दरअसल, दीया मिर्जा ने दिवाली से पहले एक वीडियो के जरिए लोगों से अपील की थी कि वे सार्वजनिक सड़कों पर पटाखे न जलाएं। इस वीडियो को बीएमसी ने अपने जागरूकता अभियान के लिए बनवाया था। हालांकि, बाद में इसे हटा दीया गया, जिसके बाद विवाद शुरू हो गया।
आदित्य ठाकरे ने बीजेपी नेता पर साधा निशाना
शिवसेना (यूबीटी) के विधायक आदित्य ठाकरे ने बॉम्बे हाईकोर्ट के फैसले का स्वागत करते हुए बीजेपी नेता पर निशाना साधा। उन्होंने कहा कि शहर की नागरिक समस्याओं पर ध्यान देने के बजाय बीजेपी नेता अमीत साटम का पूरा ध्यान हिंदू-मुस्लिम मुद्दों और जातिगत भेदभाव पर रहता है।
उन्होंने कहा, 'आज चाहे दीया मिर्जा हों, अजिंक्य रहाणे हों या माधुरी दीक्षित, बीएमसी ने खुद इन लोगों को वीडियो बनाने के लिए पत्र लिखा था। अब बीएमसी की मेयर ऋतु तावड़े खुद कह रही हैं कि उन्हें इस बारे में जानकारी नहीं थी। ऐसे में सरकार कैसे चला रहे हैं?'
वारिस पठान ने भी कोर्ट के फैसले को सराहा
AIMIM के राष्ट्रीय प्रवक्ता वारिस पठान ने भी हाईकोर्ट के फैसले की तारीफ की। उन्होंने कहा कि कोर्ट ने बीएमसी को सही जवाब दीया है। कोर्ट ने साफ कहा कि यह कोई सांप्रदायिक मुद्दा नहीं है, फिर इस पर ऐसे बयान क्यों दिए जा रहे हैं?
वारिस पठान ने आरोप लगाया कि मुंबई बीजेपी अध्यक्ष अमीत साटम ने अपने ट्वीट के जरिए खास तौर पर दीया मिर्जा को उनके सरनेम की वजह से निशाना बनाया। उन्होंने कहा कि माधुरी दीक्षित और अजिंक्य रहाणे के वीडियो नहीं हटाए गए थे।
किशोरी पेडणेकर ने मेयर के बयान पर उठाए सवाल
शिवसेना (यूबीटी) की नेता और मुंबई की पूर्व मेयर किशोरी पेडणेकर ने भी इस मामले पर रिएक्शन दीया। उन्होंने कहा कि मेयर की कुर्सी पर बैठने वाले व्यक्ति को सभी समुदायों का प्रतिनिधित्व करना चाहिए। उसे किसी एक जाति, समूह या धर्म की बात नहीं करनी चाहिए।
उन्होंने IANS से बातचीत में कहा, 'पिछले दो-तीन दिनों से दीया मिर्जा को लेकर चर्चा हो रही है। उन्होंने देश का नाम रोशन किया है, कई सम्मान हासिल किए हैं और संयुक्त राष्ट्र पर्यावरण कार्यक्रम (UNEP) की गुडविल एंबेसडर भी रह चुकी हैं। वह यहां किसी फायदे के लिए नहीं आई थीं और न ही उन्हें इससे कोई आर्थिक लाभ मिलने वाला था। नगर निगम ने खुद उन्हें आमंत्रित किया था। उनके 'मिर्जा' सरनेम की वजह से उनका अपमान किया गया, जो बेहद गलत है।'
किशोरी पेडणेकर ने बीएमसी की मेयर के बयान की भी आलोचना की। उन्होंने कहा कि मेयर को किसी को ब्लैकलिस्ट करने की बात कहने का अधिकार नहीं है। दिवाली जैसे बड़े त्योहार से पहले इस तरह के बयान देना ठीक नहीं है। उन्होंने कहा कि दिवाली सभी समुदायों के लोग मनाते हैं और भारत एक धर्मनिरपेक्ष देश है। किसी कलाकार के लिए इस तरह की बातें करना स्वीकार नहीं किया जा सकता।
कांग्रेस और एनसीपी ने भी उठाए सवाल
कांग्रेस के विधान परिषद सदस्य भाई जगताप ने भी बीजेपी पर निशाना साधा। उन्होंने कहा कि इस तरह की छोटी और गंदी राजनीति सिर्फ बीजेपी ही कर सकती है। साथ ही उन्होंने हाईकोर्ट का शुक्रिया अदा करते हुए कहा कि कोर्ट ने साफ कर दीया है कि देश के संविधान में इस तरह के भेदभाव की कोई जगह नहीं है।
वहीं, एनसीपी (शरदचंद्र पवार) के नेता फहाद अहमद ने मुंबई की मेयर ऋतु तावड़े को एक सशक्त महिला बताया, लेकिन आरोप लगाया कि बीएमसी को असल में मुंबई बीजेपी अध्यक्ष अमीत साटम चला रहे हैं। उन्होंने यह भी कहा कि अमीत साटम ने दिवाली और ईद जैसे त्योहारों की मूल भावना को खत्म कर दीया है।