गोविंद निहलानी बॉलीवुड के प्रसिद्ध फिल्म निर्देशक, छायाकार, पटकथा लेखक और निर्माता हैं, जो हिंदी सिनेमा में अपने कामों, खासकर आर्ट सिनेमा के लिए जाने जाते हैं। गोविंद को बॉलीवुड में अपने बेहतरीन काम के लिए कई राष्ट्रीय फिल्म पुरस्कार और पांच फिल्मफेयर पुरस्कार मिल चुके हैं। आइए जानते हैं उनके बेहतरीन निर्देशन के बारे में कुछ दिलचस्प किस्से।
फिल्म आक्रोश से शुरू किया था निर्देशन
उनका पहला निर्देशन कानूनी ड्रामा आक्रोश था। इस फिल्म में ओम पुरी, नसीरुद्दीन शाह, स्मिता पाटिल और अमरीश पुरी ने मुख्य भूमिकाएं निभाई थीं। इस फिल्म की पटकथा प्रसिद्ध मराठी नाटककार विजय तेंदुलकर ने लिखी थी। इस फिल्म ने 1981 में नई दिल्ली में आयोजित भारतीय अंतर्राष्ट्रीय फिल्म समारोह में सर्वश्रेष्ठ फिल्म के लिए गोल्डन पीकॉक जीता। इसके बाद उन्होंने 1983 में एसडी पनवलकर की कहानी पर आधारित अर्ध सत्य का निर्देशन किया। इसके बाद गोविंद ने 1997 में, बंगाली उपन्यासकार महाश्वेता देवी के प्रशंसित उपन्यास 'हजार चौरासी की मां' पर फिल्म का निर्देशन किया।
गोविंद के निर्देशन में बनी बेहतरीन फिल्में
गोविन्द निहलानी को 'जुनून', 'हजार चौरासी की मां', 'तमस', 'आक्रोश', 'अर्धसत्य' 'मंथन', 'कलयुग', 'कुरुतिपुनल' और 'दृष्टि' के लिए राष्ट्रीय फिल्म पुरस्कारों से सम्मानित किया जा चुका है।
छायाकार के रूप में शुरू किया था करियर
गोविंद ने वीके मूर्ति के सहायक छायाकार के रूप में अपना करियर शुरू किया, जिसके बाद उन्होंने छायाकार के रूप में अपनी शुरुआत की। वह श्याम बेनेगल की सभी शुरुआती फिल्मों और रिचर्ड एटनबरो की ऑस्कर विजेता पीरियड बायोग्राफिकल ड्रामा गांधी (1982) की छायांकन से जुड़े रहे। गोविंद निहलानी और बेनेगल अपनी सामाजिक रूप से प्रासंगिक फिल्मों के लिए जाने जाते हैं।
राष्ट्रीय फिल्म पुरस्कार-फिल्मफेयर पुरस्कार
आक्रोश, अर्ध सत्य, दृष्टि, हजार चौरासी की मां और तमस जैसी फिल्मों के लिए गोविंद निहलानी को राष्ट्रिय फिल्म पुरस्कार से नवाजा जा चुका है। इसके अलावा गोविंद को जुनून, विजेता, आक्रोश, अर्ध सत्य और देव जैसी तमाम फिल्मों के लिए फिल्मफेयर पुरस्कार मिल चुके हैं।
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