सेंसर बोर्ड ने 'लिप्सिटक अंडर माई बुर्का' को 'ए सर्टिफिकेट' देने से इनकार क्या किया, सेंसर बोर्ड लोगों की जुबान पर आ गया। क्या आपको पता है कि सेंसर बोर्ड का पहला 'ए सर्टिफिकेट' पाने वाली फिल्म कौन सी थी। किस फिल्म पर सेंसर को इतना एतराज था कि बच्चों के सामने लाना उसे गवारा नहीं हुआ।
दरअसल 'ए सर्टिफिकेट' पाने वाली फिल्में वो फिल्में होती है जिन्हें केवल वयस्क देख सकते हैं। ऐसी फिल्मों पर ए का ठप्पा लगाया जाता है ताकि बच्चे यानी 18 साल से कम उम्र के लोग इन्हें न देख पाएं।
हालांकि इस बात पर काफी मतभेद रहे हैं कि भारत में ए सर्टिफिकेट पाने वाली सबसे पहली फिल्म कौन सी रही है। दो फिल्मों के बारे में अक्सर बाती की जाती है, आप भी जान लीजिए
यहां 1929 में रिलीज हुई डाक्यूमेंट्री फिल्म सोशल इवेल का जिक्र करना जरूरी होगा क्योंकि सेंसर बोर्ड की सबसे पहली गाज इसी पर गिरी थी। इस डाक्यूमेंट्री फिल्म में युवाओं की सेक्स समस्याओं को सुलझाने की कोशिश की गई थी और कुछ बोल्ड और सेक्स संबंधी शब्दों का भी प्रयोग किया गया था।
चूंकि यह डाक्यूमेंट्री फिल्म थी इसलिए कुछ लोग इसे 'ए सर्टिफिकेट' पाने वाली पहली फिल्म का तमगा नहीं देते।
1970 में निर्देशक बीआर इशारा की फिल्म 'चेतना' को सही मायनों में 'ए सर्टिफिकेट' पाने वाली पहली फिल्म कहा जाता है। इस फिल्म में निर्देशक ने वेश्याओं के जीवन और उनके पुर्नवास के मुद्दे को उठाया था। कई दृश्यों पर सेंसर बोर्ड को आपत्ति थी कि बच्चों को ये नहीं देखना चाहिए।