प्रोड्यूसर्स गिल्ड ऑफ इंडिया ने सिने एंड टीवी आर्टिस्ट एसोसिएशन, सिनटा और एफडब्ल्यूआईसीई
- फोटो : सोशल मीडिया
इम्पा ने सोमवार की सुबह सारे निर्माता संगठनों और फिल्म निर्माण में लगी यूनियनों को जो सर्कुलर भेजा है, दरअसल वह फेडरेशन को लिखे एक लंबे पत्र की कॉपी है। इस पत्र में इम्पा ने फेडरेशन से सीधा मोर्चा खोल दिया है। इम्पा ने कहा है कि फेडरेशन का खुद को फिल्म कारीगरों की एकमात्र प्रतिनिधि संस्था होने का दावा करना भ्रामक और असत्य है। पत्र में ये भी कहा गया है कि फेडरेशन का लाखों कामगारों की नुमाइंदगी करने का दावा भी गलत निकला है।
उल्लेखनीय है कि भारतीय प्रतिस्पर्धा आयोग यानी कंपटीशन कमीशन ऑफ इंडिया ने 26 मई को एक आदेश पारित किया है। इस आदेश की कापी की प्रति सीसीआई में अपील करने वाली कंपनी कोंटिलो पिक्टर्स को एक जून को भेजी गई है। इस पत्र में साफ लिखा है कि फेडरेशन अब किसी भी फिल्म या धारावाहिक निर्माता को अपनी सदस्य यूनियनों के सदस्य के साथ ही काम करने के लिए बाध्य नहीं कर सकती। और, न ही वह अपनी सदस्य यूनियनों को किसी निर्माता की शूटिंग का बहिष्कार करने का निर्देश दे सकती है। सीसीआई ने फेडरेशन को निर्माताओं पर जुर्माना लगाने की आदतों से भी बाज आने को कहा है।
अपने इस आदेश में कंपटीशन कमीशन ने ये जिक्र किया कि फेडरेशन ने उनके पिछले आदेश को न मानकर आयोग की अवहेलना की है। इस पर फेडरेशन के वकील ने आयोग के समक्ष माफी मांगते हुए अपने निर्देश वापस लेने का वायदा आयोग के सामने किया। आयोग ने फेडरेशन को निर्देश दिया है कि वह उसके आदेश के अनुपालन को लेकर 10 दिन के भीतर एक हलफनामा भी उसके सामने दाखिल करे।