करीब 4 घंटे की फिल्म और देरी का डबल झटका
जयपुर के एक थिएटर मालिक ने नाम जाहिर न करने की शर्त पर बात करते हुए स्थिति को गंभीर बताया। उन्होंने कहा, ‘फिल्म पहले ही करीब चार घंटे लंबी है, हमने उसी हिसाब से पूरा शेड्यूल प्लान किया था। लेकिन जब पहला शो ही समय पर शुरू नहीं हुआ, तो पूरा दिन बिगड़ गया।
एक शो लेट होता है तो उसका असर हर अगले शो पर पड़ता है। ऑडियंस लगातार रिफंड मांगने लगी और हमें पैसे वापस करने पड़े। सबसे बड़ी समस्या यह है कि पब्लिक थिएटर को ही जिम्मेदार मानती है, जबकि असली दिक्कत कंटेंट डिलीवरी में होती है।
हमने अपनी तरफ से हर तैयारी की थी, लेकिन जब फिल्म ही समय पर नहीं पहुंचे तो हम क्या कर सकते हैं? कहीं न कहीं इस पूरे सिस्टम को अब गंभीरता से देखने की जरूरत है, क्योंकि बार-बार ऐसी घटनाएं थिएटर कारोबार को सीधे प्रभावित करती हैं।’
बिहार में देरी हुई, लेकिन हालात संभले: थिएटर मालिक विशेक चौहान
बिहार के थिएटर मालिक और एग्जिबिटर विशेक चौहान ने अपने अनुभव को विस्तार से बताते हुए कहा, ‘लोग पूछ रहे थे कि क्या हुआ, शो कैंसिल हो रहे हैं क्या? ऐसी बातें चल रही थीं क्योंकि कई जगहों से खबर आ रही थी कि फिल्म समय पर नहीं पहुंच रही।
साउथ में तो कई शो कैंसिल भी हो गए थे, इसलिए यहां भी दर्शकों में चिंता थी। हमारे यहां ऐसा नहीं हुआ, लेकिन शुरुआत में करीब 40 मिनट की देरी जरूर हुई। ये देरी मुख्य रूप से केडीएम (KDM) आने और प्रोसेसिंग में टाइम लगने की वजह से हुई।
सेंसर क्लियरेंस भी इनको थोड़ा लेट मिला, जिसकी वजह से कंटेंट प्रोवाइडर्स जैसे यूएफओ और क्यूब को फिल्म देर से मिली। जब उन्हें कंटेंट देर से मिला, तो डाउनलोड प्रोसेस में भी समय लगा। हमारे यहां तो हम लोग फिल्म डाउनलोड कर पाए और बाद में शो शुरू कर दिए, लेकिन जहां डाउनलोड समय पर नहीं हो पाया, वहां ज्यादा दिक्कत हुई।
हमारे थिएटर में फिल्म आखिरकार चल गई और अभी रिस्पॉन्स भी अच्छा मिल रहा है। ऐसी तकनीकी देरी कभी-कभी हो जाती है, लेकिन इतनी बड़ी फिल्म के पेड प्रीव्यू में लोग उम्मीद करते हैं कि सब कुछ समय पर और बिना रुकावट के हो। हां, इस बात से इंकार भी नहीं किया जा सकता कि परेशानी तो हुई है।’