क्या है 'सहयोग' का उद्देश्य?
सरकार के अनुसार, 'सहयोग' को IT एक्ट, 2000 के तहत उचित सरकार या उसकी एजेंसी द्वारा इंटरमीडियरीज को नोटिस भेजने की प्रक्रिया को ऑटोमेट करने के लिए विकसित किया गया था, ताकि किसी भी गैर-कानूनी काम को करने के लिए इस्तेमाल की जा रही किसी भी जानकारी, डेटा या कम्युनिकेशन लिंक को हटाने या उस तक पहुंच को डिसेबल करने में आसानी हो। इस पोर्टल का मकसद सभी अधिकृत एजेंसियों और बिचौलियों को एक प्लेटफॉर्म पर लाना है, ताकि गैर-कानूनी ऑनलाइन जानकारी के खिलाफ तुरंत कार्रवाई की जा सके।
कुणाल कामरा ने जताई ये आपत्ति
एडवोकेट मीनाज काकलिया के जरिए दायर याचिका में कहा गया है, 'आईटी नियमों का नियम 3(1)(d) और सहयोग पोर्टल भी पहली नजर में असंवैधानिक हैं, क्योंकि वे पूरी तरह से अस्पष्ट आधारों पर इंटरनेट प्लेटफॉर्म पर जानकारी को ब्लॉक करने या हटाने की अनुमति देते हैं'। याचिका में कहा गया है कि ये नए तरीके इंटरनेट पर सभी जानकारी को मनमाने ढंग से हटाए जाने के प्रति संवेदनशील बनाते हैं और ऐसे किसी भी कार्रवाई के खिलाफ कोई उपाय नहीं देते हैंट। कुणाल कामरा का कहना है कि यह प्रभावी रूप से केंद्र और राज्यों में हजारों सरकारी अधिकारियों को ऐसी पावर देता है, जिस पर कोई रोक नहीं है। इस याचिका पर आने वाले दिनों में सुनवाई होने की संभावना है।
विवादित टिप्पणी मामले में क्या बोले कामरा?
स्टैंड-अप कॉमेडियन कुणाल कामरा ने शुक्रवार को महाराष्ट्र विधान परिषद की विशेषाधिकार समिति से डिप्टी सीएम एकनाथ शिंदे के खिलाफ कथित टिप्पणियों के मामले में सुनवाई टालने की मांग करने से इनकार किया। उन्होंने कहा कि पैनल ने खुद ही 5 फरवरी की सुनवाई टाल दी थी। समिति ने शिंदे के खिलाफ कथित अपमानजनक टिप्पणियों के मामले में कामरा और शिवसेना (UBT) नेता सुषमा अंधारे को सुनवाई के लिए बुलाया था। समिति के अध्यक्ष और बीजेपी MLC प्रसाद लाड ने पहले कहा था कि कामरा और अंधारे को शुरू में 5 फरवरी को दोपहर 2 बजे पैनल के सामने पेश होने के लिए कहा गया था, लेकिन दोनों ने आने में असमर्थता जताई, जिसके बाद सुनवाई 17 फरवरी के लिए रीशेड्यूल की गई। एक्स पर एक लंबी पोस्ट साझा कर कामरा ने उन मीडिया रिपोर्ट्स को गलत बताया जिनमें दावा किया गया था कि उन्होंने विशेषाधिकार समिति से सुनवाई टालने की मांग की थी।