हिंदू रीति-रिवाज से अंतिम संस्कार क्यों किया गया?
फराह खान ने बताया कि उनकी मां जरीन खान की आखिरी इच्छा थी कि उनका अंतिम संस्कार हिंदू रीति-रिवाज से किया जाए। जरीन खान का जन्म एक पारसी परिवार में हुआ था और उन्होंने मुस्लिम अभिनेता संजय खान से शादी की थी।
जरीन खान चाहती थीं कि मरने के बाद उनकी अस्थियों को कश्मीर के बहते पानी में विसर्जित किया जाए। इसी वजह से परिवार ने उनकी इच्छा का सम्मान करते हुए हिंदू रीति-रिवाजों से उनका अंतिम संस्कार किया।
सोशल मीडिया पर मिली नफरत और ट्रोलिंग
फराह ने दुख जताते हुए कहा कि मां के अंतिम संस्कार के बाद सोशल मीडिया पर हिंदू और मुस्लिम दोनों ही समुदायों के कुछ लोगों ने उन पर आपत्तिजनक टिप्पणियां की थीं। मुस्लिमों का कहना था, 'वह मुस्लिम थीं, तो आपने उनका अंतिम संस्कार क्यों किया?'। वहीं हिंदुओं का कहना था, 'वह मुस्लिम थीं, तो आप उनका अंतिम संस्कार कैसे कर सकते हैं?'
फराह ने आगे कहा, 'यह बहुत दुखद है कि आज लोग निधन के समय भी धर्म के नाम पर एक-दूसरे के इतने खिलाफ हैं। हमारे परिवार में हमेशा सभी धर्मों का सम्मान करना सिखाया गया है। हालांकि, मैंने इन ट्रोलर्स को पूरी तरह नजरअंदाज कर दिया क्योंकि हमारे पास जिंदगी में सीमित समय है और इसे अपनों के साथ बिताना चाहिए।'
एक सच्ची 'अंतरधार्मिक' विदाई
अपनी मां की धर्मनिरपेक्ष सोच को याद करते हुए फराह ने बताया कि जरीन खान की प्रार्थना सभा में पारसी, हिंदू, मुस्लिम, ईसाई और सिख धर्मों के पांच पुजारियों ने मिलकर प्रार्थना की थी। इस प्रार्थना सभा में लगभग 2,000 लोग शामिल हुए थे।
जरीन खान एक जानी-मानी अभिनेत्री थीं। वह अभिनेता संजय खान की पत्नी और ऋतिक रोशन की पूर्व पत्नी सुजैन खान की मां थीं। पिछले साल नवंबर में 81 वर्ष की आयु में बढ़ती उम्र की बीमारियों के कारण मुंबई में उनका निधन हो गया था।
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