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ये थे बॉलीवुड के पहले तीन खान, पांच दशकों तक किया सिनेमा पर राज

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फिरोज खान का परिवार - फोटो : Social media

बॉलीवुड में अगर हम खान की बात करें तो आपका सीधा ध्यान शाहरुख, सलमान और आमिर खान पर जाएगा। इसके अलावा सैफ अली खान को भी लोग इसमें शुमार करते हैं। लेकिन क्या आप जानते हैं इनसे पहले भी तीन खान थे जिन्होंने अपने समय में इंडस्ट्री पर राज किया? इतना ही नहीं दर्शकों के दिल और दिमाग में अपनी अमिट छवि भी छोड़ी। तो आज आपको इन्हीं से रुबरू करवाएंगे।

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संजय खान, अकबर खान, फिरोज खान - फोटो : Social media
जिन तीन खान की हम बात कर रहे हैं आपमें से कई लोगों ने इनकी फिल्में भी देखी होंगी। ये कोई और नहीं बल्कि संजय खान, फिरोज खान और अकबर खान थे। इन्हें बॉलीवुड के पहले खान ब्रदर्स के तौर पर जाना जाता है। ये कुल मिलाकर सात भाई- बहन थे। इनमें फिरोज खान सबसे बड़े भाई थे, जिन्होंने 5 दशकों तक अपने अभिनय का लोहा मनवाया।
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सादिक अली खान, फातिमा बेगम - फोटो : Social media
फिरोज का जन्म 25 सितंबर 1939 को बैंगलोर में हुआ था। अपने भाई-बहनों संजय खान, समीर खान, शाहरुख अली खान, अकबर खान, दिलशाद बीबी और खुर्शीद शहनावर में फिरोज सबसे बड़े थे। संजय का जन्म भी बैंगलोर में 3 जनवरी 1941 को हुआ था। अकबर खान 7 जुलाई 1949 में पैदा हुए थे। उनके पिता सादिक अली खान काफी सम्पन्न थे। पिता पठान थे जबकि मां ईरानी। मां फातिमा बेगम बच्चों को खूब लाड़ प्यार से पालती थीं। कुल मिलाकर सातों भाई-बहन के बचपन के दिन बड़े खुशगवार गुजरे। लेकिन एक दिन अचानक उनके पिता सादिक अली चल बसे।

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फिरोज खान - फोटो : Social media
घर का सबसे बड़ा बेटा होने की वजह से परिवार चलाने की सारी जिम्मेदारी फिरोज के कंधों पर आ पड़ी। वे पढ़ाई छोड़कर काम की तलाश में निकल पड़े। छोटे-मोेटे काम करने के बाद उन्होंने किसी की सलाह पर फिल्मों में किस्मत आजमाने की सोची। शुरुआत में बी ग्रेड फिल्मों के लिए भी हामी भरनी पड़ी। लेकिन वक्त के साथ उनकी किस्मत पलटी।
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फिरोज खान - फोटो : Social media

फिरोज खान ने फिल्मों में लंबी पारी खेली। वे अपनी खास शैली, अलग अंदाज और किरदारों के लिए जाने जाते रहे। वो हैंडसम हीरो तो कभी खूंखार विलेन के रोल में अपने अभिनय का लोहा मनवाते रहे। दोनों ही चरित्रों में फिरोज खान जान डाल देते थे।

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फिरोज खान - फोटो : Social media
फिरोज खान ने वर्ष 1960 में फिल्म ‘दीदी’ से अपना सफर शुरू किया था। उन्होंने दर्जनों फिल्मों में काम किया और कई फिल्में निर्देशित कीं। लगभग पांच दशक का फिल्मी सफर तय करते हुए फिरोज खान ने 2007 में आखिरी मूवी ‘वेलकम’ बनाई थी। इसमें भी उनके अविस्मरणीय अभिनय ने लोगों का दिल जीत लिया था। 'अभी हम जिंदा हैं' के डायलॉग के साथ ‘आरडीएक्स’ उपनाम खासा चर्चित रहा था। फिल्म में नाना पाटेकर, अक्षय कुमार, अनिल कपूर, कैटरीना कैफ और अन्य सितारे नजर आए थे।
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फिरोज खान - फोटो : Social media
फिरोज की जानदार भूमिकाओं के लिए उन्हें कई अवार्ड भी मिल चुके थे।’इंसान’ के लिए फिल्म फेयर अवार्ड मिला था। फिरोज खान को ऊंचे लोग, मैं वोही हूं, अपराध, उपासना, मेला, आग जैसी फिल्मों से पहचान मिली। वहीं धर्मात्मा, जांबाज, कुर्बानी, दयावान जैसी फिल्मों ने उन्हें शोहरत दिलाई. अंत में उन्हें कैंसर जैसी घातक बीमारी ने जकड़ लिया था, जिसके बाद कैंसर से जूझ रहे फिरोज ने बंगलौर के अपने फार्म हाउस में 27 मई 2009 की रात आखिरी सांस ली और दुनिया को अलविदा कह गए।

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संजय खान - फोटो : Social media
जब फिरोज मुंबई में संघर्ष कर रहे थे तब उनकी इच्छा थी कि वे परिवार को बुलाकर रखें। इसलिए उन्होंने एक घर लिया था। यहीं से उनके छोटे भाई संजय खान जिनका असली नाम शाह अब्बास खान था को भी सिनेमा में जाने की चाहत जगी। सिर्फ 12 साल की उम्र में संजय ने राजकपूर की फिल्म ‘आवारा’ देखकर अभिनेता बनने का निश्चय कर लिया था। मगर भाई फिरोज नहीं मानें और पढ़ाई के लिए कड़ाई की।

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संजय खान - फोटो : Social media
शिक्षा पूरी करने के बाद जब वे मुंबई लौटे तो हॉलीवुड फिल्म निर्देशक जॉन गुलिअरमैन के सहायक के तौर पर काम करने का मौका मिला। गुलिअरमैन ‘टार्जन गोज टू इंडिया’ को डायरेक्ट कर रहे थे। उसी साल 1964 में चेतन आनंद ने भारत की युद्ध आधारित पहली फिल्म ‘हकीकत’ में कास्ट कर लिया था। इसके बाद जल्दी ही उन्हें राजश्री प्रोडक्शन की ‘दोस्ती’ के लिए साइन कर लिया गया जो सुपरहिट साबित हुई। इसके लिए उन्हें सर्वश्रेष्ठ फीचर फिल्म का राष्ट्रीय पुरस्कार भी मिला था।

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संजय खान - फोटो : Social media
60-70 के दशक में संजय खान काफी सक्रिय रहे थे। उन्होंने ’दस लाख’ और ‘एक फूल दो माली’ जैसी पारिवारिक ड्रामा फिल्में दीं तो दूसरी तरफ ‘इंतकाम’ और ‘शर्त’ के जरिए लोगों का थ्रिल से परिचय करवाया। 1977 में उन्होंने ‘सोना-चांदी’ बनाई उसके बाद ‘अबदुल्ला’। लेकिन ये बॉक्स ऑफिस पर जादू नहीं दिखा सकीं।

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संजय खान का 'द स्वॉर्ड ऑफ टीपू सुल्तान' - फोटो : Social media
इसके बाद वह फिल्मों से दूर हो गए और ऐतिहासिक पृष्ठभूमि वाले टीवी धारावाहिकों की तरफ रुख किया। फिर तो उन्होंने ऐसे चमत्कारी धारावाहिक बना डाले जिनको वर्षों-वर्षों तक याद रखा गया। ‘द स्वॉर्ड ऑफ टीपू सुल्तान’ इनमें से एक है। इसके बाद उन्होंने ‘द ग्रेट मराठा, ‘जय हनुमान’ और ‘1857 क्रांति’ भी पर्दे पर उतार दिया।

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अकबर खान - फोटो : Social media
फिरोज और संजय के छोटे भाई अकबर खान ने भी सिनेमा के क्षेत्र में यादगार काम किया। उन्होंने अभिनेता, स्क्रीन राइटर, निर्माता और निर्देशक के तौर पर अपनी हाजिरी दर्ज करवाई। कहते हैं अकबर खान बेहतरीन आवाज के धनी थे। उन्होंने अपने करियर की शुरुआत कुछ फिल्म निर्माताओं के सहायक निर्देशक के रूप में की थी। इसके बाद ‘अंजान राहें’ से अपना एक्टिंग डेब्यू किया था। यह मूवी 1974 में आई थी, जिसमें उनके बड़े भाई फिरोज ही मुख्य भूमिका में थे।

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अकबर खान - फोटो : Social media
1972 में वे अपने भाई फिरोज की अपराध फिल्म में सहायक निर्देशक भी थे। एक दो फिल्मों में अभिनय करने के बाद अकबर ने निर्माता-निर्देशक की राह पर चल पड़े और 1983 में ‘हादसा’ बनाई जिसमें खुद प्रमुख भूमिका में नजर आए। उन्होंने अपने भाई संजय खान के निर्देशन में बनी फिल्म ‘काला धन गोरे लोग (1986)’ में भी अभिनय किया था।

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अकबर खान - फोटो : Social media
1988 में ‘आकर्षक’ फिल्म में अभिनय करने के बाद उन्होंने टीवी का रुख किया। अपने भाई संजय खान के टीवी सीरियल ‘द स्वॉर्ड ऑफ टीपू सुल्तान’ के पहले 20 एपिसोड का निर्देशन किया। टीवी धारावाहिक ‘अकबर द ग्रेट’ उन्होंने निर्देशक-निर्माता और अभिनेता की भूमिका निभाई। साल 2005 में अकबर ने ‘ताजमहल: एन इटरनल लव स्टोरी’ का निर्माण और निर्देशन किया। इसमें पाकिस्तानी दिग्गज अभिनेत्री और गायिका नूरजहां की पोती सोन्या जहां को भी फिल्म में लॉन्च किया। उन्होंने कबीर बेदी, जुल्फी सैयद, अरबाज खान और पूजा बत्रा को भी कास्ट किया था। यह उस समय भारत में बनी सबसे महंगी फिल्म थी, जिसका बजट 60 करोड़ रुपये था।

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भाई बहन संग अकबर खान - फोटो : Social media
यह पाकिस्तानी सिनेमाघरों में रिलीज होने वाली पहली भारतीय फिल्म भी थी, क्योंकि 1965 के भारत-पाक युद्ध के बाद से भारतीय फिल्मों पर पाकिस्तान में प्रतिबंध लगा दिया गया था। लगभग सभी अंतर्राष्ट्रीय फिल्म समारोहों में फिल्म को काफी सराहा गया। इस तरह अकबर ने फिल्म इंडस्ट्री में लंबा वक्त गुजारा लेकिन अब बिजनेस की तरफ रुख कर लिया। उन्हें शिकायत रही कि उन्होंने फिल्म जगत को काफी कुछ दिया लेकिन उन्हें उस तरह की याद नहीं रखा गया जैसे उनके भाइयों को। शायद इसकी वजह अपने ही भाइयों की कड़ी प्रतिभागिता थी।
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खान फैमिली - फोटो : Social media

बता दें कि फिरोज खान के बेटे फरदीन खान हैं जो कई फिल्मों में नजर आ चुके हैं लेकिन फिलहाल उन्होंने अभिनय की दुनिया से दूरी बना ली है। वहीं सुजैन खान और जायद खान छोटे भाई संजय खान के बच्चे हैं। सुजैन खान ऋतिक रौशन की पत्नी और राकेश रौशन की बहू रह चुकी हैं। बाद में दोनों का तलाक हो गया। वहीं जायद ‘मैं हूं ना’ और ‘दस’ जैसी फिल्मों में दिख चुके हैं।

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