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और ये रहीं देशभक्ति पर बनीं सुपरफ्लॉप फिल्में

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बॉर्डर फिल्म को देशभक्ति की फिल्मों की एक कालजयी फिल्म माना जाता है। इस फिल्म को जेपी दत्ता ने बनाया था। इसके बाद जेपी दत्ता युद्घ और देशप्रेम पर एक और फिल्म एलओसी कारगिल लेकर आए। बड़े बजट और खूब सितारों से भरी यह फिल्म बुरी तरह से असफल रही। कारगिल के युद्घ पर बनी इस फिल्म की सबसे बड़ी कमी यह थी कि यह फिल्म लंबी बहुत थी। निर्देशक युद्घ को जज्बाती तरीके से दिखाने में भी असफल रहे थे। परिणाम यह था कि दर्शकों ने इसे बुरी तरह से खारिज कर दिया।
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एक साथ आए इतने भगत सिंह

यह 2001-02 का दौर था। उस समय भगत सिंह पर फिल्मों की मानों बाढ़ से आ गई थी। राजकुमार संतोषी की फिल्म द लीजेंड ऑफ भगत सिंह के साथ ही गुड्डू धनोआ द्वारा 23 मार्च 1931 शहीद फिल्म बनाई गई। इस फिल्म में सनी देओल ने चन्द्रशेखर आजाद और बॉबी देओल ने भगत सिंह का किरदार निभाया। फिल्म पर ऐतिहासिक तथ्यों के साथ छेड़छाड़ का आरोप लगा। फिल्म के निर्देशक ने सनी देओल की इमेज को भुनाने का प्रयास किया। उसी प्रयास में यह फिल्म अपने विषय के सा‌थ न्याय नहीं कर पाई और असफल हो गई।

चौंकाऊ था इस फिल्म का फ्लॉप होना

केतन मेहता की फिल्म मंगल पांडेय का फ्लॉप होना आमिर के साथ केतन के लिए चौंकाने वाला रहा। इस फिल्म की असफलता पर केतन का एक खीझ भरा बयान भी आया था। केतन का कहना था कि शायद दर्शक अच्छी फिल्मे देखना ही नहीं चाहते। आमिर खान ने इस फिल्म में मंगल पांडेय की भूमिका निभाई थी। 1857 की क्रांति के बैकग्राउंड पर आधारित इस फिल्म में भारत की पहली क्रांति को दिखाया गया था। फिल्म मंगल पांडेय नाम के एक सैनिक के ईस्ट इंडिया कंपनी के विद्रोह की कहानी कहती है।

खेलें हम जी जान से

यह आशुतोष गौरवीकर की फिल्म थी। फिल्म बंगाल के छोटे से कस्बे चिटागांव में एक स्कूल टीचर सूरज सेन के संघर्ष की कहानी थी। यह किरदार अभिषेक बच्चन ने निभाया था। फिल्म में सूरज अपने कुछ क्रांतिकारी साथियों के साथ आजादी जंग को यहां शुरू करने की प्लानिंग में लगा है।

यहां के युवाओं को शिकायत है कि अंग्रेजी हुकूमत ने अपनी नई छावनी बनाने के लिए उनके खेलने के मैदान पर कब्जा कर लिया है। विद्रोह की शुरुआत इसी मैदान को अंग्रेजों से खाली करवाने से शुरु होती है जो बाद में बढती ही जाती है। दीपिका पादुकोन की भी फिल्म में खास भूमिका है। दर्शक सूरज सेन के साथ खुद को कनेक्ट नहीं कर पाए और फिल्म औंधे मुंह गिरी।

जाल द ट्रैप में सनी

यह सनी देओल की एक्‍शन फिल्म थी जिसे देश प्रेम का नाम दिया गया था। कश्मीर के बैकग्राउंड पर बनी इस फिल्म में तब्बू, रीमा सेन और अनुपम खेर की भी भूमिका थी। फिल्म एक निजी लड़ाई को देश प्रेम की लड़ाई तब्दील करती हुई दिखाती है। फिल्म में एक्‍शन खूब रखा गया। गुड्डू धनोआ की इस फिल्म में भी सनी देओल की एक्‍शन इमेज को भुनाने की कोशिश की गई थी। कमजोर कथानक की वजह से फिल्म असफल रही।
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रोहित शेट्टी का प्रयोग असफल

इस फिल्म का बैकग्राउंड विमान अपहरण था। ‌विमान को अपहरण से छुड़ाने की पूरी प्रकिया को एक जंग की तरह दिखाया गया। फिल्म में अजय देवगन और अभिषेक बच्चन की मुख्य भूमिका थी। रोहित शेट्टी की इस फिल्म में अजय को एक मिलेट्री ऑफिसर के रूप में दिखाया गया। फिल्‍म में दर्शकों को इंगेज करने का पर्याप्त मसाला होने के बाद भी यह फिल्म असफल रही। फिल्म की असफलता को अभिषेक बच्चन के साथ भी जोड़कर देखा गया।
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