कम लोगों को ही याद होगा कि जी समूह ने ही देश का पहला वीडियो एप डिट्टो टीवी लांच किया था, लेकिन कुछ समय से पहले आ जाने की वजह से और कुछ तब इंटरनेट डाटा इतना सस्ता न होने की वजह से ये मात खा गया। जी के ही दूसरे वीडियो ओटीटी एप जी5 ने इन दिनों दर्शक बटोरने की पूरी रणनीति बना रखी है। उरी द सर्जिकल स्ट्राइक और सिंबा जैसी फिल्में अपने प्लेटफॉर्म पर रिलीज करके जी5 ने प्राइम वीडियो और नेटफ्लिक्स को अच्छी चुनौती दी है।
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ओटीटी पर दूसरी बड़ी चुनौती है कम अवधि के अच्छे कंटेंट की। जी5 ओरिजनल अलग-अलग तरह की छोटी फिल्मों के जरिए अब इस कसौटी पर भी खरा उतरने की कोशिश में है और इन्हीं प्रयासों की नई कड़ी है सोमवार को रिलीज हुई शॉर्ट फिल्म फटाफट। तमाम फ्लॉप फिल्मों से जूझने के बाद दिव्येंदु ने वेब सीरीज मिर्जापुर से अपनी साख दोबारा बनाई है। फटाफट में भी वह खुद को एक अच्छा अभिनेता साबित करने की कोशिश करते दिखते हैं।
कॉल सेंटर में ग्राहकों की गालियां खा-खाकर परेशान कुमार विश्वास नाम का मिडिल क्लास मैन कुछ पाना चाहता है। रास्ते में बस में उसे मिल जाता है सब्र की गोलियां बेचने वाला सेल्समैन। कुमार उसके पीछे-पीछे ढाबे तक पहुंचता है और 250 रुपये प्रति गोली की दर से इसे खरीद भी लेता है। इसके बाद जो होता है वही कहानी का असली ट्विस्ट है।
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पारिजात जोशी ने दिव्येंदु को पहली बार ऐसे खाके में पेश किया है जहां वह किसी पुराने किरदार का बोझ लिए नहीं दिखते। उनकी अदाकारी में दम खम है बस उन्हें 21 तोपों की सलामी जैसी फिल्मों में हीरो बनने की बजाय अच्छी कहानी में ऐसे दमदार किरदार ही करते रहने चाहिए। फिल्म देखने लायक बन पड़ी है।