांकि जब मैं फिल्म साइन करता हूं और किरदार की तैयारी करता हूं तब उसके बारे में नहीं सोचता। बॉक्स ऑफिस पर आपका वश नहीं। तीन साल मेहनत करके आप बहुत खूबसूरत फिल्म बना सकते हैं लेकिन अगर मार्केटिंग टीम ने ठीक से मार्केट नहीं किया तो ओपनिंग नहीं लगेगी। इंडस्ट्री के लोग बुरा-भला कहेंगे। मगर शनिवार तक वर्ड ऑफ माउथ चल गया तो फिल्म में जंप आएगा। रविवार को भी जंप आएगा। सोमवार को फिल्म टिकी रहेगी। अच्छी फिल्में इसी तरह आगे बढ़ती हैं।

प्रश्न- आपके पिता-चाचा, बहन-भाई एक्टर हैं। ऐसे में एक्टर बनने के लिए क्या अलग से भी तैयारी करनी पड़ी?

उत्तर- मुझे हमेशा लगता था कि मैं ऐक्टर या राइटर बनना चाहता हूं। मैंने सदर्न कैलिफोर्निया की चैपमैन युनिवर्सिटी से चार साल का स्क्रीन राइटिंग में बीए का कोर्स किया। इस दौरान एक साल एक्टिंग भी की। फिर मैंने देहरादून में थियेटर एक्टर अनूप उल्फत के साथ तीन महीने ट्रेनिंग की। इसके बाद कास्टिंग डायरेक्टर मुकेश छाबड़ा के साथ काफी काम किया। मिर्जिया साइन की तो डायरेक्टर ओमप्रकाश मेहरा ने अमेरिका में एक्टिंग पढ़ाने वाली साउथ अफ्रीका की टीना जॉनसन को मुझे ट्रेंड करने के लिए बुलाया। उनके साथ मैंने छह हफ्ते बिताए। इसके बाद राकेश ओमप्रकाश मेहरा ने भी मुझे एक्टिंग में मदद की। इस तरह से एक्टिंग में मेरे कई टीचर हैं। जिन लोगों का नाम मैंने लिया इन सबका मेरी एक्टिंग पर प्रभाव है।

प्रश्न- आपने एक्टिंग पर प्रभाव डालने वालों में अपने पिता का नाम नहीं लिया?

उत्तर- अपनी क्रियेटिविटी और परफॉरमेंस के मामले में मैं किसी की सलाह नहीं लेता। मन की करता हूं। मैं डायरेक्टर को संतुष्ट करने की कोशिश करता हूं। उसके बाद किसी और से बात करता हूं।

हर्षवर्द्धन कपूर
प्रश्न- हिंदी फिल्मों में जब स्टार पुत्र आता है तो दर्शक बेटे में पिता की छवि ढूंढते हैं या देखना चाहते हैं। इस बारे में आप क्या कहेंगे?

उत्तर- मुझे लगता है कि जब कोई टिकट खरीद कर सिनेमाहॉल में जाता है और अगर कहानी उसे बांध लेती है तो वह बाकी सब भूल जाता है। वह 2 घंटे के लिए उन्हीं किरदारों को जीने लगता है। जब दर्शक मिर्जिया देख कर बाहर निकलेंगे तब शायद उन्हें एहसास होगा कि यह अनिल कपूर का बेटा है। आप मुझे एक फ्रेश चांस दीजिए। खुले दिमाग से मेरी फिल्म देखिए।

प्रश्न- भविष्य में किसी डारेक्टर ने आपसे 'झक्कास' बोलने को कहा तो क्या करेंगे?

उत्तर- अगर स्क्रिप्ट में फिट होता है तो मैं बोल दूंगा।

प्रश्न- आपको एक्टर बनना था तो राइटिंग की पढ़ाई क्यों की?

उत्तर- फिल्म में हर चीज राइटिंग से शुरू होती है। आप राइटर के नजरिए से सोच सकते हैं और राइटर अगर एक्टर के नजरिए से सोच सकता है तो इससे खूबसूरत जुगलबंदी कोई नहीं हो सकती और डायरेक्टर का काम है इसके नतीजे को अंतिम रूप देना है।
विज्ञापन

हर्षवर्द्धन कपूर
प्रश्न- आपकी जिस तरह से तैयारी है उससे तो आप निर्देशक के काम में काफी दखल देंगे?

उत्तर- मुझे लगता है कि दुनिया के सारे अच्छे निर्देशक क्रियेटिव आइडियाज को लेकर ओपन रहते हैं। अभी तक मेरा अनुभव अच्छा रहा है। मिर्जिया में मैंने गुलजार साहब के लिखे डायलॉग बोले हैं और राकेश ओमप्रकाश मेहरा डायरेक्टर रहे हैं। भावेश जोशी की शूटिंग कर रहा हूं तो अनुराग कश्यप के लिखे डायलॉग बोल रहा हूं और विक्रमादित्य मोटवाने डायरेक्टर हैं। किसी भी फिल्म में बेस्ट पर्सन डायरेक्टर है। आखिरकार यह उसका मीडियम है। कोई ऐक्टर सोचता है कि वह डायरेक्टर से बड़ा है तो यह अच्छी बात नहीं।

प्रश्न- आपने राइटिंग का कोर्स किया है। क्या कहा जा सकता है कि आप राइटर हैं?

उत्तर- मेरा सपना है कि अगर मेरी फिल्में थोड़ी बहुत चल गईं और मैं एक-दो साल का गैप लेने की स्थिति में आया तो उस दौरान में एक फिल्म लिखना-डायरेक्टर करना चाहूंगा। मैं शॉर्ट स्टोरीज लिखना भी चाहूंगा मगर पब्लिश कौन करेगा? वैसे फिलहाल एक्टिंग पर ही फोकस है।
और पढ़ें...
विज्ञापन
Next
AU ऐप में पढ़ें