फिल्मी दुनिया से जुड़े कर्मचारियों की यूनियन FWICE यानी फेडरेशन ऑफ वेस्टर्न इंडिया सिने एम्प्लॉई यूनियन के अध्यक्ष वीरेंद्र तिवारी की जबर्दस्त पिटाई हुई है। तिवारी के साथ ये मारपीट सिनेमा की शूटिंग में काम करने वालों की यूनियन में एनसीपी की दखलंदाजी को मंजूरी न देने के चलते हुई बताई जाती है। पुलिस ने इस मामले में अपहरण और मारपीट की रिपोर्ट दर्ज की है।
मुंबई फिल्म इंडस्ट्री में कई यूनियनों का बोलबाला है। इन सारी यूनियनों की एक फेडरेशन है जो कर्मचारी हितों को लेकर फिल्म निर्माताओं के सामने रहती है। फेडरेशन पर अक्सर फिल्म निर्माताओं को परेशान करने के आरोप लगते रहते हैं। लेकिन, फेडरेशन के सदस्यों की एकता के चलते कोई सामने नहीं आ पाता। अब, फेडरेशन का वर्चस्व धीरे-धीरे हिंदी सिनेमा में कमजोर हो रहा है। पिछले कुछ सालों में मनसे और बीजेपी ने भी अपनी यूनियनों को फिल्म इंडस्ट्री में सक्रिय कर दिया है।
दूसरे दलों को देख शरद पवार की पार्टी एनसीपी भी मुंबई फिल्म इंडस्ट्री की यूनियन में अपना दखल चाहती है। इससे इनकार करने पर ही वीरेंद्र तिवारी की पिटाई हुई। पुलिस के मुताबिक एनसीपी के कुछ नेता वीरेंद्र तिवारी के अंधेरी में कार्तिक कॉम्प्लेक्स स्थित दफ्तर पहुंचे और उन्हें बंधक बना लिया। वीरेंद्र तिवारी वहां से निकलने की कोशिश करने लगे तो उन्हें घेर कर पीट दिया गया।
पुलिस को दिए गए बयान मे वीरेंद्र ने करणराजे नामक एनसीपी नेता पर आरोप लगाया है।तिवारी के मुताबिक आरोपियों ने कॉम्प्लेक्स में खड़ी कई गाड़ियों में भी तोड़-फोड़ की। पुलिस ने इस मामले में अपहरण और जानलेवा हमले का केस दर्ज कर दिया है।