मशहूर संगीतकार खय्याम को मंगलवार को पूरे राजकीय सम्मान के साथ सुपुर्द-ए-खाक कर दिया गया। 92 वर्षीय संगीतकार का लंबी बीमारी के बाद सोमवार को यहां के एक अस्पताल में निधन हो गया था। इससे पहले उनके पार्थिव शरीर को जुहू स्थित आवास पर उनके प्रशंसकों और दोस्तों के अंतिम दर्शन के लिए रखा गया। तिरंगे में लिपटे उनके पार्थिव शरीर को मुंबई पुलिस ने सलामी दी और चार बंगलो स्थिति कब्रिस्तान में उन्हें सुपुर्द-ए-खाक किया गया। खय्याम साहब फेफड़े की बीमारी से पीड़ित थे। परिवार के अनुसार उन्हें सांस लेने में तकलीफ होने पर पिछले हफ्ते अस्पताल में भर्ती करवाया गया था। मंगलवार को जुहू स्थित उनके घर पर कई फिल्मी सितारे श्रद्धांजलि देने पहुंचे। इन सभी ने नम आंखों से खय्याम साहब को अंतिम विदाई दी।
अंतिम संस्कार में पहुंचे सितारे
खय्याम साहब के अंतिम संस्कार में गीतकार गुलजार, जावेद अख्तर, उदित नारायण, तलत अजीज, विशाल भाद्वाज, पूनम ढिल्लों, सोनू निगम, रजा मुराद और संजय खान सहित कई सितारों ने उन्हें नम आंखों से श्रद्धांजलि दी। जावेद अख्तर ने खय्याम साहब को याद करते हुए कहा, 'खय्याम साहब संगीत के उस दौर से ताल्लुक रखते थे जहां शब्दों से लेकर हर बात का ख्याल रखा जाता था। यही वजह है कि उनकी फिल्मों के गाने 40 साल बाद भी लोगों को याद हैं, लेकिन संगीत का एक दौर उनके साथ चला गया। उनकी तबीयत ठीक नहीं थी। मैं उन्हें बचपन से जानता था, मैंने उनके साथ काफी समय गुजारा हमारी अच्छी दोस्ती थी।'
जावेद अख्तर के अलावा सोनू निगम ने भी खय्याम साहब को याद किया और कहा, 'खय्याम साहब अच्छे इंसान थे। बॉलीवुड के सभी मशहूर लोग उनके काम की तारीफ करते थे। उन्होंने अपनी संपत्ति तक ट्रस्ट को दान कर दी थी। वह पत्नी के साथ बेहद साधारण जिंदगी जीते थे।'
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40 साल काम किया और 35 फिल्मों में संगीत दिया
मोहम्मद जहूर खय्याम ने ‘कभी-कभी, हीर-रांझा और ‘उमराव जान’ जैसी कई हिट फिल्मों में संगीत दिया। खय्याम साहब 50 के दशक से ही हिंदी सिनेमा में सक्रिय थे, लेकिन साल 1961 में आई फिल्म 'शोला और शबनम' में संगीत देकर उन्हें असली पहचान मिली थी। उन्होंने फिल्म इंडस्ट्री में करीब 40 साल काम किया और 35 फिल्मों में संगीत दिया।
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