93वें अकादमी पुरस्कार के लिए भारत की ओर से मलयालम फिल्म 'जल्लीकट्टू' (Jallikattu) को नॉमिनेट किया गया है। फिल्म निर्माता गुनीत मोंगा ने कहा कि वह फिल्म ‘जल्लीकट्टू’ से कार्यकारी निर्माता के रूप में जुड़कर सम्मानित महसूस करती हैं।
इस फिल्म का निर्देशन लिजो जोस पेलिसरी ने किया है। इस मलयालम फिल्म में ऐसे पुरुषों की कहानी है जो एक बैल को रोकने लिए साथ आते हैं जो उनके गांव में तबाही मचा रहा होता है।
मोंगा ‘गैंग्स ऑफ वासेपुर’, ‘मसान’ और ‘द लंचबॉक्स’ जैसी फिल्मों के निर्माण से जुड़ने के लिए जानी जाती हैं। उन्होंने सोशल मीडिया पर इस खबर को साझा करते हुए कहा कि वह इस फिल्म की आगे की यात्रा से जुड़ने के लिए बेहद उत्साहित हैं।
फिल्म निर्माता ने निर्देशक लिजो की प्रशंसा करते हुए कहा कि इस फिल्म ने उन्हें अचंभित किया और वह इसकी ऑस्कर यात्रा में जुड़कर खुद को सम्मानित महसूस करती हैं। पिछले साल ‘पीरियड. एंड ऑफ सेंटेंस’ ने ऑस्कर समारोह में डॉक्यूमेंट्री शॉर्ट सब्जेक्ट श्रेणी में पुरस्कार जीता था। यह डॉक्यूमेंट्री माहवारी और सेनिटरी नैपकिन के विषय पर थी और इसका सह निर्माण भी मोंगा ने किया था।
दक्षिण भारत में ‘जल्लीकट्टू’ बैलों को काबू में करने वाला प्रसिद्ध व विवादास्पद खेल है और इस फिल्म का नाम भी यहीं से लिया गया है। ‘जल्लीकट्टू’ एक ड्रामा थ्रिलर है और देश और दुनिया में इस फिल्म की खूब तारीफ हुई है। 63 वें बीएफआई लंदन फिल्म फेस्टिवल में 78 देशों से 229 फिल्मों को शामिल किया गया था। इसी फेस्टिवल में ‘जल्लीकट्टू’ की भी स्क्रीनिंग हुई थी।
ये फिल्म एस हरीश और आर जयकुमार की किताब माओइिस्ट पर आधारित है। ये फिल्म इंसान और जानवरों के बीच इमोशन को बखूबी दिखाती है। लिजो जोस पेल्लीसेरी ने फिल्म का निर्देशन किया है। फिल्म को प्रोड्यूस किया है ओ थॉमस पेनिकर(O. Thomas Panicker) ने।
ये है फिल्म की कहानी
वार्के और एंटनी नाम के शख्स कसाई खाना चलाते है। जहां पर भैंसों को मारकर बेचा जाता है। एक रात एक भैंस वहां से गायब हो जाती है और गांव में घुसकर हुडदंग मचाने लगती है। गांववाले स्थिति को काबू में करने के लिए एक्स स्टाफ मेंबर की मदद मांगते हैं। ये सदस्य एक शिकार करने वाली बंदूक के साथ गांव में पहुंचता है जो एंटनी को बिल्कुल पसंद नहीं आता है। आगे की कहानी के लिए आपको फिल्म देखनी पड़ेगी।