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Movie Review: पाकिस्तान में आलिया भट्ट की जासूसी और देशभक्ति फिल्म देखने को कर देगी 'राजी'

Fri, 11 May 2018 12:04 PM IST
रवि बुले
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-निर्माताः जंगली पिक्चर्स/धर्मा प्रोडक्शंस
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-निर्देशकः मेघना गुलजार
-सितारेः आलिया भट्ट, विक्की कौशल, रजित कपूर, सोनी राजदान 
रेटिंग ***1/2


वतन के आगे कुछ नहीं, खुद भी नहीं। यह संवाद भले ही साफ बताता हो कि राजी देशभक्ति की कहानी है लेकिन बात इससे आगे जाती है। सीमा पर लगातार चलने मगर न दिखने वाले युद्ध में गुमनाम/बिना पहचान के शहीद हो जाने वालों के लिए क्या देश दो बूंद आंसू भी बहता है? राजी 1971 के जंगी दौर में पाकिस्तान में भारत की जासूसी की कहानी है। पूर्वी और पश्चिमी पाकिस्तान के अंदरूनी तनाव/गृहयुद्ध के हालात में भारतीय सेना के लिए कॉलेज में पढ़ने वाली एक कश्मीरी लड़की, सहमत (आलिया भट्ट) को गुपचुप जासूस बना कर भेजा जाता है।
 

उसकी शादी पाकिस्तानी सेना में अहम पदों पर काम करने वाले पिता और दो पुत्रों के परिवार में होती है। इस परिवार से सहमत के पिता के पुराने रिश्ते हैं। देशभक्ति परिवार के खून में है और सहमत इस परंपरा को आगे बढ़ाती है। शादी के बाद तमाम अन्य खबरों समेत वह पाकिस्तान द्वारा हिंद महासागर में तैनात भारतीय युद्धपोत आईएनएस विक्रांत को नष्ट करने की योजना की खबर खुफिया ढंग से भेजती है लेकिन मुश्किल में फंस जाती है। क्या होगा सहमत का...?

फिल्म हरिंदर सिक्का के अंग्रेजी उपन्यास कॉलिंग सहमत पर आधारित है। सिक्का के मुताबिक उन्होंने यह कहानी पाकिस्तान में एक भारतीय महिला जासूस के जीवन से प्रेरित होकर लिखी और इसमें दर्ज घटनाएं सच्ची हैं। भवानी अय्यर और मेघना गुलजार ने स्क्रिप्ट लिखी है। इसमें कसावट है लेकिन फिल्म को आकर्षक बनाता है आलिया भट्ट का अभिनय। आलिया फिल्म को अपने कंधों पर लेकर बढ़ती हैं और उनकी उपस्थिति हर दृश्य को देखने योग्य बनाती है। बेटी-बहू-पत्नी की भूमिका से लेकर जासूस का रोल भी वह खूबसूरत ढंग से निभा ले जाती हैं।

इसे आलिया के अब तक के करिअर का सबसे अच्छा परफॉरमेंस कहा जा सकता है। उन्होंने फिर बताया है कि वह लंबी रेस के ट्रेक पर हैं। विक्की कौशल ने भी सहमत के पति के रूप में सफल भूमिका निभाई। राजी एक बार फिर बदलते हुए सिनेमा पर मुहर लगाती है कि हीरोगिरी सिर्फ हीरो के बपौती नहीं। देश के लिए खुफियागिरी करती सहमत दिल में घर करती जाती है। लंबे समय बाद देश प्रेम का गीत किसी फिल्म में आया है जो संवेदनाएं जगाता हैः ऐ वतन आबाद रहे तू/मैं जहां रहूं जहां में याद रहे तू।
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इसे गुलजार ने लिखा है। शंकर-एहसान-लॉय का संगीत है। इन जज्बाती बातों के बीच फिल्म युद्ध के हालात और रणनीतियों पर भी सवाल खड़े करती है कि आखिर यह क्यों और किसके लिए? राजी का संदेश है कि युद्ध उन्माद है। इसमें अंततः इंसानियत का खून होता है। रिश्ते कत्ल होते हैं। दिल में कभी न भरने वाले जख्म देकर जाता है युद्ध। देश प्रेम की लहर वाले इस दौर में कश्मीर और पाकिस्तान की पृष्ठभूमि वाली राजी में थ्रिलर जैसा रोमांच है। आप सीट से चिपके रह सकते हैं।
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